Saturday, September 26, 2020 07:03 AM

राम मंदिर का दिन

5 अगस्त, 2020…इतिहास में दर्ज होती एक तारीख…! अयोध्या और प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर की निर्णायक तारीख…! आज सिर्फ  यही उद्घोष करो-जय श्रीराम! जय सियाराम!! अयोध्या हमेशा से ही वहीं थी, जहां आज है। श्रीराम उसके कण-कण में बसे रहे हैं, क्योंकि अयोध्या प्रभु की जन्मस्थली है। आज श्रीराम के अद्वितीय, अतुलनीय, अभूतपूर्व मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है। इंद्रलोक और आसमां से परे की दुनिया से देवगण और त्रि-भगवान हर्षित हैं, पुष्पवर्षा कर रहे हैं, अयोध्या पर पावन आशीर्वादों की बरसात कर रहे हैं। यकीनन यह सब कुछ अदृश्य है, क्योंकि दैवीय और अलौकिक है। मनुष्य की अपनी सीमाएं हैं। श्रीराम मनुष्य के रूप में अवतार थे, क्योंकि उन्हें अधर्म, राक्षसी प्रवृत्तियों और शक्तियों का विनाश कर धर्म और मानवता को स्थापित करना था, लिहाजा अयोध्या धर्म-नगरी भी कहलाती है।

अयोध्या में सूर्य-पुत्र वैवस्वत मनु से लेकर इक्ष्वाकु वंश तक के सम्राटों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिन्होंने अयोध्या को मानस रूप में निखारा, निर्मित और सम्पन्न किया तथा  परम आदरणीय बनाया। श्रीराम ने इक्ष्वाकु वंश में महाराजा दशरथ के परिवार में जन्म लिया। स्कंदगुप्त के अनुसार, अयोध्या भगवान विष्णु के चक्र पर विराजी है। भगवान विष्णु के ही अवतार श्रीराम थे। अथर्ववेद में अयोध्या को ‘ईश्वर का नगर’ कहा गया है और इसकी तुलना स्वर्ग की संपन्नता से की गई है। आज संपूर्ण ब्रह्मांड में श्रीराम का दिन है। वह ब्रह्मांड के महानायक थे। राम मर्यादाओं, संयम, वर्गहीनता के साथ पुरुषोत्तम भी थे। आज कण-कण में बसी दैवीय सत्ता का दिन भी है। चारों ओर उमंग, उल्लास, उत्साह और भजन-कीर्तन ही दिखाई-सुनाई देता है। अयोध्या दीपोत्सव मना रही है, पूरी तरह रोशनी में नहाई है। दीवारों पर श्रीराम के विभिन्न जीवन-प्रसंगों को, चित्रों के जरिए, उकेरा गया है। वे ‘संपूर्ण रामायण’ के मूर्त्त रूप हैं। सरयू नदी भी आज इठला रही है और रात्रि में रोशनी के बीच इंद्रधनुष की तरह दीप्तिमान लग रही है।

आज दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का आधार-दिवस है। अमरीका, ऑस्टे्रलिया और जर्मनी से भक्तों ने चांदी की ईंटें भेजी हैं। उन्हें भी राम मंदिर की आधारशिला में जोड़ा जाएगा। करीब 1500 पवित्र स्थलों की मिट्टी, 100 नदियों का जल इस अलौकिक मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त किया जाएगा। मां वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर, हल्दी घाटी के मैदान समेत सभी ज्योतिर्लिंगों से मिट्टी का बंदोबस्त किया गया है। आधारशिला में सोने के शेष नाग और कच्छप तथा चांदी की शिलाएं मौजूद होंगी। इस अवसर पर 1.5 लाख दीये प्रज्वलित किए जाएंगे और 1.11 लाख लड्डुओं का प्रसाद बनाया गया है, जो अंततः भक्तों में बांटा जाएगा। भगवान राम के ‘विष्णु रूप’ को विस्मृत कैसे किया जा सकता है। पाताल राजा को भी प्रसन्न रखने की प्रतीकात्मक कोशिश की गई है। अयोध्या में शंख बज रहे हैं, मठों-मंदिरों में पूजा-पाठ शुरू हो चुके हैं। श्रीराम की कुलदेवी देवकाली का पूजन किया जा चुका है। हनुमानगढ़ी मंदिर में बजरंगबली की पूजा-अर्चना की जा रही है।

श्रीराम के दर्शन का रास्ता हनुमान जी से होकर ही गुजरता है। बहरहाल अयोध्या में यह मंगल-बेला 500 लंबे सालों के संघर्ष, बलिदान और संकल्प के बाद आई है। आज का दिन एक महान अध्याय का उपसंहार है। इसका श्रेय किसी भी संगठन, संस्थान, विभूति या राजनीतिक दल को नहीं दिया जा सकता। बेशक संघ परिवार और भाजपा ने अपनी सियासत के लिए राम मंदिर के मुद्दे को जिंदा रखा, लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था को भी नजरअंदाज नहीं किया। संघ और भाजपा हिंदुओं के नियामक और नियंत्रक नहीं माने जा सकते। अलबत्ता मौजूदा कालखंड में राम मंदिर निर्माण के अभियान का एक सार्थक नेतृत्व उन्होंने जरूर किया है। इतना व्यापक समारोह और अनुष्ठानों के आयोजन में भी उनका योगदान अप्रतिम है, लेकिन ऐसे अनुष्ठान में हिंदुओं के एक भी जगद्गुरू शंकराचार्य को आमंत्रित नहीं किया गया, यह एक अधर्मी, अशुभ नीयत लगती है।

शूल-सा चुभता है इस व्यवहार से। बहरहाल देश के प्रधानमंत्री मोदी श्रीराम मंदिर के लिए भूमि-पूजन करेंगे और बुनियाद का पत्थर भी रखेंगे, लिहाजा उनकी सौगंध भी पूरी होगी। वह राम मंदिर आंदोलन के दौरान लालकृष्ण आडवाणी और डा. मुरली मनोहर जोशी के ‘सारथि’ रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर बनने तक अयोध्या में न आने और भगवान के ऐसे बंद दर्शन न करने की सौगंध ली थी। आज उनके हाथों श्रीराम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोई और राजनीति करना या पूजन के समय पर सवाल करना बेमानी है।

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