Thursday, March 04, 2021 03:06 PM

शिमला के कोचिंग सेंटर

हिमाचल प्रदेश में कोचिंग व एकेडमी का चलन बहुत पहले से जारी है, लेकिन अब वक्त के साथ इनकी जरूरत बढ़ने लगी है। 90 के दशक से इक्का-दुक्का अकादमियों के साथ शुरू हुआ सिलसिला अब सैकड़ों का आंकड़ा पार कर गया है। बड़ी नौकरी की ख्वाहिश लिए बाहर जाने वाले छात्रों के लिए ये अकादमियां कहीं न कहीं उनके लिए घर में तैयारी कर एचएएस आईएएस-डाक्टर-इंजीनियर बनने की उम्मीद दे रही हैं। राजधानी शिमला में कैसे हैं कोचिंग सेंटर्स के हाल, किन विषयों के लिए है सबसे ज्यादा मारामारी… इस बार के दखल में बता रही हैं

प्रतिमा चौहान…

प्रदेश की राजधानी शिमला में सैकड़ों की संख्या में कोचिंग सेंटर हैं। हालांकि शिमला शहर में 100 के करीब कोचिंग सेंटर हैं, जिसमें से 20 से 25 ही ऐसे बड़े कोचिंग सेंटर हैं, जिनकी रजिस्टे्रशन कंपनी के नाम पर हुई है। वहीं, लेबर विभाग में भी नाम दर्ज है। इसके अलावा शहर में सैकड़ों ऐसे कोचिंग सेंटर भी हैं, जिनका कहीं नाम ही रिकार्ड नहीं है। शहर के हर क्षेत्र, कोने-कोने में चले जाएं, कोई न कोई कोचिंग सेंटर आपको मिल ही जाएगा। इसमें कई ऐसे भी सेंटर हैं, जो दो-तीन कमरों में चल रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि अभी तक इन कोचिंग सेंटर्स पर नजर रखने के लिए कोई नियम व कानून तय नहीं हुआ है।

सेंटर में छात्रों को किस आधार पर शिक्षा दी जा रही है, नियमों के तहत शिक्षकों की भर्ती की गई है या नहीं, इस पर कोई कानून नहीं बनाया गया है। सबसे ज्यादा कोचिंग इंस्टीच्यूट छोटा शिमला, संजौली, मालरोड, लक्कड़ बाजार, बालूगंज, पंथाघाटी में हैं। शिमला में मानो ट्रेंड ही बन गया है कि स्कूल के साथ-साथ ही छात्रों को कोचिंग सेंटर्स में भेजना शुरू कर दिया जाता है, वहीं 20 से 50 हजार व एक लाख तक फीस भरने को अभिभावक तैयार रहते हैं। कई बार कोचिंग सेंटर द्वारा की जा रही लूट के खिलाफ अभिभावकों ने आवाज भी उठाई, लेकिन उस पर कुछ नहीं हो पाया। नतीजतन आज राजधानी कोचिंग सेंटर्स से भर गई है।

शिमला के नामी संस्थान

महिंद्रा कोचिंग सेंटर यह छोटा शिमला में स्थित है। यहां छात्रों के लिए बैठने से लेकर तमाम सुविधाएं है। दूसरे कोचिंग सेंटर का नाम एस्पायर आईआईटी इंस्टीच्यूट है। हर साल यहां से नीट, एमबीबीएस, सीबीएसई व तमाम परीक्षाओं में छात्र टॉप करते हैं। इसी तरह विद्यापीठ का नाम शिमला में चलता है। काफी संख्या में यहां भी अभिभावक अपने छात्रों को कोचिंग के लिए भेजते हैं। अर्णव सात्विक का नाम भी शहर में मशहूर कोचिंग सेंटर्स में से एक है। इसी तरह सरस्वती विद्या मंदिर भी है, जहां शहर के छात्र कोचिंग लेने में रुचि रखते हैं।

