Friday, September 24, 2021 05:22 AM

आउटसोर्सिंग हब की डगर

हमें आउटसोर्सिंग के लिए अमरीकी बाजार के साथ-साथ यूरोप और एशिया प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों में नई व्यापक संभावनाओं को मुठ्ठियों में लेना होगा। भारत ग्लोबल आउटसोर्सिंग हब बनेगा...

यकीनन इस समय भारत के ग्लोबल आउटसोर्सिंग का हब बनने का नया परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। विगत 23 जून को सरकार ने भारत को एक पसंदीदा वैश्विक आउटसोर्सिंग हब बनाने के लिए बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) उद्योग को प्रोत्साहित करने के महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सरकार ने ‘वॉयस’ बेस्ड बीपीओ यानी टेलीफोन के जरिए ग्राहकों को सेवा देने वाले क्षेत्रों के लिए दिशानिर्देश को सरल, स्पष्ट और उदार बनाया है। इसके तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय इकाइयों के बीच अंतर को समाप्त कर दिया गया है तथा अन्य सेवा प्रदाताओं (ओएसपी) के बीच इंटरकनेक्टिविटी की अनुमति सहित कई विशेष रियायतें दी गई हैं। ओएसपी से आशय ऐसी कंपनियों या इकाइयों से हैं जो दूरसंचार संसाधनों का उपयोग कर आईटी युक्त सेवाएं, कॉल सेंटर या अन्य प्रकार की आउटसोर्सिंग सेवाएं दे रही हैं। इसमें टेली मार्केटिंग, टेलीमेडिसिन आदि सेवाएं शामिल हैं। ऐसे नए दिशानिर्देशों से बीपीओ के तहत ज्यादा कारोबार सुगमता सुनिश्चित हो सकेगी, नियामकीय स्पष्टता आएगी, लागत कम होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे देश की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को मदद मिलेगी।

 सरल भाषा में आउटसोर्सिंग का मतलब है कोई कार्य उद्योग-कारोबार संस्थान के परिसर के बाहर देश या विदेश में कहीं भी उपयोगी एवं मितव्ययी रूप से संपन्न कराना। ऐसा कार्य आईटी के बढ़ते प्रभाव के चलते संभव हो सका है। यह माना जा रहा है कि अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा सहित दुनिया के कई देश आईटी, फायनेंस, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, इंश्योरेंस, बैंकिंग, एजुकेशन आदि ऐसे कई क्षेत्रों में भारी मात्रा में बचत राशि हासिल करने में सिर्फ इसलिए कामयाब हैं क्योंकि वे अपनी प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा भारत सहित कुछ गुणवत्तापूर्ण काम करने वाले देशों में आउटसोर्सिंग के लिए एजेंसियों को सौंप रहे हैं। दरअसल पश्चिमी और यूरोपीय देशों में श्रम लागत भारत की तुलना में करीब पांच-दस गुना तक महंगी है, जिससे किसी भी सेवा की लागत बढ़ जाती है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों की रिपोर्टों में भी यह बात उभरकर सामने आ रही है कि कोविड-19 के मद्देनजर अमरीका सहित विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के विकास में उद्योगों की उत्पादन लागत घटाने के परिप्रेक्ष्य में आउटसोर्सिंग आवश्यक है। कोविड-19 की वजह से वैश्विक यथार्थ को देखते हुए विकसित देशों के लिए आउटसोर्सिंग जैसी ताकत के बल पर व्यापारिक एवं औद्योगिक चुनौतियों का सामना करने में सरलता होगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षों से आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भारत की प्रगति के पीछे देश में संचार का मजबूत ढांचा एक प्रमुख कारण है। दूरसंचार उद्योग के निजीकरण से नई कंपनियों के अस्तित्व में आने से दूरसंचार की दरों में भारी गिरावट आई है। उच्च कोटि की त्वरित सेवा, आईटी एक्सपर्ट और अंग्रेजी में पारंगत युवाओं की बड़ी संख्या ऐसे अन्य कारण हैं, जिनकी बदौलत भारत पूरे विश्व में आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। वस्तुतः कोविड-19 के वैश्विक संकट के बीच देश और दुनिया से ज्यादातर कारोबार गतिविधियों के ऑनलाइन होने के बाद डिजिटल दुनिया में भारत के आउटसोर्सिंग सेक्टर की प्रभावी भूमिका नए भारत का एक चमकदार उदाहरण है। यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भारत में बीपीओ उद्योग वैश्विक ग्राहकों के लिए लगातार प्रक्रियागत नवाचार कर रहा है। कोविड-19 के समय में वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) से भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों का कार्बन उत्सर्जन घटना भारत के लिए लाभप्रद हो गया है।

