Friday, October 23, 2020 04:44 AM

सोशल साइट्स पर सजग रहें हिमाचली: रविंद्र सिंह भड़वाल, लेखक नूरपुर से हैं

रविंद्र सिंह भड़वाल

लेखक नूरपुर से हैं

ऐसी स्थिति में अब समाज को साइबर शिक्षा की महत्ती जरूरत है। सबसे पहले तो हर किसी को अपनी सुरक्षा खुद ही सुनिश्चित करनी होगी। सोशल मीडिया पर तमाम तरह के प्राइवेसी फीचर हैं। इसके जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। ऐसे मामलों में शिकायत की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश होनी चाहिए…

कुछ समय पहले गृह मंत्रालय ने शिमला स्थित हिमाचल के स्टेट साइबर क्राइम थाना को अपराध के सात मामले भेजे थे। ये सभी सोशल मीडिया यानी फेसबुक मैसेंजर और व्हाट्सऐप के जरिए एक-दूसरे को पोर्नोग्राफिक सामग्री भेजते थे। सातों मामले कुल्लू जिला के थे। इसके बाद कुल्लू पुलिस ने इन आरोपियों पर मामले दर्ज कर लिए थे। इसके बावजूद कड़वा सत्य यह है कि सोशल मीडिया पर दूसरों, खासकर महिलाओं एवं युवतियों से बदतमीजी के मामले लगातार बढ़ ही रहे हैं। ये मामले सीधे-सीधे पीडि़त व्यक्ति के सम्मान एवं गरिमा से जुड़े होते हैं, लिहाजा लोकलाज के भय से अधिकतर मामले कभी सामने भी नहीं आ पाते। हिमाचल प्रदेश में भी ऐसे कुछ ही मामले अभी तक दर्ज हो पाए हैं, जबकि न जाने कितने ही युवा एवं युवतियां इस साइबर अपराध की दहशत तले जीने को मजबूर हैं। इससे मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना तो होती ही है, कई मामलों में नाजायज ढंग से आर्थिक वसूली की बात भी निकलकर सामने आती है।

 ऐसे में जरूरी है कि साइबर अपराध के इस बढ़ते प्रभाव को समझते हुए इससे बचाव के पुख्ता बंदोबस्त किए जाएं। ‘कॉम्बैटिंग ऑनलाइन वायलेंस अगेंस्ट वुमन एंड गर्ल्स-वर्ल्ड वाइड वेकअप’ नाम के एक सर्वे में लगभग 86 देशों का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली लगभग हर चार में से तीन महिलाएं किसी न किसी किस्म की साइबर हिंसा का शिकार होती हैं। सर्वे में यह बात भी सामने आई कि भारत में साइबर अपराध के मामलों में शिकायत करने में महिलाओं की संख्या काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में केवल 35 फीसदी महिलाओं ने साइबर अपराध की शिकायत की, जबकि 46.7 फीसदी पीडि़त महिलाओं ने शिकायत ही नहीं की। वहीं 18.3 फीसदी महिलाओं को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। हिमाचल प्रदेश की स्थिति को भी इसी अनुपात में समझा जा सकता है। इससे समझना आसान है कि साइबर क्राइम को लेकर भारत में स्थिति बेहद चिंतनीय है और उससे भी बढ़कर यह कि पीडि़त लोग इस समस्या के समाधान के लिए आगे आने से बचते ही रहे हैं। कहीं न कहीं यह प्रवृत्ति इन अपराधियों के हौसले को और अधिक बढ़ा रही होती है। इसका शिकार फिर ऐसी ही दूसरी महिलाओं या लड़कियों को होना पड़ता है। सोशल मीडिया पर होने वाले इस साइबर अपराध को कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहला है साइबर स्टाकिंग।

 किसी को बार-बार टेक्स्ट मैसेज भेजना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना, स्टेटस अपडेट पर नजर रखना और इंटरनेट मॉनिटरिंग इस अपराध की श्रेणी में आते हैं। आईपीसी की धारा-354डी के तहत यह दंडनीय अपराध है। दूसरा है साइबर स्पाइंग। आईटी एक्ट की धारा-66ई के अंतर्गत यह दंडनीय अपराध है। इसमें चेंजिंग रूम, लेडीज वॉशरूम, होटल के कमरे और बाथरूम जैसी जगहों पर रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाए जाते हैं। तीसरी श्रेणी है साइबर पॉर्नोग्राफी। इसके तहत महिलाओं के अश्लील फोटो या वीडियो हासिल कर उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में अपराधी फोटो के साथ छेड़छाड़ करते हैं और बदनाम करने, परेशान और ब्लैकमेल करने के लिए उनका इस्तेमाल करता है। इस तरह के अपराधों में आईटी एक्ट की धारा-67 और 67ए के अंतर्गत आते हैं। चौथी कैटेगरी साइबर बुलिंग की है। इसमें साइबर अपराधी पहले महिलाओं या लड़कियों से दोस्ती बनाते हैं और फिर उन्हें विश्वास में लेकर नजदीकियां बढ़ाने के बाद महिला या लड़की के निजी फोटो हासिल कर लेते हैं। इसके बाद पीडि़ता से मनचाहे काम करवाने के लिए ब्लैकमेल करते हैं। आईटी एक्ट के तहत ये सभी दंडनीय अपराध हैं। यदि कोई युवा या युवती इनमें से किसी भी कैटेगरी के अपराध से परेशान हैं, तो इसकी शिकायत की जा सकती है। सोशल मीडिया पर इस तरह के अपराध को रोकने के लिए कई कानूनी प्रावधान किए गए हैं। आईपीसी की धारा-507 के तहत कोई भी महिला अभद्र व्यवहार, अश्लील टिप्पणी करने वाले के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज करा सकती है।

इसकी धारा में ‘गुमनाम’ को भी शामिल करने से ऑनलाइन इस तरह के अपराध करने वालों को भी पकड़ा जा सकता है। इस धारा के तहत मामला दर्ज होने के बाद पुलिस की जिम्मेदारी होगी कि वह आरोपी को पहचानकर पकड़े। आईपीसी की धारा-499 में किसी के खिलाफ  कोई ऐसा शब्द इस्तेमाल करना, कोई तस्वीर दिखाना या किसी और तरह की कोई ऐसी हरकत करना जिससे किसी की प्रतिष्ठा खराब होती है, उसके खिलाफ  कार्रवाई की जा सकती है। धारा-509 के तहत महिला की प्रतिष्ठा के खिलाफ  किसी भी तरह की गलत हरकत पर इस धारा के तहत मामला दर्ज कराया जा सकता है। आईपीसी की धारा-354ए, 354डी दिल्ली में हुए शर्मनाक निर्भया मामले के बाद जोड़ी गई थीं। इसमें किसी भी तरह के महिला उत्पीड़न के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की इन धाराओं को शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन भी किसी तरह के गलत व्यवहार के खिलाफ  कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में अब समाज को साइबर शिक्षा की महत्ती जरूरत है। सबसे पहले तो हर किसी को अपनी सुरक्षा खुद ही सुनिश्चित करनी होगी। सोशल मीडिया पर तमाम तरह के प्राइवेसी फीचर हैं। इसके जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में शिकायत की प्रक्रिया को आसान बनाने की लगातार कोशिश की जानी चाहिए, जिससे लोग ऐसी घटनाओं को छिपाने के बजाय सामने लाएं।

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