इसके अलावा आईबीएस कोचिंग सेंटर छोटा शिमला, बैंक पीओ कोचिंग के लिए एएए ब्राइट कोचिंग सेंटर छोटा शिमला, गुरु जी होम ट्यूटर मॉल शिमला, डीएनए कोचिंग सेंटर संजौली, सिग्मा कोचिंग सेंटर संजौली, हिमालयन इंस्टीच्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन एंड टेक्नालॉजी, बीसमीट जेपमेन न्यू शिमला, क्लेट किडा लॉ कोचिंग सेंटर, अभिमन्यू आईएएस कोचिंग सेंटर, अवनी-सावनी विद्या मंदिर, दिल्ली एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस नियर आईजीएमसी, दुर्गा शॉर्ट हैंड एंड जीके एकेडमी, ऐपटेक लर्निंग कम्प्यूटर सेंटर एजुकेशन संजौली, दि करियर गुरु लक्कड़ बाजार, आईआईसीई कम्प्यूटर सेंटर संजौली, विद्यापीठ राम बाजार।

देश-विदेश तक राजधानी की धाक

राजधानी शिमला को अब प्रदेश में कोचिंग हब से भी पहचान मिलने लगी है। यहां के शांत वातावरण को देखते हुए प्रदेश ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों से भी छात्र कोचिंग लेने आते हैं। देश-विदेशों में जॉब करने वाले ऐसे हजारों छात्र शिमला के कोचिंग सेंटर्स से निकले हैं। यहां के कुछ एक ऐसे कोचिंग सेंटर्स हैं, जो कि 18 से 20 साल पुराने हैं और वहां पढ़ने के लिए छात्रों की लाइन लगी रहती है। कहा जाता है कि यहां कोचिंग सेंटर से निकलने वाले छात्र विभिन्न सरकारी पदों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बता दें कि शिमला में कोचिंग सेंटर्स में सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलने का भी एक ऐसा कारण है कि ज्यादातर छात्र यहां आकर पढ़ना पंसद करते हैं। यहां कोटा, चंडीगढ़, दिल्ली जैसे शहरों की सुविधाओं को भी आंका जाता है। राजधानी की कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले न केवल हिमाचल के ही छात्र हैं, बल्कि देश-विदेशों के छात्रों के दाखिले भी यहां हुए हैं। दो से तीन साल तक कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग लेने के बाद ही ये छात्र अपने देश व राज्य में लौटते हैं।

संजौली, छोटा शिमला में सबसे ज्यादा सेंटर

शिमला में बहुत से कोचिंग सेंटर हैं, लेकिन उनमें से संजौली व छोटा शिमला दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सबसे ज्यादा कोचिंग सेंटर हैं। हालांकि इसके बाद खलीणी व पंथाघाटी भी हैं, जहां मशहूर कोचिंग सेंटर हैं। छोटा शिमला में महिंद्रा आईबीएस कोचिंग सेंटर, बैंक पीओ कोचिंग के लिए एएए ब्राइट कोचिंग सेंटर छोटा शिमला में है। इसके अलावा डीएनए कोचिंग सेंटर संजौली, सिग्मा कोचिंग सेंटर, ऐपटेक लर्निंग कम्प्यूटर सेंटर एजुकेशन, ऐपटेक लर्निंग कम्प्यूटर सेंटर एजुकेशन संजौली में है। बता दें कि इन दिनों कोविड की वजह से सेंटर पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन बावजूद इसके कोचिंग सेंटर में ऑनलाइन स्टडी छात्रों की चल रही है।

ऐसा नहीं है कि शहर में अच्छे कोचिंग सेंटर नहीं हैं। कई पुराने कोचिंग सेंटर जैसे एस्पायर आईआईटी, विद्यापीठ जैसे सेंटर बहुत जाने-माने हैं। इन कोचिंग सेंटर्स से हर साल नीट, जेईई व कई प्रतियोगी परीक्षा पास कर छात्र निकलते हैं

