Tuesday, January 26, 2021 01:48 PM

Kisan Protest: पांचवें दौर की बातचीत, पीएम ने मंत्रियों के साथ की बात, किसानों का फिर बुलाया

नई दिल्ली — नए कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसानों और केंद्र सरकार में टकराव बरकरार है। पांचवें दौर की बातचीत के लिए किसान नेता विज्ञान भवन जा रहे हैं। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह कैबिनेट के वरिष्‍ठ साथियों को आवास पर बुलाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि नरेंद्र सिंह तोमर इस मीटिंग में मौजूद रहे। रेल मंत्री पीयूष गोयल भी इसका हिस्‍सा था।

मीटिंग के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘शनिवार को किसानों के साथ दोपहर 2 बजे मीटिंग तय है। मुझे उम्मीद है कि किसान सकारात्मक विचार करेंगे और विरोध प्रदर्शन खत्म करेंगे।’ हालांकि किसान संगठनों के नेता दो-टूक कह रहे हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा।

आपको बताते चलें कि कृषि सुधार कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत होगी, जबकि किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान कर दबाव बढ़ा दिया है। किसान संगठनों ने कहा है कि तीन नए कृषि कानून को रद्द नहीं किया गया तो आठ दिसंबर को भारत बंद किया जाएगा। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसान संगठनों को आंदोलन का रास्ता छोड़ कर बातचीत से समस्या का समाधान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत बंद भी किया जाता है तो बातचीत से ही रास्ता निकल सकता है। पिछले दस दिन से राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे इस आंदोलन की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी आंदोलन शुरू हो गया है या राज्यों की ओर से किसानों का समर्थन किया गया है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने आज से धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी लेनिनवादी) ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने का ऐलान किया है ।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन को कल किसानों से मिलने भेजा था और वह करीब चार घंटे तक किसानों के साथ रहे।

इस दौरान सुश्री बनर्जी ने टेलीफोन पर कई किसान नेताओं से बातचीत की और उन्हें हर तरह का समर्थन देने का आश्वासन दिया। दिल्ली की सीमा पर किसानों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है और वे राष्ट्रीय राजधानी के सभी रास्तों को बंद करने की धमकी भी दे रहे हैं ।

इस बीच हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा कई अन्य राज्यों से आंदोलनकारी किसानों को खाने-पीने की वस्तुओं की भरपूर मदद की जा रही है। इस आंदोलन को ट्रेड यूनियन संगठनों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों तथा कुछ अन्य लोगों का भी समर्थन मिल रहा है ।

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