हिमाचल में टूरिज्म को निखारने की खातिर नया पाठ्यक्रम चलाने की तैयारी, यूं बदल जाएगी तस्वीर

देश में कोविड-19 के चलते पर्यटन कारोबार में आए नुकसान से उभरने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अखिल भारतीय पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन बोर्ड ने कवायद शुरू कर दी है। बोर्ड की ई-बैठक पाठ्यक्रम में संशोधन को लेकर भी अहम फैसले हुए।

ई-बैठक की अध्यक्षता बोर्ड की अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने की, जबकि एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे भी बैठक में विशेश रूप से उपस्थित रहे। प्रो. सहस्रबुद्धे ने बोर्ड की प्रयासों की सराहना की और आवश्यकता आधारित पाठ्यक्रमों को शामिल करने व नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार पाठ्यक्रम को संशोधित करने के लिए समय पर पहल करने के निर्देश दिए। वहीं, बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. बंसल ने आश्वासन दिया कि बोर्ड की सिफारिशों को पूरे देश में लागू करने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की बैठक में लिया जाएगा।

उन्होंने ने कहा कि ऑल इंडिया बोर्ड ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट ने इस बात पर जोर दिया है कि कोविड-19 महामारी के कारण पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है। इसलिए, इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से व्यापक शोध के माध्यम से फिर से सुधार करने पर काम किया जाएगा। इसके लिए बोर्ड ने यह भी योजना बनाई है कि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के स्नातक और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्त्रम को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार जल्द ही संशोधित किया जाएगा। पाठ्यक्रम में संशोधित करते समय कई एक्जिट ऑप्शन, लचीलापन, बहु-विषयक और अन्य मापदंडों पर ध्यान दिया जाएगा। बैठक में एआईसीटीई के सलाहकार प्रो दिलीप एन मालखेड़े, ज मू विवि के प्रो डीआर गुप्ता, पंजाब विवि चंडीगढ़ के प्रो प्रशांत गौतम, पांडिचेरी विवि के प्रो संपत कुमार स्वैन, महाराष्ट्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की केके भट्ट, केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय के उपमहाप्रबंधक अरूण श्रीवास्तव, एयर इंडिया के उपमहाप्रबंधक राजेंद्र नाथ, एनसीएचटीटी के निदेशक सतवीर सिंह सहित केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रो. एसपी बंसल की अध्यक्षता में समिति गठित

बोर्ड ने पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए हिमाचल प्रदेश तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. एसपी बंसल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। समिति जल्द ही रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि पूरे देश में शैक्षणिक सत्र 2021-2022 से इसे लागू किया जा सके। बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर, सामान्य जीवन शैली में समुद्र-परिवर्तन देखा जा रहा है और जैसे कि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र की शिक्षा को ‘नए सामान्य’ और नए के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार नए मापदंड और सुरक्षा मानकों को अपनाने की आवश्यकता है।

महामारी के लिए सामान्य और प्रोटोकॉल तैयार करने की आवश्यकता है। इसके स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट महाराष्ट्र की प्रिंसिपल केके भट्ट की देखरेख में समिति गठित की गई, जो अगले 15 दिन में बोर्ड को रिपोर्ट सौंपेगी। साथ में यह भी निर्णय लिया है कि बीएचएमसीटी और एमएचएमसीटी कार्यक्त्रम बदले में पांच वर्ष की होगी। यह भी निर्णय लिया गया कि होटल प्रबंधन के अवलंबी छात्रों को प्रतिष्ठित होटल, रेस्तरां और रिसॉर्ट के साथ कई स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्त्रमों से गुजरना पड़ता है। इसलिए, एआईसीटीई और ट्रेड निकायों जैसे एफएचआरएआई, एचएआई, आरएचए आदि के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में होगा पाठ्यक्रम

बोर्ड की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के साथ शुरू करने के लिए पाठ्यक्रम को द्विभाषी अर्थात अंग्रेजी और हिंदी में और बाद में परिवर्तित किया जाएगा। पाठ्यक्रम को आठ क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवादित किया जाएगा। संस्थानों की मंजूरी के लिए मापदंडों को चरणबद्ध तरीके से संशोधित किया जाएगा। इसके लिए भुवनेश्वर के श्रीकांता मिश्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्य समिति का गठन किया गया है। प्रत्येक सदस्य ने सुझाव दिए हैं और आश्वासन दिया है कि वे शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों को हल करने में मदद करेंगे।

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