Saturday, August 15, 2020 10:42 PM

सोने का घटता आयात : डा. जयंतीलाल भंडारी, विख्यात अर्थशास्त्री

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री

ऐसे में जो लोग बचत को निवेश करने के लिए सोना खरीदते हैं, उन्हें सरकार के द्वारा सोने की भौतिक खरीददारी से बचाते हुए स्वर्ण बॉन्ड के विकल्प की ओर प्रवृत्त करने हेतु हरसंभव प्रयास करना चाहिए। बचत को सोने में निवेश करने वालों के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के अलावा सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड भी लाभप्रद हैं। वस्तुतः इन दो विकल्पों ने भौतिक रूप में सोना खरीदने की जरूरत खत्म कर दी है और ये अपनी आकर्षक विशेषताओं के कारण ऐसे निवेश उत्पाद बन गए हैं, जिनमें भौतिक सोने के साथ पैदा होने वाला भावनात्मक जुड़ाव आड़े नहीं आता है। स्वर्ण बॉन्ड में निवेश पर सरकार ने कई तरह की रियायतों की घोषणा की है, जिससे इसमें निवेश ज्यादा फायदेमंद बन गया है। निश्चित रूप से कोविड-19 की त्रासदी पूर्ण आर्थिक चुनौतियों के बीच वर्ष 2020 में चाहे सोने की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सोने के आयात में भारी कमी आई है…

एक ओर जहां वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में भारी तेजी के कारण भारतीय सराफा बाजार में भी सोने की कीमत 50 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से भी अधिक की रिकॉर्ड ऊंचाई को पार करते हुए दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर सोने का आयात घटते हुए दिखाई दे रहा है। कोविड-19 की चुनौतियों और वैश्विक मंदी के बीच सोने का आयात घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद है। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार पिछले माह जून 2020 में देश में सोने का आयात करीब 11 टन रहा है। जबकि जून 2019 में देश में सोने का आयात करीब 78 टन हुआ था। यदि हम सोने के आयात को मूल्य के संदर्भ में देखें तो पाते है कि पिछले माह जून 2020 में देश में करीब 61 करोड़ डॉलर मूल्य के सोने का आयात हुआ है, जबकि जून 2019 में 270 करोड़ डॉलर मूल्य का सोना आयात किया गया था। ज्ञातव्य है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता देश है तथा भारत अपनी अधिकांश स्वर्ण मांग आयात के जरिए पूरी करता है। देश के आयात बिल में सोने के आयात का प्रमुख स्थान है।

