Saturday, November 28, 2020 12:59 AM

परीक्षा की चोरी

कारण कुछ भी हो या कंडक्टर भर्ती को ‘पेपर लीक’ न कहने की वजह मिले, फिर भी कहीं सरकारी नौकरी में प्रवेश अभिशप्त हो गया। यह साठ हजार अभ्यर्थियों की मेहनत और महत्त्वाकांक्षा का सरेआम  मजाक सरीखा है कि परीक्षा केंद्र से व्हाट्सऐप के जरिए प्रश्न पत्र बाहर पहुंच जाता है। भले ही सीधे तौर पर पेपरलीक का मामला नहीं है, लेकिन परीक्षा के भीतर से चुपचाप खिसका हुआ ऐसा मंतव्य है जो सारी व्यवस्था को चूना लगाने की साजिश रचता है। परीक्षा केंद्र के भीतर छेद ढू़ंढ रहे अभ्यर्थी किसी तंत्र या षड्यंत्र का हिस्सा थे, यह तो जांच से ही पता चलेगा, लेकिन सीधे तौर पर व्यवस्थागत खामियों के बीच मोबाइल अवश्य ही अपना गुल खिला गए। शाहपुर से सुंदरनगर तक एक जैसा परीक्षा चीरहरण का प्रयास अंततः किसी तरह की योजना का हिस्सा ही होगा या व्हाट्सऐप के गंतव्य में कोई चांडाल चौकड़ी किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। जो भी हो इस पूरे प्रकरण के मार्फत जो आशंकाएं उभरी हैं, उनसे ईमानदारी से परीक्षा केंद्र पहुंचे युवाओं के लिए किसी झटके की तरह रहेंगी। करीब छह सौ पदों के लिए कंडक्टर भर्ती परीक्षा का आयोजन कईर् एहतियाती कदमों से इसलिए भी जुड़ा था, क्योंकि इसी तरह की भर्तियां अतीत में शिकायत करती रही हैं। कई बार विवादों से जुड़ी रही चालक-परिचालक भर्तियां पुनः आशंकाओं का बाजार गर्म कर रही हैं।

 इस बार चयन परीक्षा के साथ भले ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का नाम जुड़ा था, लेकिन प्रक्रिया के भीतर सुराख करने में दो अभ्यर्थी सफल रहे या उनके माध्यम से परीक्षा केंद्र की गोपनीयता कहीं न कहीं नीलाम हो रही थी। इस तरह यह परीक्षा पत्र का लीक होना माना जाए या नहीं, इस पर तुरंत फैसला करना होगा, वरना आशंकाओं के बीच साठ हजार बेरोजगारों के लिए फिर एक अवसर खोने की वजह हमेशा कलंकित करेगी। आश्चर्य यह कि हमारी व्यवस्था अपनी ईमानदारी का सबूत नहीं दे पा रही है। इससे पहले पुलिस भर्ती के दौरान भी कमोबेश ऐसे ही मामले ने सारी परीक्षा को स्थगित करवा दिया था और अब भी पूरी प्रक्रिया पर तलवार लटकी रह सकती है। हिमाचल में सरकारी नौकरी का बाजार कई दृष्टि से पनप रहा है, जिसे इक्का-दुक्का उदाहरणों से नहीं समझा जा सकता। बाकायदा अकादमियों के माध्यम से विभिन्न पदों के लिए गारंटीशुदा तैयारी कराई जा रही है, तो बीच में कुछ अवांछित घटनाक्रमों के कारण संदिग्ध लोग सामने भी आ रहे हैं।

 ऐसे में लाजिमी तौर पर सरकारी भर्ती या चयन परीक्षा के सारे बंदोबस्त खंगालने पड़ेंगे। यह अनेक तरह से संभव है, बशर्ते परीक्षा से साक्षात्कार तक पारदर्शिता तथा निष्पक्षता का माहौल स्थापित हो । ऐसी परीक्षाओं के चरण बढ़ाने चाहिएं और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि परीक्षा केंद्र गरिमापूर्ण ढंग से काम करें। प्रदेश में विभिन्न परीक्षाओं के दृष्टिगत कुछ राज्य स्तरीय परीक्षा केंद्रों की स्थापना के अलावा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को अपनी प्र्रक्रिया से पद्धति तक सतर्कता के साथ पारदर्शिता का एहसास कराना होगा। कंडक्टर भर्ती पुनः अभिशप्त हुई है। हम दो युवाओं की गलती मानकर पूरी प्रक्रिया को ईमानदार ठहरा सकते हैं, लेकिन जहां छह सौ पदों के लिए साठ हजार अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे हों वहां सिर्फ जांच से व्यवस्था की विश्वसनीयता नहीं बढ़ सकती। ऐसी परीक्षा तक केवल एक युवा ही नहीं पहुंचता, बल्कि ऐसे अवसरों से होकर पूरी पीढ़ी का भविष्य आगे बढ़ता है। अगर पड़ताल या संदेह के वर्तमान दौर में परीक्षा निरस्त होती है, तो कितने परिवारों की आशा पर चोट लगेगी, यह भी समझना होगा।

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