 जहां कार्बन उत्सर्जन में कमी के आधार पर भी आउटसोर्सिंग कारोबार में भारी वृद्धि की नई संभावनाएं निर्मित हुई हैं, वहीं अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की नई आर्थिक नीति से भारत से आउटसोर्सिंग कारोबार के तेजी से बढ़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं। ज्ञातव्य है कि भारत दुनिया में आउटसोर्सिंग सेवाओं का बड़ा निर्यातक देश है। भारत की 200 से अधिक आईटी फर्म दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में काम कर रही हैं। इस समय भारतीय आईटी उद्योग आउटसोर्सिंग के मद्देनजर तेजी से नई भर्तियां करते हुए भी दिखाई दे रहा है। दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक भारत में बीपीओ क्षेत्र में करीब 14 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। भारत के बीपीओ उद्योग का आकार 2019-20 में 37.6 अरब डॉलर (करीब 2.8 लाख करोड़ रुपए) का था। यह आकार कोविड-19 की वजह से तेजी से बढ़ता हुआ 2025 तक 55.5 अरब डॉलर (करीब 3.9 लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर पहुंच सकता है। निःसंदेह कोविड-19 ने भारत के लिए आउटसोर्सिंग की चमकीली संभावनाएं बढ़ाई हैं। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। आउटसोर्सिंग उद्योग के लिए कृषि, स्वास्थ्य और वेलनेस, टेलीमेडिसिन, शिक्षा और कौशल के क्षेत्र से संबंधित नए टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस बनाने की जरूरत है। अब बढ़ते आउटसोर्सिंग कारोबार के मद्देनजर देश के आईटी सेक्टर को यह रणनीति बनानी होगी कि किस तरह के काम दूर स्थानों से किए जा सकते है और कौन-से काम कार्यालय में आकर किए जा सकते हैं। अब देश के आउटसोर्सिंग उद्योग को महानगरों की सीमाओं के बाहर छोटे शहरों और कस्बों में गहराई तक ले जाने की जरूरत को ध्यान में रखा जाना होगा। भारत के स्टार्टअप के संस्थापकों को आउटसोर्सिंग से संबंधित वैश्विक स्तर के उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा, जिससे आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की जगह बनाई जा सकेगी। यद्यपि आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भारत परचम फहराते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमें इस क्षेत्र में दुनिया के कई देशों से मिल रही चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा। आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में चीन भारत को पीछे करने के लक्ष्य के साथ एक महाशक्ति बनने की डगर पर सुनियोजित रूप से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में हमें देश में आउटसोर्सिंग के चमकीले भविष्य के लिए प्रतिभा निर्माण पर जोर देना होगा।

 इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि सॉफ्टवेयर उद्योग में हमारी अगुवाई की मुख्य वजह हमारी सेवाओं और प्रोग्राम्स का सस्ता होना है। अतएव इस स्थिति को बरकरार रखने के लिए हमें तकनीकी दक्ष लोगों की उपलब्धता बनाए रखनी होगी। नई पीढ़ी को आईटी की नए दौर की शिक्षा देने के लिए समुचित निवेश की व्यवस्था करनी होगी। नए दौर की तकनीकी जरूरतों और इंडस्ट्री की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण से नई पीढ़ी को सुसज्जित करना होगा। शोध, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मापदंडों पर आगे बढ़ना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियल्टी, रोबोटिक प्रोसेस, ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा एनालिसिस, क्लाउड कम्प्यूटिंग और ब्लॉक चेन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाना होगा। आउटसोर्सिंग उन्नयन के ऐसे प्रयासों से ही दुनिया भारतीय आईटी प्रतिभाओं का लोहा मानती रहेगी तथा भारतीय प्रतिभाएं देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनते हुए दिखाई देंगी। हमें आउटसोर्सिंग के लिए अमरीकी बाजार के साथ-साथ यूरोप और एशिया प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों में नई व्यापक संभावनाओं को मुठ्ठियों में लेना होगा। हमें आउटसोर्सिंग क्षेत्र में बढ़त बनाए रखने के लिए एअरपोर्ट, सडक़ और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्र में तेजी से विकास करना होगा। हम उम्मीद करें कि पिछले कई वर्षों से दुनिया में आउटसोर्सिंग कारोबार में बढ़त बनाने वाला भारत अब बीपीओ से संबंधित सरकार के नए दिशानिर्देशों के उपयुक्त कार्यान्वयन से ग्लोबल आउटसोर्सिंग हब बनने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री