Friday, September 24, 2021 06:02 AM

मानसून में फंगल इन्फेक्शन से बचाव

मानसून का मौसम शुरू हो गया है। मानसून में कई लोगों को खुजली, मुंहासे या फिर त्वचा के अधिक तैलीय होने की समस्या होती है, लेकिन बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण अधिक पेरशानी का सबब बनते हैं। मानसून में आम फंगल इन्फेक्शन का खतरा तो रहता ही है, लेकिन इस बार महामारी के दौर में यह खतरा और बढ़ गया है। कोरोना के साथ-साथ लोग फंगल इन्फेक्शन से भी डरे हुए हैं। जाने कितने ही लोग इस फंगल संक्रमण का सामना कर रहे हैं। कोरोना के इस दौर में फंगल इन्फेक्शन यानी ब्लैक फंगस या म्यूकोरमायकोसिस से बचाव की ज्यादा जरूरत है। फंगल इन्फेक्शन के बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। ताकि समय रहते सही इलाज हो सके।

फंगल इन्फेक्शन के कारण

फंगल इन्फेक्शन क्यों हो रहा है इसका सटीक कारण तो पता नहीं चल पाया है। इसके कई कारण हैं जैसे इसमें अनियंत्रित डायबिटीज, इलाज के दौरान टोसीलिजुमैब के साथ स्टेरॉयड का ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं होना, वेंटीलेशन और सप्लीमेंट आक्सीजन लेना शामिल है। कोरोना इलाज के छह हफ्तों के भीतर यदि इनमें से कोई फेक्टर है, तो मरीज में ब्लैक फंगस होने का सबसे ज्यादा रिस्क है। यह बीमारी अधिकतर मधुमेह, कैंसर, जले हुए मरीज और आकस्मिक मरीजों में आम है। इसलिए समय रहते सतर्क रहें और डाक्टर से परामर्श अवश्य लें।

बीमारी बढ़ने के कारण

कोरोना मरीजों के अब एक हजार लोगों में से एक में म्युकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस से संक्रमित होने की आशंका अधिक है। कोरोना के इलाज में मरीज को जरूरत न होते हुए स्टेरॉयड दवा का इस्तेमाल, न्यूट्रोफिल कम होने, आक्सीजन सिलेंडर और शारीरिक स्वच्छता न रखना, इस वजह से म्युकोरमायकोसिस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। नाक में दर्द, खून बहना और नाक बहना, गंध की कमी यानी गंध महसूस न होना, बुखार, खांसी, थूकने पर खून निकलना, आंखों और चेहरे पर सूजन आना, आंखों में फंगस, आंखों का लाल होना और दृष्टि की हानि यह म्युकोरमायकोसिस के लक्षण हैं। यदि काला फंगस समय पर निदान और उपचार के बिना मस्तिष्क में पहुंच जाता है, तो व्यक्ति स्थायी रूप से अंधा हो सकता है।

क्या ध्यान रखना चाहिए

सिर्फ गंभीर कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा बिना डाक्टर की सलाह के स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मधुमेह मरीज का रक्त शर्करा स्तर नियंत्रण में है या नहीं यह जांचना चाहिए। अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें। अगर नाक से खून बह रहा है, तो डाक्टर से परामर्श करें और जल्दी से एंटीफंगल उपचार शुरु करें। इसके साथ ही अपने खान-पान पर भी ध्यान दें। संतुलित आहार का सेवन करें।

फंगल इन्फेक्शन से खुद का बचाव कैसे करें

मधुमेह को नियंत्रण में रखें। स्टेरॉयड का अतिरिक्त सेवन न करें। आक्सीजन मास्क को स्वच्छ रखें और डाक्टर की सलाह से ही स्टेरॉयड लें। म्युकोरमायकोसिस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति के संपर्क में न आएं। संक्रमण को रोकने के लिए शरीर स्वच्छ व स्वस्थ रखना चाहिए। कैंसर और ऐसे मरीज जिनके किसी भी अंग प्रत्यारोपित किया गया है। स्टेम सैल ट्रांसप्लांट हुआ है, तो फंगल इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। समय रखते निदान और इलाज हो, तो मरीज ठीक हो सकता है।