Saturday, January 23, 2021 03:00 AM

ऊहल परियोजना का पेन स्टॉक फटने पर प्रबंध निदेशक सस्पेंड

जांच रिपोर्ट के बाद बिजली बोर्ड की कार्रवाई; 17 मई को हुआ था धमाका, प्रोजेक्ट में वर्ष 2013 के बाद तैनात अधिकारियों के भी मांगे नाम

प्रदेश सरकार की ऊहल जल विद्युत परियोजना में सालिमा प्लेट के ब्लास्ट होने के मामले में ब्यास वैली पावर कार्पोरेशन के एमडी पर गाज गिरी है।  करीब छह महीने के बाद सरकार के निर्देशों पर राज्य बिजली बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए ब्यास वैली पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ई. दिनेश चौधरी को सस्पेंड कर दिया है।

 हालांकि बिजली बोर्ड की कार्रवाई से कई सवाल भी खड़े हुए हैं, मगर फिलहाल एमडी पर गाज गिराई गई है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2013 के बाद यहां कौन-कौन अधिकारी तैनात रहे हैं, उनके नाम भी मांगे गए हैं। अभी एक ही अधिकारी पर कार्रवाई हुई है, परंतु कुछ और लोगों पर कार्रवाई होने की उम्मीद है। सवाल यह खड़ा हुआ है कि ब्यास वैली कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक कोई भी फैसला अपने स्तर पर नहीं लेते, बल्कि निदेशक मंडल फैसला लेता है, तो एक ही अधिकारी पर कार्रवाई क्यों।

 इस पर सूत्रों का कहना है कि एमडी पर लापरवाही बरतने का आरोप है। बताया जाता है कि बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक आरके शर्मा ने मामले की जांच की थी और उनकी जांच रिपोर्ट सरकार को गई थी। सरकार ने इस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जिसपर पिछले कल  एमडी को सस्पेंड कर दिया गया है।

फट गई थी सालिमा प्लेट

17 मई, 2020 को परियोजना की टेस्टिंग के दौरान सालिमा प्लेट में ब्लास्ट हो गया। सरकार के निर्देशों पर 100 मेगावाट की परियोजना को चालू किया जाना था, मगर आखिरी टेस्टिंग में रात के समय सालिमा प्लेट फट गई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया से यह उपकरण खरीदे गए थे, जो कि गुणवत्ता में घटिया पाए गए। इतना ही नहीं, इससे पहले भी चार प्रोजेक्टों में सालिमा प्लेट ब्लास्ट कर चुकी है।

घटिया था मैटीरियल

चार पेज की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जब मैटीरियल में डिफेक्ट था, तो उसे बदलने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए। जिम्मेदार अधिकारियों की यह ड्यूटी थी, जिन्होंने लापरवाही बरती। लैब टेस्ट में यह सामान घटिया पाया गया था।

पहले भी उठे हैं स्टील पर सवाल

परियोजना के पेनस्टाक में कुल 3565 मिट्रीक टन स्टील का उपयोग किया गया है। बोर्ड द्वारा पेन स्टॉक के फ टने का ठीकरा एक अधिकारी के सिर फ ोड़ा है। हालांकि यह स्टील प्रदेश के अन्य पांच पावर प्रोजेक्टों के पेन स्टॉक में भी फ ट चुकी है। सवाल उस समय भी उठे कि जब इस स्टील का परिणाम बोर्ड के सामने था, तो फि र यह स्टील परियोजना में लगाई ही क्यों गई। परियोजना की गुणवता पर इससे पहले भी स्वाल उठते रहे हैं, जो परियोजना 2008 में 432 करोड़ रुपए में पूरी होनी थी, उस पर अब तक दो हजार करोड़ व्यय हो चुके हैं और अभी भी कितनी राशी खर्च होगी तथा परियोजना कब पूरी होगी कहा नहीं जा सकता है।

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