Thursday, October 01, 2020 06:11 AM

नेरचौक अस्पताल में प्लाज्मा डोनेशन बैंक खोले सरकार

नेरचौक-विश्वभर में कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों के इलाज में कारगर साबित हो रही प्लाज्मा थैरेपी को देखते हुए भारत वर्ष में कई राज्य सरकारें प्लाज्मा बैंक स्थापित करने में जुटी हुई हैं, मगर हिमाचल सरकार ने अभी तलक इस बाबत कोई कदम नहीं उठाया है। हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में कोरोना संक्रमण बड़ी तेजी से फैल रहा है, जिससे रोजाना केसों में वृद्धि होने के चलते प्रभावित जिलों में सप्ताह के भीतर ही नए कोविड केयर सेंटर बनाने पड़ गए हैं, जो कि तेजी से फैल रही महामारी एवं कम्युनिटी स्प्रेड का संकेत है। सरकार के पास संक्रमित मरीजों को आइसोलेट करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। वहीं अभी तक सरकार मरीजों की संख्या गिनने में लगी हुई है, जबकि भविष्य को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बन पाई है। बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार को ठोस उपाय करने होंगे। सरकार को उन सभी विकल्पों पर भी विचार करना होगा, जिसके बूते केरल, दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडि़सा जैसे राज्यों ने कोरोना महामारी पर लगाम लगानी शुरू कर दी है। इन राज्यों ने ट्रेस, टेस्ट और ट्रीटमेंट से आगे बढ़कर प्लाज्मा थैरेपी को अपनाया है, जो कि काफी कारगर साबित हुई है। इसके लिए इन राज्यों ने अस्पतालों में प्लाज्मा बैंक स्थापित किए हैं।

प्लाज्मा बैंक स्थापित करने के उपरांत उन कोरोना मरीजों की सूची तैयार की जाती है, जो कि अपना प्लाज्मा डोनेट करने के लिए तैयार हैं। इसके लिए उपरोक्त राज्य सरकारों द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं, नतीजतन और राज्यों की तुलना में वहां कोरोना संक्रमित व्यक्ति जल्द स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। हिमाचल सरकार को भी प्रदेश के डेडिकेटेड कोविड केयर अस्पताल नेरचौक में प्लाज्मा डोनेशन बैंक स्थापित कर भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। सरकार पहल कर मरीजों का डाटा बैंक तैयार करे, तो बड़ी संख्या में कोरोना से ठीक हुए लोग प्लाज्मा डोनेशन के लिए आगे आ सकते हैं। बशर्ते सरकार को इस बारे में जल्द निर्णय लेना होगा। वहीं कोरोना काल में भी प्लाज्मा डोनेशन के पहले डोनर का एंटी बॉडी स्क्रीनिंग टेस्ट कर गाइडलाइन के सारे नियम फॉलो करने के बाद प्लाज्मा लिया जाता है। कोरोना से 14 दिन पहले ठीक हुए व्यक्ति में एंटी बॉडी डिवेलप हो जाते हैं, जो कि कोरोना वायरस को खत्म करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी का प्लाज्मा कोरोना पीडि़त मरीज को चढ़ाया जाता है। प्लाज्मा तुरंत कोरोना वायरस को कमजोर कर मरीज को राहत प्रदान करता है।

यह होती है प्लाज्मा थैरेपी

दरअसल, प्लाजमा थैरेपी क्या होती है, इसको कुछ इस तरह से समझा जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अभी तक कई तरीके अपनाए गए हैं। इन्हीं में से एक कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा थैरेपी भी शामिल है। इस थैरेपी में कोरोना जैसी बीमारी से ठीक हो चुके मरीज के खून से प्लाज्मा को अलग कर कोरोना संक्रमित मरीजों के खून में मिलाया जाता है। इस प्लाज्मा में शामिल एंटी बॉडीज मरीज को वायरस से लड़ने में मदद करती है। वहीं यह विधि उनकी इम्युनिटी पावर को भी तेजी से बढ़ाती है। रिसर्च में जताया जा रहा है कि कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा को कोविड 19 के गंभीर मरीजों को दिया जा सकता है। इससे उनके शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी और वह जल्द ही ठीक भी हो सकेंगे। वहीं प्लाज्मा खून के अंदर का 55 प्रतिशत हिस्सा होता है। यह 91 से 92 प्रतिशत पानी से बना होता है, जिसका रंग हल्का पीला होता है।

संक्रमित व्यक्ति ही कर सकता है डोनेशन

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के अनुसार  कॉन्वालैसेंट प्लाज्मा केवल वही व्यक्ति दे सकता है,  जो कि कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ हो और फिर ठीक हो गया हो, साथ ही उक्त व्यक्ति ब्लड डोनेशन के लिए योग्य हो। इतना ही नहीं प्लाज्मा डोनेट करने वाले की उम्र 17 साल से अधिक होनी चाहिए। कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होने के 14 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। प्लाज्मा डोनेट करने से पहले डोनर की पूरी जांच की जाती है।  इसमें सही पाए जाने पर ही उसे प्लाज्मा डोनेट की अनुमति दी जा सकती है।

 

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