प्रदेश में पुष्पा के बाद अगला स्प्रिंटर कौन: भूपिंद्र सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

धर्मशाला साई खेल छात्रावास की धाविका रिचा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला खेलों की 200 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता है तथा हमीरपुर की रिशु ठाकुर ने 100 मीटर की दौड़ में चौथा स्थान प्राप्त किया था। हमीरपुर के विजय कुमार शर्मा ने पहली बार 1981 में कनिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश के लिए कांस्य पदक 400 मीटर में जीता था। 1985 सोलन महाविद्यालय के अमरीश जौली  400 मीटर व 2005 में हमीरपुर के अनिल शर्मा  200 मीटर में अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे थे। राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स में जोगिंद्रनगर के रोहित ने 400 मीटर के फाइनल में जगह बनाई है। गिनती के हिमाचली हैं जो स्प्रिंट में हिमाचल प्रदेश को थोड़ी-बहुत पहचान दिला पाए हैं…

हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है। यह बात अलग है कि पंजाब से अलग होकर मिले कुछ सीमावर्ती हिस्से जरूर समतल हैं, मगर वह बहुत थोड़ा हिस्सा है। स्पीड को विकसित करने के लिए किशोरावस्था तक समतल जगह चाहिए होती है। हिमाचल प्रदेश के खाने में प्रोटीन की कमी आम बात है। जब से पशुपालन व खेती कम हुई है, खाने की थाली से प्रोटीनयुक्त आहार ही गायब है। समतल जगह व प्रोटीनयुक्त आहार के बिना स्पीड वाले धावक मिलना व तैयार करना दोनों ही बहुत कठिन है। स्पीड को बहुत छोटी उम्र से ही विकसित करना पड़ता है। इसलिए स्पीड पर प्रशिक्षण दस वर्ष से भी कम आयु में शुरू करना पड़ता है। अगले पांच सालों तक स्पीड अपने उच्च स्तर तक विकसित हो जाती है। यह भी कहा जाता है कि स्प्रिंटर पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते। प्रदेश से वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुष्पा ठाकुर ही एकमात्र धाविका है जो हिमाचल प्रदेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 400 मीटर में पदक विजेता है। एशिया व ओलंपिक खेलों के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों तक पहुंचने वाली इस धाविका के बाद अभी तक कोई भी पुरुष या महिला  हिमाचल प्रदेश के लिए वरिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत नहीं पाया है। समय-समय पर राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर कुछ धाविकाओं व धावकों ने आशा जगाई है। हिमाचल प्रदेश में पहली बार राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के धावक अशोक ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश  विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता 1994 सुंदरनगर में पहली बार हिमाचल प्रदेश की धरती पर सौ मीटर की दौड़ को 11 सेकंड से नीचे 10.9 सेकंड में दौड़ कर तीव्रतम धावक बना था।

उसके साथ हमीरपुर के राजेश ठाकुर ने भी 11 सेकंड से नीचे दौड़ कर रजत पदक जीता था। 2012-13 में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के विद्यार्थी धावक रोहित चौहान ने पिछले रिकॉर्ड को तोड़कर 10.83 सेकंड का नया कीर्तिमान बनाया था। वर्ष 2019 में राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के धावक  पारस ने रोहित चौहान के कीर्तिमान को तोड़कर 10.70 सेकंड में दौड़ कर तीव्रतम धावक बना है। इस धावक ने 200 मीटर की दौड़ को 22 सेकंड से नीचे 21.90 सेकंड में पहली बार दौड़ कर नया कीर्तिमान बनाया है। हिमाचल प्रदेश राज्य ओलंपिक खेल 2004 में हमीरपुर के अनूप राणा ने भारी वर्षा के बाद पानी व कीचड़ के मैदान में ही 100 मीटर को 10.9 व 200 मीटर को 22.1 सेकंड में दौड़ कर स्वर्ण पदक जीते थे। हिमाचल प्रदेश पुरुष वर्ग का रिकॉर्ड 10.40 सेकंड में हमीरपुर के धावक संदीप ने हिमाचल प्रदेश मिनी ओलंपिक 2017 में बनाया है। जब हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक ट्रैक नहीं थे, उस समय सोलन के अमरीश जौली, हमीरपुर के पवन वर्मा, अनिल शर्मा, राजन ठाकुर, अंकुर शर्मा व पंकज ढडवाल ने सौ मीटर की दौड़ को 11 सेकंड से नीचे दौड़ा है।

हिमाचल प्रदेश महिला वर्ग में हमीरपुर की पुष्पा ठाकुर ने पहली बार सौ मीटर दौड़ को 12 सेकंड से नीचे हिमाचल प्रदेश मिनी ओलंपिक 2004 मंडी में 11.96 सेकंड में दौड़ कर नया राज्य रिकॉर्ड बनाया था। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का रिकॉर्ड हमीरपुर की सोनिका शर्मा के नाम 12.23 सेकंड में अंकित है।  राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर की धाविका प्रोमिला ने अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स बंगलूरु 2006 में 100 मीटर में चौथा तथा 200 मीटर की दौड़ को 24.93 सेकंड में दौड़ कर रजत पदक जीता था। प्रोमिला 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए लगे प्रशिक्षण शिविर में भी रही है। हमीरपुर की ज्योति ने अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता 2013 पटियाला में 400 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक जीता था। ज्योति से हिमाचल को बहुत आशा जागी थी, मगर क्या अभी हिमाचल एथलेटिक्स को और इंतजार करना होगा।

धर्मशाला साई खेल छात्रावास की धाविका रिचा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला खेलों की 200 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता है तथा हमीरपुर की रिशु ठाकुर ने 100 मीटर की दौड़ में चौथा स्थान प्राप्त किया था। हमीरपुर के विजय कुमार शर्मा ने पहली बार 1981 में कनिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश के लिए कांस्य पदक 400 मीटर में जीता था। 1985 सोलन महाविद्यालय के अमरीश जौली  400 मीटर व 2005 में हमीरपुर के अनिल शर्मा  200 मीटर में अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे थे। राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स में जोगिंद्रनगर के रोहित ने 400 मीटर के फाइनल में जगह बनाई है। गिनती के हिमाचली हैं जो स्प्रिंट में हिमाचल प्रदेश को थोड़ी-बहुत पहचान दिला पाए हैं। प्रशिक्षकों  से अपेक्षा रहेगी कि वे अपने-अपने ट्रेनी को अच्छा प्रशिक्षित करने के लिए अपने जुनून को बनाए रखें ताकि हिमाचल प्रदेश के धावक व धाविकाएं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव दिला सकें। इसके अलावा सरकार से अपेक्षा यह है कि वह किसी भी स्तर पर जीतने वाले धावक और धाविकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर इनामों की घोषणा करती रहे। हिमाचल की तुलना में दूसरे राज्यों में धावक और धाविकाओं को आर्थिक संरक्षण सरकार की ओर से दिया गया है। इस क्षेत्र की ओर प्रतिभाएं आकर्षित हों, इसके लिए ऐसा करना बहुत जरूरी है।

ईमेलः bhupindersinghhmr@gmail.com

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