Saturday, October 24, 2020 02:38 AM

पशुओं का घरद्वार होगा इलाज

नादौन दौरे के दौरान पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने दी जानकारी,किसानों-दुग्ध उत्पादकों को होगा लाभ

खंड स्तर के पशु औषधालयों को अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि उनमें एक्सप्रेस सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें, वहीं ऐसे अस्पतालों में रोगी कल्याण समितियों की तर्ज पर पशु कल्याण समितियों का गठन किया जाएगा। नादौन दौरे पर आए पंचायती राज एवं पशुपालन विभाग मंत्री वीरेंद्र सिंह कंवर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया है।

उन्होंने बताया कि एक पायलट प्रोजेक्ट की योजना तैयार की गई है, जिसमें पशुओं को अस्पताल लाने की बजाय पशुपालकों को घर-द्वार स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ब्लॉक स्तर पर एंबुलेंस सेवा आरंभ की जा रही है। उन्होंने बताया कि दुर्गम क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दुग्ध एकत्रीकरण व प्रबंधन के लिए 120 नए पदों को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे इस क्षेत्र में किसानों व दुग्ध उत्पादकों को और लाभ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दुग्ध क्षेत्र में जो कार्य भाजपा की पिछली सरकारों ने किया था उसे गत सरकार के समय हाशिए पर ला दिया गया, जिससे इस क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में हिमाचल प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है, लेकिन इसके प्रबंधन पर अब बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है, वहीं प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में क्लस्टर बनाकर तथा उनके साथ नगर पंचायतों व परिषदों को जोड़कर कूड़ा निष्पादन यूनिट लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नादौन के निकट ज्वालामुखी के लुथान क्षेत्र में गो अरण्य क्षेत्र का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जहां बड़ी संख्या में गोवंश संरक्षण हो सकेगा।

गांवों में लगाएंगे संयुक्त मेले, किसानों की आय बढ़ाएंगे

नादौन। ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, कृषि, पशु पालन और मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 72 प्रतिशत लोग कृषि से जुड़े हुए हैं और इनमें से अधिकांश छोटे किसान हैं। आय बढ़ाने के लिए इन्हें पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागबानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि से संबंधित अन्य गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त रूप से मेले आयोजित करेंगे, ताकि किसानों को घर-द्वार पर ही कृषि और इससे संबंधित अन्य गतिविधियों की तकनीकी जानकारी मिल सके तथा वे अपने आय बढ़ाने में सक्षम हो सकें।

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