Saturday, November 27, 2021 10:57 PM

लगातार बुखार, तो तुरंत करवाएं इलाज

नगर संवाददाता-ऊना बरसात के दिनों में स्क्रब टाइफस अकसर अपने पांव पसारता है। स्क्रब टाइफस एक जीवाणु जनित संक्रमण है, जो अनेक लोगों की मृत्यु का कारण बनता है और इसके लक्षण चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। यह जानकारी देते हुए सीएमओ रमण कुमार शर्मा ने बताया कि स्क्रब टायफस बीमारी की शुरुआत सिरदर्द और ठंड के साथ बुखार से हो सकती है। रोग बिगडऩे पर मरीज को बुखार तेज हो जाता है और असहनीय सिरदर्द भी होने लगता है। यह रोग हल्के-फुल्के लक्षणों से लेकर अंगों की विफलता तक का भी कारण बन सकता है। कुछ मरीजों में पेट से शुरू हुई खुजली या चकत्ता अन्य अंगों तक फैलने लगता है। इस बीमारी में शरीर में ऐंठन व अकडऩ जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

स्क्रब टायफस के लक्षणों की जांच करते समय मलेरिया, डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस आदि रोगों से भी तुलना की जाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर रमण कुमार शर्मा ने कहा कि इस बुखार को जोड़-तोड़ बुखार भी कहा जाता है। यह संक्रामक रोग नहीं है यानी एक आदमी से दूसरे को नहीं होता है और इसका इलाज भी बहुत आसान है। आजकल लगातार बुखार आने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और बुखार को हलके में न लें। बुखार चाहे कैसा भी हो नजदीक के स्वास्थ्य संस्थान में संपर्क करें। उन्होंने कहा कि इसका इलाज सभी सरकारी संस्थानों में नि:शुल्क उपलब्ध है। खेतों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा खतरा स्क्रब टायफस का बुखार खतरनाक जीवाणु जिसे रिकटेशिया (संक्रमित माइट, पिस्सू) के काटने से फैलता है। यह जीवाणु लंबी घास व झाडिय़ों में रहने वाले चूहों के शरीर पर रहने वाले पिस्सुओं में पनपता है और इन पिस्सुओं के काटने से यह बीमारी होती है। इस बीमारी के होने का खतरा उन लोगों को अधिक होता है, जो बरसात के दिनों में खेती-बाड़ी या कृषि संबंधी कार्य करने के लिए खेतों में जाते हैं। पूरी बाजू वाले कपड़े पहन करें खेतों में काम स्क्रब टायफस बीमारी से बचाव के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर खेतों में जाएं, क्योंकि स्क्रब टायफस फैलाने वाला पिस्सू शरीर के खुले भागों को ही काटता है। घरों के आस-पास खरपतवार इत्यादि न उगने दें व शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। खुली त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए माइट रिपेलेंट क्रीम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।