Tuesday, November 30, 2021 08:30 AM

दशहरे पर लें अहंकार छोड़ने का संकल्प

त्रेता युग में तो लंका में ही एक रावण था जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता था, लेकिन कलियुग में तो हर जगह रावण विद्यमान हैं, जो अपने धन और हर तरह के बल का दुरुपयोग करके इंसानियत के बर्खलाफ काम कर रहे हैं। कलियुग के रावण तो इंसानियत से गिर कर जो काम कर रहे हैं, वैसे तो त्रेतायुग के रावण ने भी नहीं किए होंगे। कलियुग में रावण के दस से भी ज्यादा सिर विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्याधियों के रूप में हैं, जो मुख्यतः स्वार्थ, बेईमानी, हेराफेरी, अनैतिकता, भ्रष्टाचार, शोषण, नशा, धर्म-जाति के नाम पर हिंसा आदि के रूप में हमारे समाज में घूम रहे हैं। इनका अंत आखिर कब और कौन करेगा, यह हमें सोचना है। इसके अलावा हर व्यक्ति को दशहरे पर अहंकार छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

-राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टीहरा