सोनिया शर्मा, अभिभावक

शिमला के कई कोचिंग सेंटर्स में प्रतियोगी परीक्षाओं की अच्छे से छात्रों को तैयारी करवाई जाती है। इससे बच्चों में जहां आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं नॉलेज भी इम्प्रूव होती है, लेकिन जिस तरह अब धीरे-धीरे प्राइवेट कोचिंग सेंटर की भरमार सी शिमला में हो गई है, उस पर कहीं न कहीं प्रशासन को विचार करने की जरूरत है

अनिता, अभिभावक

कई इंस्टीच्यूट कर रहे बेहतरीन काम

कोचिंग सेंटर से बच्चों को भेजने से उनमें इंप्रूवमेंट तो होता है, लेकिन इससे उनका मानसिक संतुलन भी बिगड़ रहा है। दूसरी ओर एक ही जगह इतने कोचिंग सेंटर खुलने से यह सिर्फ एक कमाने का साधन ही बन गया है। कई कोचिंग सेंटर जो बेहतर कार्य भी कर रहे हैं, उनकी छवि भी खराब हो रही है

रजनीश शर्मा, अभिभावक

राज्य सरकार तय करे नियम

शहर के कई कोचिंग सेंटर्स में युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, लेकिन  छोटे-छोटे सेंटर खोल दिए गए हैं, जिससे कि शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में खुल रहे नए कोचिंग सेंटर के लिए सरकार को नियम तय करने चाहिए

गोपाल शर्मा, अभिभावक

बड़े सेक्टर में नौकरी के लिए कोचिंग जरूरी

स्कूल-कालेज व अन्य संस्थान छात्रों को एनसीईआरटी और बोर्ड का ही सिलेबस पढ़ाते हैं, लेकिन अगर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना है और कहीं बड़े सेक्टर में नौकरी करनी है, तो इसके लिए उन्हें कोचिंग लेना बेहद जरूरी है। बिना कोचिंग लिए छात्र अच्छे मुकाम तक आसानी से नहीं पहुंच पाएगा

डीएन शर्मा, शिक्षाविद

आज के दौर में बहुत से कोचिंग सेंटर खुल गए हैं। कोटा राजस्थान के कोचिंग सेंटर जैसा शिमला में कोई सेंटर नहीं है। अब कोचिंंग सेंटर खुल तो गए हैं, लेकिन क्वाइलिटी का स्तर बहुत नीचे है। अभिभावक भी दूसरों की देखादेखी में कोचिंग सेंटर में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजते हैं। शिक्षा के नाम पर खोले जा रहे इन कोचिंग सेंटर पर कोई नियम लागू होने चाहिए

बोबिल ठाकुर, शिक्षक

शिमला में धड़ल्ले से कोचिंग सेंटर खोल दिए गए हैं, लेकिन यहां छात्रों को पढ़ाने की बजाय सेल्फ स्टडी पर ही फोकस किया जाता है। अभिभावक एक-दूसरे को देखकर अपने बच्चों को लाखों खर्च कर कोचिंग सेंटर में भेजते हैं। जिस तरह शहर में कोचिंग सेंटर की भरमार हो गई है, ऐसे में यह सिर्फ पैसे कमाने का एक धंधा बनकर रह गया है

वीरेंद्र चौहान, शिक्षक

सरकार का काम कोचिंग सेंटर कर रहे कोचिंग सेंटर से शिक्षा का निजिकरण हो रहा है। स्कूलों में जब पर्याप्त पढ़ाई हो रही है, तो कोचिंग सेंटर का कोई महत्त्व नहीं है। जो काम सरकार का है, वह कोचिंग सेंटर कर रहे हैं। कोचिंग सेंटर में हजारों-लाखों रुपए खर्च करने के बाद जब बच्चे कुछ बन नहीं रहे हैं, तो वे नशे की ओर बढ़ रहे हैं

