Tuesday, December 07, 2021 05:06 AM

श्रीराम तीर्थ

यह मंदिर भगवान राम को समर्पित है। न केवल इस मंदिर का, अपितु इस पावन स्थली का भी इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यहां महर्षि वाल्मीकि का आश्रम और एक कुटी (झोपड़ी) स्थित है। ऐसी मान्यता है कि श्री राम द्वारा माता सीता का परित्याग करने के पश्चात ऋषि वाल्मीकि ने उन्हें इसी स्थान पर अपने आश्रम में आश्रय दिया था...

उत्तरी भारत में पंजाब राज्य में अमृतसर से 11 किमी. दूर अमृतसर-चोगावा रोड पर प्राचीन व ऐतिहासिक धार्मिक स्थल श्री राम तीर्थ मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान राम को समर्पित है। न केवल इस मंदिर का, अपितु इस पावन स्थली का भी इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।

यहां महर्षि वाल्मीकि का आश्रम और एक कुटी (झोपड़ी) स्थित है। ऐसी मान्यता है कि श्री राम द्वारा माता सीता का परित्याग करने के पश्चात ऋषि वाल्मीकि ने उन्हें इसी स्थान पर अपने आश्रम में आश्रय दिया था। तब माता सीता ने यहां इस कुटी में ही निवास किया था, इसी कारण इसे माता सीता की आश्रय स्थली भी कहा जाता है। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना भी यहीं की थी। इसी आश्रम में उन्होंने लव और कुश को शस्त्र चलाने की शिक्षा भी दी थी। जब श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ के लिए घोड़ा छोड़ा था, तब इसी स्थान पर लव-कुश ने उस घोड़े को पकड़ा था और श्री राम के साथ युद्ध भी किया था। इस मंदिर के समीप ही एक सरोवर है, जिसे बहुत पावन माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इस सरोवर को हनुमान जी ने खोदकर बनाया था। इस सरोवर की परिधि 3 किमी. है और इसके आसपास अनेक मंदिर बने हुए हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु और साधु-संत यहां स्नान करने आते हैं। सरोवर के चारों ओर 30 फुट चौड़ा पथ बना हुआ है, सरोवर में स्नान करने के पश्चात भक्त इस सरोवर की परिक्रमा करते हैं। यहां एक प्राचीन बावड़ी भी है, माना जाता है कि सीता माता यहां स्नान किया करती थीं।

इसे माता सीता की बावड़ी कहा जाता है। इस बावड़ी में स्नान कर निःसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। मंदिर के समीप ही प्राचीन श्री रामचंद्र मंदिर, जगन्नाथपुरी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, राम, लक्ष्मण, सीता मंदिर, महर्षि वाल्मीकि जी का धूना, सीता जी की कुटिया, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, सीता राम मिलाप मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित हैं, जो रामायण की याद दिलाते हैं। बेघर लोग इस मंदिर में आकर ईंटो के छोटे-छोटे घर बनाकर मन्नत मांगते हैं कि हमें अपने घर की प्राप्ति हो। कार्तिक माह पूर्णिमा के दिन श्री राम तीर्थ मंदिर में चारदिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है।