सिंघाड़े के गुण

सिंघाड़े के आटे का प्रयोग भी किया जाता है। सिंघाड़े का प्रयोग कच्चा और पका कर दोनों ही रूपों में किया जाता है। सिंघाड़े में विटामिन ए, बी और सी भरपूर मात्रा में पाए  जाते हैं…

सिंघाड़ा एक त्रिकोने आकार का फल होता है। यह स्वास्थय के लिए पौष्टिक और विटामिन युक्त फल है। सिंघाड़े के आटे का प्रयोग भी किया जाता है। सिंघाड़े का प्रयोग कच्चा और पका कर दोनों ही रूपों में किया जाता है। सिंघाड़े में विटामिन ए, बी और सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह खनिज लवण और कार्बोहाइड्रेट युक्त भी होता है। सिंघाडे़ में छिपे हुए आयुर्वेदिक गुण जो आपके स्वास्थय को लाभ पहुंचा सकते हैंः

पौष्टिकता से भरपूर

सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी, सी, आयरन, कैल्शियम, मैगनीशियम, फास्फोरस जैसे मिनरल्ज पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़े में भैंस के दूध की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्त्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने तो अमृत तुल्य बताते हुए इसे ताकतवर और पौष्टिक तत्त्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव हो सकता है। बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह काफी गुणकारी है।

दूर करे गले की खराश

सिंघाड़े में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्त्व गले की खराश और कफ  कम करने में प्रभावी रूप से फायदेमंद होते हैं। खांसी के लिए यह एक टॉनिक का काम करता है।

टांसिल्स का इलाज

इसमें मौजूद आयोडीन गले में होने वाले टांसिल के इलाज में लाभदायक है। इसके ताजा फल या चूर्ण खाना दोनों ही फायदेमंद होता है। सिंघाड़े को पानी में उबाल कर कुल्ला करने से भी आराम मिलता है।

सूजन और दर्द में राहत

सिंघाड़ा सूजन और दर्द में मरहम का काम करता है। शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर सिंघाड़े के छिलके को पीस कर लगाने से आराम मिलता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। यह त्वचा की झुर्रियां कम करने में मदद करता है। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।

आंखों के लिए फायदेमंद

आंखों की रोशनी को बढ़ाने में भी सिंघाड़ा लाभदायक होता है क्योंकि इसमें विटामिन ए सही मात्रा में पाया जाता है। जिस व्यक्ति को खरोंच लग जाए और खून बहुत ज्यादा निकल रहा हो, तो उसे सिंघाड़ा खाना चाहिए, सिंघाड़े में रक्त स्तंभक का गुण भी पाया जाता है।

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