प्रो.भवानी सिंह, एचपीयू

डाक्टर-इंजीनियर बनने के लिए कोचिंग पर फोकस

शिमला के कोचिंग सेंटर्स में सबसे ज्यादा छात्र नीट व जेईई के लिए कोचिंग लेते हैं। शिमला की एस्पायर आईआईटी में सबसे ज्यादा नीट, जेईई व मेडिकल स्टूडेंट कोचिंग ले रहे हैं। वहीं, हर साल एस्पायर आईआईटी से नीट व जेईई की परीक्षा में छात्र देश भर की मैरिट में भी आते हैं। कुल मिलाकर देखें तो शिमला के कोचिंग सेंटर्स की भीड़ देखें, तो यहां सबसे ज्यादा जेईई-नीट की तैयारी कर रहे छात्र ही आते हैं।

स्कूल के साथ-साथ कोचिंग

80 प्रतिशत ऐसे भी छात्र हैं, जो दसवीं व जमा दो में पढ़ते हैं और स्कूल के बाद वे कोचिंग लेने आते हैं। अभिभावक बोर्ड की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों को भी सबसे ज्यादा कोचिंग सेंटर में भेजते हैं। यही वजह है कि स्कूल टाइम से ही कोचिंग सेंटर्स में अभिभावक  अपने बच्चों को भेजना शुरू कर देते हैं। बताया जाता  है कि कोचिंग सेंटर में मेडिकल, नॉन मेडिकल, प्रशासनिक सेवाएं, फिजिक्स, मैथ्स, अंग्रेजी, जैसे विषयों की ज्यादा डिमांड रहती है।

10वीं-12वीं के छात्र ज्यादा 

कोचिंग सेंटर्स में सबसे ज्यादा दसवीं-12वीं के छात्र कोचिंग लेते हैं। इसके अलावा कई अभिभावक ऐसे भी हैं, जो आठवीं के बाद ही अपने बच्चों को कोचिंग सेंटर में भेज देते हैं। क्लास में टॉप आने की होड़ ने हजारों छात्रों को कोचिंग सेंटर तक पहुंचा दिया है।

सरकारी अफसर बनने को भी कोचिंग सेंटर का सहारा

शिमला में सरकारी नौकरी पाने वाले छात्रों की भी कोचिंग सेंटर में भीड़ देखी जा सकती है। एचएएस-आईएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी छात्र कोचिंग लेते हैं। शिमला के एक कोचिंग सेंटर में ही 200 से 300 दाखिले एक कोचिंग सेंटर में होते हैं। बड़े-बड़े मशहूर कोचिंग सेंटर में ये दाखिले इससे भी ज्यादा हैं।

एएस विद्या मंदिर :  सफलता की पूरी गारंटी

शिमला में बहुत से ऐसे कोचिंग सेंटर हैं, जो छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं, लेकिन शिमला के 18 साल पुराने एएस विद्या मंदिर में जहां छात्रों की हर साल दाखिला लेने के लिए लाइन लगी होती है। नीट, जेईई, मेन्स के टॉपर हर साल इस संस्थान से निकलते हैं।

जानकारी के अनुसार प्रत्येक वर्ष 35 से 40 एमबीबीएस, बीडीएस, पैरामेडिकल स्टाफ के लिए छात्रों की शिमला के एएस विद्या मंदिर से सिलेक्शन होती है। अच्छे परिणाम, अध्ययन सामग्री, बेस्ट फेसिलिटी, हॉस्पिटल, लाइब्रेरी तमाम सुविधाएं यहां पढ़ने वाले छात्रों को एक ही छत के नीचे मिलती हैं। संस्थानों के प्रबंधनों का दावा है कि सारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलने से और स्टडी मैटीरियल टैक्ट सीरीज टाइम टू टाइम छात्रों को यहां दी जाती है, यही वजह है कि हर साल यहां छात्रों का दाखिला बढ़ता है। बता दें कि अर्णव सात्विक विद्या मंदिर हिमाचल सरकार द्वारा चलाई गई मेधा प्रोत्साहन योजना में भी शामिल है, जिसमें नीट, एनडीए, जेईई मेन्स, एचएएस, अलाइड बैंकिंग की कोचिंग दी जाती है। इस योजना के तहत हिमाचल सरकार एक लाख तक का बजट छात्रों को कोचिंग के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में देती है। इस योजना के तहत छात्रों के लिए यह शर्त लगाई गई है कि जिनकी एनुअल इनकम दो लाख से कम हो और प्लस टू में जनरल कैटेगिरी में 75 प्रतिशत तक नंबर हों, एससी-एसटी के 65 प्रतिशत मार्क्स होना भी मेधा प्रोत्साहन योजना के लिए अनिवार्य किया है। इसके अलावा इस योजना का लाभ उठाने वाला छात्र हिमाचली मॉडिफाइड होना चाहिए।

