Friday, September 24, 2021 06:40 AM

नींद और हमारी सेहत

हमारे शरीर के लिए जितना आवश्यक भोजन है उतनी ही आवश्यक नींद भी है, क्योंकि नींद न केवल हमारे शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत आवश्यक है, क्योंकि वर्तमान समय में हम भूलना, चिड़चिड़ापन, तनाव, अवसाद तथा एकाग्रता में कमी जैसी समस्याओं का सामना अकसर करते हैं, परंतु इस बात से अनजान रहते हैं कि इन सभी समस्याओं का कारण हमारी अधूरी नींद भी हो सकती है। अच्छी नींद जहां एक तरफ  याददाश्त तथा एकाग्रता के लिए उपयोगी होती है, वहीं दूसरी तरफ  यह हमें दीर्घायु भी बनाती है। प्राचीन काल में लोगों की लंबी आयु का एक कारण यह भी था कि वो कार्य तथा भोजन के साथ-साथ नींद को भी अपने जीवन में पूरा महत्त्व देते थे, परंतु वर्तमान समय में नींद हमारे जीवन में उपेक्षित हो गई है, जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि आठ घंटे की नींद प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

क्यों जरूरी है नींद

हमारा शरीर निरोगी हो इसके लिए बहुत आवश्यक है कि हम पौष्टिक भोजन के साथ-साथ अपनी नींद अवश्य पूरी करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद न सिर्फ  हमारे अच्छे स्वास्थ्य का आधार है, बल्कि इससे हमारे दिमाग को भी पोषण मिलता है, परंतु नींद पूरी न होने की वजह से हमारा शरीर पूरी तरह रिलेक्स नहीं हो पाता है और यदि हम नींद पूरी किए बिना ही लगातार काम करते हैं, तो हमारे शरीर को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है एवं हमारा रक्त मांसपेशियों की ओर बहने लगता है।

इस कारण मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी होती है और इस वजह से वहां स्थित तंत्रिकाओं में तनाव उत्पन्न हो जाता है जो कई शारीरिक तथा मानसिक रोगों की वजह बनता है। अगर हम पूरी तथा अच्छी नींद लेते हैं, तो वह हमारे संपूर्ण शरीर के लिए ईंधन के समान कार्य करती है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी नींद कई टुकड़ों में बंटी होती है, सर्वप्रथम हमारी भुजाओं, पैरों एवं गर्दन की बड़ी मांसपेशियां सोती हैं तथा अंत में होंठों एवं पलकों की छोटी मांसपेशियां।

इसी प्रकार हमारे चेतना केंद्र भी एक-एक कर के सोते हैं, सबसे पहले सूंघने की शक्ति उसके बाद देखने एवं सुनने की शक्ति अवचेतना के आगोश में समा जाती है, परंतु इस अवस्था में भी हमारे महत्त्वपूर्ण अंग जैसे हृदय, मस्तिष्क एवं नाड़ी क्रियाशील रहते हैं।किंतु इनकी क्रियाशीलता थोड़ी मंद पड़ जाती है, इससे हमारे संपूर्ण शरीर की मांसपेशियों को आराम मिल जाता है तथा हम जगते हैं तो ऊर्जा से परिपूर्ण होते हैं। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक जगता है, तो थकान के कारण चिड़चिड़ा होने लगता है एवं उसका शरीर तथा मस्तिष्क सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाता है। आजकल की जीवनशैली में लोग बहुत व्यस्त रहते हैं। उनके सोने और जगने का कोई निश्चित समय ही नहीं है। दिन भर काम का बोझ और रात को पार्टियों का आयोजन उनके जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है।

यही कारण है कि सही ढंग से नींद नहीं आती और लोग नींद की दवाइयों का सहारा लेते हैं। अधिक चाय और कॉफी का सेवन भी नुकसानदेह होता है। इसका प्रभाव भी अनिद्रा का रोगी बना देता है। इसलिए समय रहते इन छोटी-छोटी बातों पर गौर करें और अपनी दिनचर्या में बदलाव करके अपने सोने और जगने का सही टाइम टेबल बनाएं।