युवाओं को देशभक्ति की सीख देता है पझौता आंदोलन, दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता ने की थी बगावत

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी विवो ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन वाई 73 को लांच करने की घोषणा की है जिसकी कीमत 20990 रुपए है। कंपनी ने गुरुवार को यहां बताया कि उसके नए ब्रांड आईकॉन अभिनेत्री सारा अली खान ने इस स्मार्टफोन को लांच किया है। 8जीबी रैम और 128जीबी रोम व फोन का स्क्रीन 6.44 इंच का है। एंड्रॉयड 11 ऑपरेङ्क्षटग सिस्टम आधारित इस फोन में मीडियाटेक हेलियो जी 95 प्रोसेसर है। कंपनी ने कहा कि स्मार्टफोन में 16 एमपी का फ्रंट कैमरा और 6 एमपी का रियर कैमरा है, जिसमें दो-दो एमपी के दो अन्य कैमरे भी हैं। इस तरह ट्रिपल रियर कैमरा है।

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश स्टाफ सिलेक्शन कमीशन हमीरपुर ने एलोपेथी (पोस्ट कोड 804) का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। आयोग सचिव डा. जितेंद्र कंवर ने बताया कि चार पदों के लिए 231 अभ्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 33 आवेदन ही सही पाए गए। 17 दिसंबर, 2020 को आयोजित लिखित परीक्षा में आठ अभ्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि 25 अभ्यार्थियों ने परीक्षा में भाग नहीं लिया। आठ मार्च, 2021 को 15 अंकों की मूल्यांकन परीक्षा के लिए छह अभ्यार्थियों को बुलाया गया था। इनमें से दो अभ्यार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया है, जबकि दो पद सामान्य वार्ड ऑफ एक्ससर्विस मैन के पात्र अभ्यार्थियों के चलते खाली रह गए हैं। उत्तीर्ण अभ्यार्थियों में रोल नंबर 804000008 नतीश और रोल नंबर 804000031 निधि चौधरी शामिल है।

आईआईएससी यूनिवर्सिटी ग्लोबल रैंङ्क्षकग में शुमार

बंगलूर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में बेंगलुरू स्थित प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) की क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय की वैश्विक रैंङ्क्षकग में शामिल होने पर सराहना की है। श्री मोदी ने एक ट््वीट में आईआईएससी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली को बधाई दी और कहा कि देश के विश्वविद्यालयों और संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने और छात्रों को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने की पुरजोर कोशिश जारी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आईआईएससी को क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंङ्क्षकग में दुनिया के शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में शुमार होने के लिए बधाई दी और कहा कि आईआईएससी प्रत्येक भारतीय का गौरव है।

प्रीमियम स्मार्टफोन कंपनी वन प्लस ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारत में वन प्लस टीवी यू-1एस सीरिज लांच कर दी है, जो कि धांसू मॉडल्स हैं। वनप्लस के ये स्मार्ट टीवी देखने में तो शानदार हैं हीं, साथ ही इनके फीचर्स, जैसे पिक्चर और साउंड क्लालिटी भी बेहद जबरदस्त है। वन प्लस टीवी यू-1एस सीरिज के मॉडल 50 इंच, 55 इंच और 65 इंच मॉडल में हैं। ये सभी स्मार्ट टीवी 10 वाइट कलर डेप्थ और 93 परसेेंट डीसीआई-पी3 कररेज के साथ 4के रेजॉल्यूशन में हैं। वनप्लस के इन स्मार्ट टीवी में बाहरी शोर कम करने के लिए नॉयस रिडक्शन, डॉल्बी ऑडियो, मल्टीकास्ट समेत कई अन्य फीचर्स भी हैं। 50 इंज मॉडल की शुरुआती कीमत 39999 रुपए, 55 इंच मॉडल की कीमत 47999 रुपए और 65 इंच मॉडल की कीमत 62999 रुपए है।

11 जून, 1943 में तत्कालीन राजा की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता ने की थी बगावत

निजी संवाददाता - यशवंतनगर

11 जून का दिन हर वर्ष पझौता आंदोलन के नायक कमनाराम के बलिदान को याद करवाता है। गौर रहे कि 11 जून, 1943 को महाराजा सिरमौर राजेंद्र प्रकाश की सेना द्वारा पझौता आंदोलन के निहत्थे लोगों पर राजगढ़ के सरोट टिले से 1700 राउंड गोलियां चलाई गई थीं, जिसमें कमना राम नामक व्यक्ति गोली लगने से मौके पर ही शहीद हुए थे, जबकि तुलसी राम, जाती राम, कमाल चंद, हेत राम, सही राम व चेत सिंह घायल हो गए थे। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पझौता आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम का एक हिस्सा माना जाता है और यह दिन युवाओं को देश की एकता व अखंडता का संदेश देता है। पझौता स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश चौहान ने कहा कि उनके पिता वैद्य सूरत सिंह के नेतृत्व में इस क्षेत्र के जांबाज एवं वीर सपूतों द्वारा 1943 में अपने अधिकार के लिए महाराजा सिरमौर के विरुद्ध आंदोलन करके रियासती सरकार के दांत खट्टे कर दिए थे। इसी दौरान महात्मा गांधी द्वारा 1942 में देश में भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ किया गया था, जिस कारण इस आंदोलन को देश के स्वतंत्र होने के उपरांत भारत छोड़ो आंदोलन की एक कड़ी माना गया था, जिस कारण पझौता अंदोलन से जुड़े लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा दिया गया था । उन्होंने बताया कि महाराजा सिरमौर राजेंद्र प्रकाश की दमनकारी एवं तानाशाही नीतियों के कारण लोगों में रियासती सरकार के प्रति काफी आक्रोश था। पझौता आंदोलन का तत्कालिक कारण आलू का रेट उचित न दिया जाना था।

बताते है कि रियासती सरकार द्वारा सहकारी सभा में आलू का रेट तीन रुपए प्रति मन निर्धारित किया गया, जबकि खुले बाजार में आलू का रेट 16 रुपएा प्रतिमन था। चूंकि आलू की फसल इस क्षेत्र के लोगों की आय का एकमात्र साधन थी, जिस कारण लोगों में रियासती सरकार के प्रति काफी आक्रोश पनम रहा था। रियासती सरकार के तानाशाही रवैये से तंग आकर पझौता घाटी के लोग अक्तूबर, 1942 में टपरोली नामक गांव में एकत्रित हुए और 'पझौता किसान सभा का गठन किया गया था, जबकि आंदोलन की पूरी कमान एवं नियंत्रण सभा के सचिव वैद्य सूरत सिंह के हाथ में थी । उन्होंने बताया कि पझौता किसान सभा द्वारा पारित प्रस्ताव को महाराजा सिरमौर को भेजा गया, जिसमें बेगार प्रथा को बंद करने ए जबरन सैनिक भर्ती, अनावश्यक कर लगाने, दस मन से अधिक अनाज सरकारी गोदामों में जमा करना इत्यादि शामिल था। महाराजा सिरमौर राजेंद्र प्रकाश द्वारा उनकी मांगों पर कोई गौर नहीं किया गया। बताया जाता है कि राजा के चाटुकारों द्वारा समझौता नहीं होने दिया गया, जिस कारण पझौता के लोगों द्वारा बगावत कर दी गई और उस छोटी सी चिंगारी ने बाद में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया था। जयप्रकाश चौहान ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास लोगों को राष्ट्र भक्ति की प्रेरणा देता है और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वााले महान सपूतों की कुर्बानियों एवं आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना होगा ताकि देश की एकता एवं अखंडता बनी रहे ।

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