Friday, January 22, 2021 12:15 AM

सरकार-किसानों में वार्ता बेनतीजा; अब कल होगी बात, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

 किसान बोले, सरकार से कुछ लेकर रहेंगे, चाहे गोली या शांतिपूर्ण समाधान

 बैठक को सरकार ने बताया अच्छा, तीन को हल निकलने की उम्मीद

नई दिल्ली –नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के 35 प्रतिनिधियों से केंद्रीय मंत्रियों की मंगलवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही। दिल्ली में विज्ञान भवन में तीन घंटे से ज्यादा वक्त तक चली बैठक में बात नहीं बनी। हालांकि, सरकार और किसान दोनों ने ही बातचीत को अच्छी बताया है। अब तीन दिसंबर को अगले चरण की बातचीत होगी। केंद्र ने नए कृषि कानूनों पर विचार के लिए किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और सरकार के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है।

सरकार ने किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है, लेकिन किसानों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन जारी रहेगा। बैठक में सरकार की तरफ  से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश शामिल हुए। बैठक के दौरान सरकार की तरफ से किसान नेताओं को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर डीटेल प्रेजेंटेशन दिखाया। प्रेजेंटेशन के  राजनीतिक मकसद से गलत तरीके से पेश नहीं किया जाए।

वहीं, भाजपा के कद्दावर नेता राम माधव ने कड़ी आपत्ति जताई। माधव ने ट्रूडो के भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी के अधिकार को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनकी हैसियत क्या है। क्या यह भारत के संप्रभु मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा नहीं है। उधर, शिवसेना की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ट्रूडो भारत के आंतरिक मामलों पर अपनी राजनीतिक रोटी नहीं सेकें। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रिय जस्टिन ट्रूडो, आपकी चिंतांओं से बहुत प्रभावित हूं, लेकिन भारत के आंतरिक मामले किसी दूसरे देश की राजनीति का चारा नहीं बन सकते। कृपया दूसरे देशों के प्रति शिष्टाचार की हमारी भावना का सम्मान करें।

कमेटी बनाने का केंद्र का पैंतरा ठुकराया

किसानों और सरकार के बीच बातचीत के दो घंटे चले पहले दौर में किसान प्रतिनिधियों के सामने केंद्र ने एमएसपी पर प्रेजेंटेशन दिया। इसके अलावा उनके सामने प्रस्ताव रखा कि नए कानूनों पर चर्चा के लिए कमेटी बनाई जाए, जिसमें केंद्र, किसान और एक्सपर्ट शामिल हों। हालांकि कहा जा रहा है कि किसानों ने यह पेशकश ठुकरा दी है और इसे महज आंदोलन को कमजोर करने का पैंतरा बताया है।

चाय के ऑफर के बदले जलेबी-लंगर

किसान नेताओं को बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने चाय पीने का ऑफर दिया, जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया। इसके साथ ही किसान नेताओं ने मंत्रियों को दिल्ली के बॉर्डर पर आने किसानों के बीच आने और जलेबी-लंगर खाने का न्योता दिया।

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