Tuesday, November 30, 2021 08:30 AM

हिमाचल में भी मिलेगा अब कड़कनाथ का स्वाद

मंडी के चौंतड़ा में 2.16 करोड़ से स्थापित होगी हैचरी, केंद्र से स्वीकृति मिलते ही प्रदेश में बनेगा पहला प्रोजेक्ट

मणि कुमार-मंडी अब हिमाचल के लोगों को भी कड़कनाथ का स्वाद चखने को मिलेगा। इसके लिए जिला मंडी के चौंतड़ा में सरकार द्वारा 2 करोड़ 16 लाख 79 हजार रुपए के बजट में कड़कनाथ का प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। जिसमें चौंतड़ा में चल रहे पोल्ट्री फार्म को विकसित कर हैचरी हब बनाया जाएगा। इसके अलावा पशु पालन विभाग के नाहन और सुंदरनगर में भी दो बड़े पोल्ट्री फार्म चल रहे हैं। जिनकी क्षमता में लगभग 2200 पक्षियों को रखने की है और दो लाख से अधिक चूजों को तैयार किया जाता है। जहां पर चैबरो नस्ल के पक्षियों के चूजों को तैयार किया जाता है।

जो नारंगी रंग के होते हैं। वहीं, सुंदरनगर से छह जिलों को चूजों की सप्लाई की जाती है। जिसमें बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, कांगड़ा, चंबा जिला हैं और नाहन से सिरमौर, शिमला, किनौर, सोलन व ऊना जिला शामिल हैं। हिमाचल में हैचरी शुरू होने से अब पशु पालन विभाग को दूसरे राज्यों से कड़कनाथ नहीं मंगवाने पड़ंगें। इसके साथ प्रदेश में कड़कनाथ की हैचरी बनने से इसका मास के मूल्यों में भी राहत मिल सकती है। वहीं, पशु पालन विभाग जिला मंडी के उपनिदेशक डॉ. संजीव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति के लिए केंद्र में पहुंचा दिया गया। जैसे ही केंद्रीय मंत्रालय से इसका स्वीकृति मिलता है तो इसके निर्माण संबंध अन्य कार्य शुरू हो जाएंगे। साथ ही बजट मिलते ही इसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।

बाजार में 1100 रुपए किलो मास का मूल्य चौंतड़ा में बनने वाली हैचरी में कड़कनाथ के मास का बाजार में 1100 रुपए किलो मूल्य है। इससे शुगर जैसी गंभीर बीमारियों के लोगों के स्वास्थ्य को लाभ मिलेगा। इसमें अन्य पक्षियों के मुकाबले चार प्रतिशत अधिक प्रोटीन है। गौर हो कि मध्य प्रदेश के जिला झाबुआ में पाए जाने वाले इस मुर्गे को अब हिमाचल में भी पाला जाएगा। इस मुर्गे का एक बच्चा 70 रुपए से 150 रुपए में मिलता है और एक अंडा करीब 40 से 50 रुपए में मिलता है।

3500 पेरेंट्स पक्षी रखने की क्षमता वहीं, पशु पालन विभाग के अनुसार इस हैचरी में करीब 3500 पेरेंट्स पक्षी रखने की क्षमता होगी, जिसके लिए 3500-3500 पक्षियों को रखने के लिए दो-दो शेड का निर्माण किया जाएगा। नियम के अनुसार एक पक्षी को रखने के लिए डेढ स्किवेयर फीट की जगह की जररूत होती है। पेरेंट्स पक्षियों से तैयार किए जाएंगे चूजे हैचरी हब में पेरेंट्स पक्षियों से प्राप्त अंड़ों से कड़कनाथ के चूजे तैयार किए जाएंगे। जिसके बाद इन चूजों को पालने के लिए क्षेत्र के किसानों में वितरित किया जाएगा। इसके साथ यह चूजे पूरे हिमाचल के किसानों में बांटे जाएंगे। जहां के किसानों द्वारा चूजों को पालने के बाद बाजार में उतारा जाएगा। एचडीएम