Monday, October 18, 2021 04:54 PM

प्रीतम चौहान भारतीय वॉलीबाल के मुख्य प्रशिक्षक

हिमाचल प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर वॉलीबाल के लिए इंडोर स्टेडियम हैं। वैसे भी वॉलीबाल हिमाचल प्रदेश के गांव-गांव में खेला जाता है। हमीरपुर, ऊना, मंडी व ऊपरी हिमाचल प्रदेश से वॉलीबाल के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। प्रीतम चौहान जैसे अनुभवी व प्रतिभाशाली प्रशिक्षक से हिमाचल प्रदेश को अपेक्षा रहेगी कि वह हिमाचल प्रदेश वॉलीबाल के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में मार्गदर्शन करें तथा हिमाचल प्रदेश वॉलीबाल संघ के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश स्कूली क्रीड़ा संगठन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग तथा अन्य संस्थाएं, जो राज्य में वॉलीबाल उत्थान से जुड़ी हैं, उन्हें भी चाहिए कि वे निःसंकोच इस सफल प्रशिक्षक की सेवाएं लें ताकि हिमाचल में वॉलीबाल खेल को सही दिशा में गति मिल सके। खेलों में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रशिक्षक कितना कुशल है। इस तथ्य को भुलाना नहीं चाहिए...

भारत में गुरु-शिष्य परंपरा का बहुत पुराना इतिहास रहा है। आज चिकित्सा शास्त्र व खेल प्रशिक्षण के सिवा और कहीं भी गुरु-शिष्य परंपरा बहुत कम दिखाई देती है। वैसे भी तो कहते हैं गुरु बिना गति नहीं। विश्व की किसी भी सभ्यता के उत्थान में वहां की शिक्षा पद्धति की छाप साफ देखी जा सकती है। शिक्षा के स्तर को उठाने में गुरुजनों की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण होती है। खेलों की दुनिया में तो ज्ञानवान प्रशिक्षक के बिना आज के वैज्ञानिक युग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना नामुमकिन है। हिमाचल प्रदेश  में भी कुछ गिने-चुने प्रशिक्षक हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना एक अलग रुतबा रखते हैं। इनमें से एक हैं भारतीय वॉलीबाल महासंघ के मुख्य प्रशिक्षक प्रीतम चौहान। इनका जन्म तेरह जनवरी उन्नीस सौ इकसठ को जिला शिमला की उप तहसील कोटगढ़ के कोटीधार गांव में श्री केआर चौहान के घर हुआ।

स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश में पूरी करने के बाद प्रीतम चौहान ने पंजाब विश्वविद्यालय का रुख किया।  प्रदेश में खेल सुविधाओं के अभाव में हिमाचल प्रदेश के अधिकतर खिलाड़ी पड़ोसी राज्य पंजाब को पलायन करते रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय से कला स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। उसके बाद राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से वॉलीबाल में प्रशिक्षक का रेगुलर कोर्स पास करने के बाद भारतीय खेल प्राधिकरण में वॉलीबाल प्रशिक्षक की नौकरी शुरू की। नौकरी के समय ही इन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से समाज शास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की। खेल प्रशिक्षण को और धार देने के लिए   अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल महासंघ द्वारा आयोजित लैवल दो प्रशिक्षण कोर्स भी पास किया है। वॉलीबाल की बारीकियों को गहराई तक समझने के लिए जापान से एडवांस कोर्स किया तथा हंगरी से खेल विज्ञान में सर्टिफिकेट कोर्स पास किया।

देश के अधिक पढ़े-लिखे प्रशिक्षकों में से एक प्रीतम चौहान का कोचिंग कैरियर भी काफी चमकदार रहा है। तीन विश्व वॉलीबाल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीन विभिन्न वर्गों की एशियाई वॉलीबाल प्रतियोगिताओं में देश को पदक दिलाए हैं। पहली बार मई सन् दो हजार में भारतीय जूनियर टीम का प्रशिक्षक नियुक्त हो कर सन् दो हजार तीन तक दायित्व निर्वाह किया। दो हजार चार में यूथ टीम को प्रशिक्षण देकर उन्हें एशिया का कांस्य पदक विजेता बनाया। इसी साल देश की सीनियर टीम के साथ प्रशिक्षक के रूप में कार्य शुरू किया। सन् दो हजार उन्नीस में भारत की अंडर तेईस वर्ष आयु वर्ग की टीम को प्रशिक्षण देकर एशिया चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय खेल प्राधिकरण धर्मशाला में अपनी नियुक्ति के समय  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की टीम को प्रशिक्षण देकर उन्हें अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय वॉलीबाल प्रतियोगिता का पहली बार विजेता बनाया।

इस टीम में बारह में से दस खिलाड़ी लड़कियां धर्मशाला खेल छात्रावास की थीं। इसी सत्र में आयोजित हुई खेलो इंडिया प्रतियोगिता जो विश्वविद्यालय के लिए थी, उसमें हिमाचल की टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारतीय खेल प्राधिकरण से इस साल मई में सेवानिवृत्त होने के बाद प्रीतम चौहान भारतीय वॉलीबाल महासंघ के मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक संरचना को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में लंबे-चौड़े मैदानों का मिलना बहुत कठिन है। इसलिए हिमाचल प्रदेश में एथलेटिक्स, हाकी, फुटबॉल व क्रिकेट जैसे बड़े मैदानों वाली खेलों के लिए जिला या उपमंडल स्तर पर ही थोड़ी बहुत सुविधा है, मगर कब्बडी व वॉलीबाल जैसी खेलें जो छोटे मैदान में किसी भी जगह नैट लगाकर शुरू की जा सकती हैं, इन खेलों का भविष्य हिमाचल प्रदेश में उज्ज्वल है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबाल इंडोर में खेला जाता है। हिमाचल प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर वॉलीबाल के लिए इंडोर स्टेडियम हैं। वैसे भी वॉलीबाल हिमाचल प्रदेश के गांव-गांव में खेला जाता है। हमीरपुर, ऊना, मंडी व ऊपरी हिमाचल प्रदेश से वॉलीबाल के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं।

 प्रीतम चौहान जैसे अनुभवी व प्रतिभाशाली प्रशिक्षक से हिमाचल प्रदेश को अपेक्षा रहेगी कि वह हिमाचल प्रदेश वॉलीबाल के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में मार्गदर्शन करें तथा हिमाचल प्रदेश वॉलीबाल संघ के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश स्कूली क्रीड़ा संगठन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग तथा अन्य संस्थाएं, जो राज्य में वॉलीबाल उत्थान से जुड़ी हैं, उन्हें भी चाहिए कि वे निःसंकोच इस सफल प्रशिक्षक की सेवाएं लें ताकि हिमाचल में वॉलीबाल खेल को सही दिशा में गति मिल सके। खेलों में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रशिक्षक कितना कुशल है। इस तथ्य को भुलाया नहीं जाना चाहिए।

भूपिंद्र सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

ईमेलः [email protected]