Saturday, September 26, 2020 07:16 AM

Raksha Bandhan 2020 : आज सुबह 9:29 से शाम नौ बजे तक बांधें रक्षा के सूत्र का धागा

शिमला   – हिमाचल प्रदेश में कोविड के इस काल में रक्षा बंधन का त्योहार बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस बार सुबह 9ः29 के बाद शाम नौ बजे तक बहने अपने भाई को रक्षा के सूत्र का धागा बांध सकती हैं। हालांकि इस बार रक्षाबंधन पर कई तरह की एहतियात बरती जाएंगी। कई बहनें दूसरे राज्यों से आई रंग-बिरंगी राखियां न बांधकर, बल्कि मोली का ही ज्यादा प्रयोग करेंगी। शिमला के आचार्य मस्तराम शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन राखी का त्योहार पूरे भारतवर्ष में तीन अगस्त को मनाया जाएगा।

प्रातः काल इस दिन 9ः29 बजे तक भद्रा होने के बाद कन्या लग्न में राखी बांधना शुभ कार्य माना जाएगा, फिर लगन वृश्चिक राशि 1ः45 से  4ः16 बजे तक रहेगी, उसमें भी यदि बहनें अपने भाई के हाथ में कंगन बांधती हैं, तो शुभ कार्य माना जाएगा। आचार्य का कहना है कि रक्षा सूत्र देव ब्राह्मण द्वारा शास्त्रीय विधान के साथ बंधवाना चाहिए। पहले विधि विधान से पंचोपचार व षोडशोपचार करके इस रक्षा सूत्र को हाथ में बांधने से साल भर मानव जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा मनुष्य के लिए नहीं आती। शास्त्रीय विधान देव ब्राह्मणों द्वारा बांधा गया रक्षा सूत्र सदैव सुख कारक माना जाता है।

आचार्य ने बताया कि जहां बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है, वहां उपहार स्वरूप भाई भी अपनी बहन के लिए कुछ धनराशि प्रदान करता है और एक वर्ष भर के लिए बहन से अपने सुख और समृद्धि इस कंकण द्वारा चाहता है।

दूर होती हैं बीमारियां

आचार्य ने कहा कि वैसे वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर सूर्य की किरणें श्रावण मास में पृथ्वी पर बहुत कम पड़ती हैं और भूमंडल में अनेक प्रकार के जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं।

इसके कारण मानव जीवन में अनेक प्रकार की बीमारियों का आना के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं, इसलिए इस वैज्ञानिक पद्धति के धागे को बहन या देवज्ञ पुरोहित द्वारा हाथ में रक्षा सूत्र बांधा जाता है, तो उस यजमान के लिए भय मुक्त कर दिया जाता है। रक्षा सूत्र से स्वयं, जिसके हाथों में बाधा गया है, वह भी अपने भयमुक्त समझता है ।

रक्षाबंधन का महत्त्व

आचार्य मस्त राम का कहना है कि प्राचीन काल में भी इंद्र पत्नी महारानी शची ने वैदिक मंत्रों से रक्षा सूत्र को अभिमंत्रित कर अपने पति इंद्र के हाथों में बांधकर उसे शत्रुओं से भय मुक्त बना विजय प्राप्त की थी। जहां पूरे भारतवर्ष में इस त्योहार को भाई और बहनों के रूप में, रक्षाबंधन के रूप में, राखी के रूप में मनाया जाता है। इस राखी को भाई की कलाई में बांधती हैं।

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