 हिमाचल सरकार ने मेधा प्रोत्साहन योजना के लिए शिमला के एएस विद्या मंदिर को भी चुना है, जिसमें हर साल छात्र मैरिट के हिसाब से दाखिला लेते हैं। अर्णव सात्विक विद्या मंदिर में हिमाचल से बाहर तेलंगाना, राजस्थान व हरियाणा के भी कुछ बच्चे कोचिंग ले रहे हैं। अर्णव सात्विक विद्या मंदिर 18 वर्षों से निरंतर अच्छे परिणाम देता आ रहा है और इसी वजह से अर्णव सात्विक विद्या मंदिर को ऑल इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड-2014, हिमाचल अचीवर अवार्ड 2018 व हिमाचल शिक्षा रत्न अवार्ड 2019 से भी नवाजा गया है।

ये तय करते हैं संस्थान के नियम 

राजधानी में खुले कई कोचिंग सेंटर का मकसद मात्र बिजनेस तक ही रह गया है। अभी तक कोचिंग सेंटर की फीस व शिक्षकों को किस आधार पर रखना है, इसे लेकर कोई भी मानक तैयार नहीं हुए हैं। हालांकि तीन से चार साल पहले एक कमीशन के गठन को लेकर प्लानिंग चल भी रही थी, लेकिन यह भी राजनीति की भेंट चढ़ गई। अभी तक प्रदेश में जितने भी कोचिंग सेंटर बने हैं, उन पर नजर रखने के लिए सरकार व शिक्षा विभाग ने कोई नियम व कानून लागू नहीं किया है। यही कारण है कि अब हर क्षेत्र में कोचिंग सेंटर खोल दिए गए हैं, वहीं हजारों-लाखों की फीस इन सेंटर्स में छात्रों से ली जा रही है।

साल-महीने का होता है फीस पैकेज

कोचिंग सेंटर्स में फीस पैकेज सेंटर चलाने वाले मालिक खुद ही तय करते हैं। साल, महीने में कितनी फीस ली जानी चाहिए, इस पर वह अंदरखाते खुद ही फीस पैकेज तय करते हैं। कई कोचिंग सेंटर में छात्रों की उम्र के हिसाब से भी फीस वसूली जाती है, तो कई सेंटर कितने घंटे छात्र को पढ़ाया, उस हिसाब से फीस ली जाती है। कुल मिलाकर जिस तरह निजी स्कूलों को फीस को लेकर आदेश जारी किए जाते हैं। कोचिंग सेंटर पर इस तरह की कोई पांबदी नहीं होती।

खुद रखते हैं स्टाफ

कोचिंग सेंटर्स में छोटे बच्चों से लेकर डाक्टर, इंजीनियरिंग के लिए कोचिंग देने वाले शिक्षक डिग्री व पढ़ाने के लिए इलीजिबल हैं या नहीं, इसे चैक करने के लिए कोई नहीं है। कोचिंग इंस्टीच्यूट की फैकल्टी प्रबंधन खुद तय करता है। इसके लिए कोई मापदंड तय नहीं किए गए हैं। हांलाकि बड़े कोचिंग सेंटर के संचालक इलीजिबल शिक्षकों को ही पढ़ाने के लिए रखते हैं।

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