सेना में नेपाली सैनिक

कर्नल (रि.) मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

पिछले सप्ताह की मुख्य घटनाओं में धारा 370 की पहली वर्षगांठ पर जम्मू-कश्मीर में बाबू को बदलकर राजनीतिज्ञ को  राज्यपाल बनाना, गहलोत सरकार को हाई कोर्ट द्वारा रियायत, रक्षा मंत्रालय द्वारा चीनी घुसपैठ की बात पर स्वीकृति कर डिटेल को वेबसाइट से हटाना, सुशांत केस में सीबीआई को जांच की अनुमति के साथ छोटे पर्दे के दो और कलाकारों का खुदकुशी करना, भारत में शिक्षा नीति के बदलाव का फैसला तथा भगवान राम मंदिर का भूमि पूजन। पर इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री का राम के जन्म पर विवादित बयान और उसके बाद उनके विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञावली का कहना कि भारतीय सेना में नेपाली सैनिकों की भर्ती की समीक्षा होगी।

इस वर्ष की शुरुआत से ही नेपाल भारत के खिलाफ तीखे तेवर दिखा रहा है। पहले उत्तरांचल के तीन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताकर विवादित राजनयिक नक्शा जारी करना, उसके बाद नेपाल में ब्याही गई भारतीय बहुओं की नागरिकता को पेचीदा करना तथा अब नेपाली सैनिकों को भारतीय सेना में भर्ती पर रोक लगाने की बात करना। सबसे पहले 1816 में अंग्रेजों और नेपाली राजशाही के बीच हुई संगोली संधि के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी में गोरखा रेजीमेंट होने की बात हुई। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 30 जुलाई 1950 को भारत और नेपाल में एक मैत्री संधि हुई जिसमें ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजीमेंट का भारतीय सेना का हिस्सा होने के अलावा दोनों देशों के नागरिकों का बिना वीजा आना-जाना, नौकरी करना तथा समान अधिकारों पर सहमति बनी। नेपाल की ऊंची पहाडिय़ां सामरिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

भारत में अभी तक नेपाली सैनिकों वाली गोरखा रेजीमेंट के पांच ट्रेनिंग सेंटर हैं, जिनमें एक प्रशिक्षण केंद्र हिमाचल के सबाथू में भी स्थित है। गोरखा सैनिक अपनी बहादुरी के लिए विश्व विख्यात हैं। द्वितीय विश्व युद्ध में गोरखा रेजीमेंट में रहे युवा अधिकारी सैम मानेकशॉ जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सेना अध्यक्ष थे, उनका कहना था कि ‘सामने से गोली आते हुए देख अगर कोई कहता है कि उसे डर नहीं लगता, या तो वह झूठ बोल रहा है या वह गोरखा हैÓ। भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी गोरखा रेजीमेंट से ही संबंध रखते हैं।

वर्तमान में भारतीय सेना में करीब 30000 नेपाली सैनिक तथा 120 अधिकारी हैं तथा नेपाल में भारतीय सेना के 79000 सेवानिवृत्त पेंशनर हैं। खुखरी तथा नेपाली कैप व हैट गोरखा सैनिक की पहचान है। यह माना जाता है कि गोरखा स्वभाव से बातूनी होते हैं, इसलिए गोरखा हैट की पट्टी को ठुड्डी के बजाय निचले होंठ के नीचे से लाया जाता है ताकि नेपाली सैनिक ज्यादा बातें न कर अपने काम पर ध्यान दें। नेपाल को डर है कि भारत-चीन सीमा पर चल रहे विवाद में भारत वहां पर नेपाली सैनिकों को तैनात करेगा, जिससे नेपाल और चीन के रिश्ते खराब होंगे।

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