Saturday, September 26, 2020 07:43 AM

प्रभु श्री राम ने जब मुझे अयोध्या बुलाया : डा. राजीव बिंदल, पूर्व अध्यक्ष, हि.प्र. भाजपा

डा. राजीव बिंदल

पूर्व अध्यक्ष, हि.प्र. भाजपा

यहां पहुंचकर मालूम पड़ा कि पिछले दिन एक लाख कार सेवकों ने श्री राम जन्म स्थल की ओर कूच किया था। हजारों कार सेवक नाके तोड़कर परिसर में दाखिल हो गए। चंद कार सेवक गुंबज पर चढ़ गए। देखते ही देखते पैरा मिलिट्री ने उन्हें ढेर कर दिया। राम भक्तों पर गोलियां बरसी, आंसू गैस, लाठियों का कोई अंत नहीं था। कितने बलिदान हुए, इसका हिसाब आज तक नहीं लगा। बाद में हम लोगों को जेल की बैरक में भेज दिया गया, कोई एफआईआर नहीं, कोई मुकदमा नहीं, बस मुलायम सिंह की तानाशाही थी…

जय श्री राम, जय श्री राम के नारों से पूरा देश गुंजायमान था। हर समय कानों में ध्वनि सुनाई देती थी-‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।’ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मार्गदर्शन और विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन चल रहा था। शिला पूजन, शिला यात्राओं के कार्यक्रम हो चुके थे और अब कार सेवकों के जाने का समय आ गया। देशभर से कार सेवकों के जत्थे निकलने लगे थे। मेरे बड़े भाई डा. राम कुमार बिंदल विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश पदाधिकारी एवं राम जन्म भूमि आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से थे। एक बहुत विशाल जत्था लेकर वह सोलन से पहले चरण मे निकल गए और उनके मार्गदर्शन में पीछे से और जत्थे निकलने लगे।

मैं हिमगिरि कल्याण आश्रम सोलन का सेवा कार्य देखता था। साथ ही अपना क्लीनिक भी चलाता था। श्री राम जी का आदेश हुआ, फिर क्या था, 32 राम भक्तों का जत्था बनाया, पिट्ठू पीठ पर लादकर बढ़ चले प्रभु श्री राम के चरणों में शीष नवाने। सोलन और राजगढ़ से अयोध्या जी जाने के लिए 32 लोग तैयार हुए, अलग-अलग साधनों एवं मार्गों से। शिमला-कालका राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर धर्मपुर के पास पुराने शिव मंदिर के पास सभी एकत्रित हुए, जहां पर पूरा प्रशिक्षण लिया गया। डा. राम कुमार बिंदल, जो यात्रा के लिए पहले ही निकल चुके थे, उनके द्वारा बहुत सी महत्त्वपूर्ण जानकारियां हमें भेजी गई थीं। तदानुसार 32 कार सेवकों का ग्रुप लीडर मुझे बनाया गया व चंद्र मोहन ठाकुर राजगढ़ वालों को सह-लीडर नियुक्त किया गया।

