देश की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी के जंगलों में पहली बार महिला वनरक्षकों की पैट्रोलिंग

स्टाफ रिपोर्टर — सोलन बाहरा यूनिवर्सिटी में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतरीन प्लेसमेंट विकल्प प्रदान करने के लिए सॉफ्ट स्किल पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। सॉफ्ट स्किल से न केवल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि प्लेसमेंट ड्राइव के दौरान होने वाले साक्षात्कार में भी उन्हें काफी सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को बेहतरीन प्लेसमेंट के लिए वचनबद्ध यूनिवर्सिटी प्रबंधकों ने सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग के साथ-साथ देश-विदेश की नामी कंपनियों से भी करार किया है। गौर रहे कि किसी भी यूनिवर्सिटी से बीटेक या बीएचएम जैसे कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के पास कोर्स पूरा होने पर केवल दो ही विकल्प होते हैं।

अपनी तकनीकी शिक्षा से लैस विद्यार्थी या तो अपना कारोबार स्थापित करें या फिर अपने कोर्स के दम पर नौकरी का विकल्प चुनें। देखने में आया है कि कोर्स में बढिय़ा से बढिय़ा अंक लेना विद्यार्थी भी नौकरी के लिए आयोजित साक्षात्कार में कंपनी अधिकारियों की नज़रों पर खरा नहीं उतर पाता है, जिससे उसे नौकरी नहीं मिल पाती है। विद्यार्थियों की इस कमी को दूर करने के लिए रयात बाहरा ग्रुप के चेयरमैन व बाहरा यूनिवर्सिटी के चांसलर गुरविंदर सिंह बाहरा ने बाहरा यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है। सॉफ्ट स्किल में विद्यार्थी के विश्वास स्तर को सुधारने, संचार महारतों को बढ़ावा देने, साक्षात्कार के समय व्यवहार को बढ़ाने व अन्य मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ट्रेनिंग के पश्चात् आत्मविश्वास से लबरेज़ विद्यार्थी बेहतरीन ढंग से इंटरव्यू दे सकेगा।

मददगार होगी ट्रेनिंग बाहरा यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की भलाई के लिए वचनबद्ध है। सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग उनके लिए मददगार साबित होगी विशेषकर प्लेसमेंट के दौरान। रयात बाहरा ग्रुप ने विद्यार्थियों की प्लेसमेंट के लिए कई नामी कंपनियों के साथ करार किया है।

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) जल्द ही कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) 2020 भर्ती के लिए टियर-1 परीक्षा की डेट्स जारी करने जा रहा है। ऑनलाइन टियर-1 परीक्षा पहले 29 मई से सात जून तक आयोजित की जानी थी, जिन्हें स्थगित कर दिया गया था। आयोग ने पिछले माह कोरोना के खतरे को देखते हुए परीक्षाएं अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दी थीं। आयोग ने जानकारी दी थी कि कोरोना की स्थिति नियंत्रण में आने के बाद भर्ती परीक्षा की डेट्स पर पुनर्विचार किया जाएगा।

अधिकांश राज्यों में शुरू हो चुकी अनलॉक की प्रक्रिया को देखते हुए यह संभव है कि स्स्ष्ट एक सप्ताह के भीतर नई डेट्स का ऐलान कर दे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा जुलाई में आयोजित की जा सकती हैं। आयोग की तरफ से किसी आधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है। बता दें कि आयोग ने बीते सप्ताह एसएससी सीजीएल 2018 और एसएससी सीएचएल-2018 भर्तियों के संबंध में नोटिफिकेशन जारी किए हैं। आयोग की तरफ से 2020 भर्ती परीक्षाओं की नई डेट्स अभी जारी नहीं की गई हैं। आयोग द्वारा एग्जाम डेट की घोषणा के बाद एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे, जिसे उम्मीदवार अपने रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से डाउनलोड कर सकेंगे। कोई भी अन्य जानकारी आधिकारिक वेबसाइट ह्यह्यष्.ठ्ठद्बष्.द्बठ्ठ पर जारी की जाएगी।

12500 फुट ऊंचाई पर बेटियों की गश्त

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — देहरादून 14500 फुट की ऊंचाई पर आप कोई भी जोखिम मोल नहीं ले सकते हैं। लिहाजा दुर्गा सती (32), रोशनी नेगी (25) और ममता कंवासी (33) कई महीने तक ट्रैकिंग का अभ्यास करती रहीं। पिछले हफ्ते वे ऐसी पहली महिला वनरक्षक बन गईं, जिन्हें देश की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी के खतरनाक जंगलों में तैनात किया गया है।

नंदा देवी की ऊंचाई 25 हजार फुट से ज्यादा है। वहीं, इस बारे में वनरक्षक ममता ने बताया कि हम दुर्लभ जंतुओं और वनस्पतियों को बचाने के लिए पहाड़ों पर पैट्रोलिंग कर रहे हैं। इतनी ज्यादा ऊंचाई पर भी हमेशा शिकारियों का खतरा रहता है। वह आगे कहती हैं कि हम पानी के स्रोतों की भी जांच करते हैं और यह भी देखते हैं कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई गड़बड़ी न हो। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा इलाका सुरक्षित है। नंदा देवी के जंगलों में इन महिला रक्षकों की तैनाती का संयोग अचानक बन गया। साथ ही इसके लिए उन सभी ने खुद भी पहल की।

अभी नहीं, तो कभी नहीं महिला फारेस्ट गॉर्ड आम तौर पर लाता तक पेट्रोल करती हैं, जो 11500 फुट की ऊंचाई पर है, लेकिन इसके ऊपर जाने के लिए इन्हें रोका जाता है। महिला फॉरेस्ट गार्ड रोशनी कहती हैं कि लेकिन हमने सोचा कि अगर अभी नहीं, तो कभी नहीं। हमने अपने देश और प्रकृति की सेवा के लिए यह सर्विस ज्वाइन की है। पहली जून को महिला वनरक्षकों की टीम ट्रैकिंग करते हुए 11800 फुट की ऊंचाई पर भेल्टा पहुंचीं। इसके बाद वे 12800 फुट ऊंचाई पर स्थित लता खार्क के लिए रवाना हुईं। यहां से महिला फॉरेस्ट गार्ड की टीम 13800 फुट पर झंडीधारा पहुंची। इसके बाद वे वापस लता खार्क आईं और यहां से तीनों महिला गाड्र्स अपनी मंजिल धारासी के लिए निकल पड़ीं, जो 14500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

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