Sunday, December 06, 2020 03:35 AM

निष्पक्षता बरतें राज्यपाल

रूप सिंह नेगी, सोलन

धार्मिक स्थानों को खोलने के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच पंथनिरपेक्षता यानी सेक्युलरिज्म पर छिड़ी जंग को शोभनीय नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस विवाद को पद की गरिमा के अनुरूप सही नहीं माना जा सकता है। संवैधानिक पद पर बैठे महानुभावों को देश के संविधान की मर्यादा का ख्याल करना चाहिए कि देश संविधान से चलता है और संविधान  के अनुसार देश धर्मनिरपेक्ष है, जहां हर धर्म, महजब और जाति के लोगों को रहने व धार्मिक रीति-रिवाज मानने का हक प्राप्त है। हिंदुत्व और सेक्युलरिज्म में अंतर होता है। हिंदुत्व अलग बात है और धर्मनिरपेक्षता अलग बात है। राज्यपाल का पद ग्रहण करने के बाद राज्यपालों से अपेक्षा होती है कि वे दलीय राजनीति से ऊपर उठ कर निष्पक्ष होकर कार्य करें। जहां तक धार्मिक स्थानों को खोलने की बात  है, वह कोविड संक्रमण के आंकड़ों पर निर्भर करता है और जल्दबाजी दिखाना जोखिम भरा भी साबित हो सकता है। इस पर राजनीति करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।

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