हमने 16-16 कार सेवकों की जिम्मेवारी ले ली व पुनः उन्हें 4-4 के 8 गु्रपों में विभाजित कर दिया। यह संकल्प लिया कि अयोध्या जी पहुंचना है, यदि पुलिस किसी को पकडे़ तो चार का ग्रुप एक साथ जाएगा, शेष अपने को बचा कर रखेंगे। हम 30 लोग प्रभु श्री राम की कृपा से ट्रेनें बदलते हुए लखनऊ तक निर्बाध पहुंच गए। हम स्टेशन पर उतरें तो उतरें कैसे, चप्पे-चप्पे पर पुलिस थी। सब ओर कर्फ्यू लगा हुआ था। हम हिमाचल के लोग पिट्ठू और थैलों के साथ अलग ही पहचाने जा रहे थे। पूरी योजना से चार-चार का ग्रुप पुलिस की निगाहों से बचते-बचते स्टेशन के बाहर निकला क्योंकि लखनऊ से अयोध्या की ओर जाने वाली सभी टे्रनें बंद कर दी गई थीं। बाहर निकलते ही एहसास हुआ कि कोई बस-गाड़ी नहीं है, कर्फ्यू है। छोटा सा जय श्री राम का उद्घोष किया। इसके बाद हम एक राम भक्त के सहयोग से एक मंदिर में पहुंचे। मंदिर में 500 से अधिक कार सेवक ठहरे थे। यहां पता लगा कि मुलायम सिंह ने पूरी व्यवस्था की है कि परिंदा भी पर न मार सके। लाखों कार सेवकों को सरयू नदी के उस पार रोके रखा गया था।  एक संत ने बताया कि यहां से पैदल 200 किलोमीटर से ज्यादा चलना होगा, तभी पहुंच पाएंगे। फिर क्या था, जय श्री राम का उद्घोष हुआ।

पुनः 4-4 के ग्रुप बनाए व 16-16 के 5 ग्रुप बनाए गए और उस संत के पीछे पैदल चल पडे़। 7-8 घंटा निरंतर चलने के बाद कुछ कार सेवकों की हिम्मत जैसे टूटने लगी थी। पैरों में छाले पड़ने लगे, परंतु श्री राम के नाम की महिमा अपरम्पार थी। तभी एक ट्रेन की आवाज आई, यह माल गाड़ी थी। हम ड्राइवर की मर्जी के खिलाफ  डिब्बों पर चढ़ गए। किंतु ट्रेन ने हमें आगे जंगल में किसी अनजान जगह पर उतार दिया। इसके बाद अनेक दुश्वारियों का सामना करते हुए हम अयोध्या पहुंच पाए थे। यहां पहुंचकर मालूम पड़ा कि पिछले दिन एक लाख कार सेवकों ने श्री राम जन्म स्थल की ओर कूच किया था। हजारों कार सेवक नाके तोड़कर परिसर में दाखिल हो गए। चंद कार सेवक गुंबज पर चढ़ गए। देखते ही देखते पैरा मिलिट्री ने उन्हें ढेर कर दिया। राम भक्तों पर गोलियां बरसी, आंसू गैस, लाठियों का कोई अंत नहीं था। कितने बलिदान हुए, इसका हिसाब आज तक नहीं लगा। बाद में हम लोगों को जेल की बैरक में भेज दिया गया, कोई एफआईआर नहीं, कोई मुकदमा नहीं, बस मुलायम सिंह की तानाशाही थी। राम जन्म भूमि का आंदोलन शांत हो चला। लाखों लोग जो पूरे उत्तर प्रदेश की जेलों में थे, उन्हें छोड़ दिया गया।

हम भी इंतजार करने लगे कि हमें कब छोड़ा जाएगा। सोलन के हमारे साथी कार सेवक सोलन पहुंच गए। एक माह बीत गया, फैजाबाद जेल में अब तो दाढ़ी-मूंछ व सिर के बाल सब बेतरतीब हो चले थे। इसी बीच हमें जेल से रिहा कर दिया गया। घर पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं था, कोई धन नहीं था। हमारी बाजू पर एक स्टैम्प लगा दी गई और कहा गया कि जिस टे्रन में आप जाएंगे, मात्र स्टैम्प दिखाने से आपको जाने दिया जाएगा। उस स्टैम्प को दिखाते हुए मैं अंबाला रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। बाद में सोलन पहुंच कर महीनों तक अयोध्या का वह भयावह दृश्य, कार सेवकों के शव, घायल राम भक्त आंखों के आगे घूमते रहे। आज भी सारा दृश्य आंखों के सामने आते ही आत्मा सिहर उठती है। पांच अगस्त का दिन मन को सुकून देगा, लाखों कार सेवकों का बलिदान यथार्थ होगा।

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