Tuesday, August 11, 2020 01:12 AM

प्राकृतिक खेती अपनाई…रासायनिक खाद दूर भगाई

बिलासपुर में 142 हेक्टेयर में शुरू की खेती; मई और जून महीने में विभाग ने 1687 किसानों को किया ट्रेंड

घुमारवीं-बिलासपुर के किसानों का रुझान अब प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने लगा है। किसान रासायनिक दवाई व खाद के स्थान पर  जड़ी बूटियों तथा गो मूत्र से तैयार होने वाली दवाइयों के प्रयोग को महत्व देने लगे हैं। किसान धीरे-धीरे रासायनिक दवाइयों व खाद के प्रयोग को बाय-बाय तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने लगे हैं। सुखद परिणाम के चलते इस वर्ष प्राकृतिक खेती के तहत किसानों की सं या डबल तथा एरिया को भी दोगुना किया जाएगा। जबकि लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। खास बात यह है कि इस साल कोरोना काल में विभाग ने बीते तीन महीनों में ट्रेनिंग करने वाले 1687 ट्रेंड किसानों को इससे जोड़ा है। बिलासपुर जिला में 142 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है। जबकि बीते मार्च माह तक 3017 किसान इससे जुड़े चुके हैं तथा अप्रैल, मई व जून माह में ही 1687 ट्रेंड किसानों ने विभाग के माध्यम से प्राकृतिक खेती को अपनाया है। आतमा परियोजना के अधिकारियों की मानें तो इस परियोजना में जुडे़ तीन हजार किसानों के संपर्क के माध्यम से ही दोगुने किसानों को जोड़ा जाएगा, ताकि एक किसान दूसरे किसान को प्राकृतिक खेती के तौर तरीकों को सीखा सके। और अपने अनुभव के लाभ दूसरों में भी बांट सकें। हालांकि इन किसानों को आतमा परियोजना के तहत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस खेती में फसल की पैदावार को बढ़ाने व कीटाणु से बचाने के लिए जड़ी बूटियों मु यत ः नीम, द्रेक, देसी गाय का गौमूत्र से तैयार दवाइयां का प्रयोग किया जाता है। इस बार इस योजना पर काम अप्रैल माह में शुरू होना था, लेकिन कोविड-19 के कारण इसकी र तार धीमी पड़ गई थी। परंतू, अब फिर से पटरी पर लौटने लगी है। बताते चलें कि बिलासपुर में पिछले दो-तीन वर्षाें से आत्मा परियोजना के माध्यम से अब जिले के चारों विकास खंडों में तीन हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ गए हैं। तथा अब प्राकृतिक तौर पर पैदा होने वाली जड़ी बूटियों नीम, द्रेक, देसी गाय का गौमूत्र सहित अन्य के प्रयोग ही सब्जियों तथा फसलों के लिए खाद तथा दवाइयों को तैयार कर प्रयोग कर रहे हैं।

इनमें कई किसान रासायनिक दवाइयों व खाद के स्थान पर प्राकृतिक जड़ी बूटियों का प्रयोग कर रहे हैं। जिसके बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इन किसानों ने धीरे धीरे रासायनिक दवाइयों व खाद के प्रयोग को बाए बाए करने लग पड़े हैं। वहीं, आतमा परियोजना निदेशक डा. रवि शर्मा एवं उप परियोजना निदेशक डा. देशराज शर्मा ने कहा कि बिलासपुर जिले में अब तक तीन हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े चुके हैं तथा इस वर्ष इन्हीं किसानों के संपर्क में आने वालों और किसानों को भी प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा सके। इस वर्ष किसानों की संख्या को दोगुना तथा इससे जुड़े क्षेत्र को डबल किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्हें इस संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। क्योंकि यहां पर अधिकतर किसानों ने प्राकृतिक खेती शुरू कर दी है।

142 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही प्राकृतिक खेती

बिलासपुर जिला में 142 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती हो रही। जबकि मार्च माह के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं, तो 3017 किसान  प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। जबकि पिछले तीन माह में ही 1687 ट्रेंड किसान भी प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।

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