वित्त वर्ष 2018-19 में सोने का आयात करीब 33 अरब डॉलर मूल्य का रहा था, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सोने का आयात करीब 31 अरब डॉलर मूल्य का रहा है। सोने के आयात में कमी से देश के व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिल रही है। यकीनन इस समय दुनिया में सोने की कीमतें आसमान छूती हुई दिखाई दे रही हैं। कोविड-19 के बीच ढहती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था में दुनिया के लोग कोरोना वायरस की दूसरी लहर की आशंका, अमरीका में ब्याज दर का शून्य पर पहुंचना और भारत-चीन सैन्य तनाव सहित वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सोने की खरीदी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। कोरोना संकट से होने वाले आर्थिक नुकसान से निपटने के लिए विभिन्न देशों ने आर्थिक पैकेजों का ऐलान किया है। इससे भी विभिन्न देशों की मुद्राओं की कीमत घटी है और डॉलर की तुलना में सोने का महत्त्व बढ़ गया है। यही कारण है कि दुनिया के संस्थागत निवेशक सोने की बड़े पैमाने पर खरीदी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यद्यपि दुनिया के साथ-साथ भारत में भी सोने के दाम ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। इन दिनों भारत में सोने के दाम बढ़कर 50 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के स्तर के आसपास की ऊंचाई पर दिखाई दे रहे हैं। सोने की अधिक कीमत हो जाने के कारण देश के लोगों के द्वारा नए सोने की मांग अधिक नहीं बढ़ी है। स्वर्ण विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 के कारण इस वर्ष 2020 में नए सोने की मांग करीब 30 प्रतिशत घटने की संभावना है। साथ ही इस वर्ष देश में नए सोने की बिक्री पिछले 25 साल की तुलना में सबसे कम रहने की संभावना है। स्थिति यह है कि देश में पुराने सोने तथा पुराने गहनों की बिक्री सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। देश में लोग शादी-विवाह, पारिवारिक और सामाजिक कार्यों के लिए पुराने सोने को पिघलाकर यानी रिसाइक्लिंग करके उसका उपयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2019 में देश में सोने की खपत करीब 690 टन रही। स्वर्ण विशेषज्ञों का मत है कि इस वर्ष 2020 में कोविड-19 के बीच देश में सोने की मांग और घटकर 500 टन से भी कम हो सकती है।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि चालू वर्ष 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन, अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर कई प्रतिबंध और आसमान छूती कीमतों के कारण सोने की मांग में भारी कमी के परिणामस्वरूप देश में सोने के आयात में भी तेजी से कमी आई है। हमारे देश में निवेश के चार बड़े साधन माने जाते रहे हैं। सोना, संपत्ति, शेयर तथा बचत योजनाएं। पिछले एक दशक में सोने का प्रतिफल अन्य सभी निवेश माध्यमों से अधिक रहा है। सोना निवेशकों के लिए भरोसेमंद बना हुआ है। यदि हम सोने की लगातार बढ़ती हुई कीमतों को देखें तो पाते हैं कि जनवरी 2018 में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 30 हजार रुपए थी। यह जनवरी 2019 में करीब 32500 रुपए हो गई। फिर यह जनवरी 2020 में करीब 39100 रुपए हो गई और अब जुलाई 2020 के पहले सप्ताह में 50 हजार रुपए के आसपास दिखाई दे रही है। देश के स्वर्ण विशेषज्ञों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017 में सोने के निवेशकों को लगभग 5.67 प्रतिशत का लाभ मिला था।

फिर यह बढ़कर 2018 में करीब 8.24 प्रतिशत और 2019 में 24.58 प्रतिशत रहा है। जबकि चालू वर्ष 2020 के जनवरी से जून माह के छह महीनों में सोने में निवेशकों का लाभ बढ़कर लगभग 25 प्रतिशत रहा है। चूंकि चालू वर्ष 2020 में सोने की कीमतें अत्यधिक ऊंचाई पर हैं, अतएव इस संपूर्ण वर्ष में सोने में निवेश पर रिटर्न 50 प्रतिशत से अधिक ऊंचाई पर जा सकता है। सोने में निवेश पर अच्छा रिटर्न पाने का रुझान आगामी दो-तीन वर्षों में भी देखने को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि भारत में सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कई कारण हैं। भारत सोने से पारिवारिक, व्यावसायिक, परंपरागत और धार्मिक विभिन्न रूपों से जुड़ा हुआ है। यह शताब्दियों से भारत में बचत और सामाजिक सुरक्षा का आधार भी रहा है। भारत में सोना शादी-ब्याह और विशेष कार्यक्रमों के समय परिवारों की जरूरत है। सोने के आभूषण पहनना भारतीय संस्कृति  का अंग भी है। बड़ी संख्या में लोग मंदिरों में सोना धार्मिक आस्था की वजह से भी चढ़ाते हैं। कई प्राचीन मंदिरों में सोना आभूषणों, सिल्लियों और सिक्कों के रूप में सदियों से संरक्षित है। यद्यपि सोना भारतीय परिवारों और भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, लेकिन बचत के लिए भौतिक सोने की खरीदी अनुत्पादक निवेश है। ऐसे में जो लोग बचत को निवेश करने के लिए सोना खरीदते हैं, उन्हें सरकार के द्वारा सोने की भौतिक खरीददारी से बचाते हुए स्वर्ण बॉन्ड के विकल्प की ओर प्रवृत्त करने हेतु हरसंभव प्रयास करना चाहिए। बचत को सोने में निवेश करने वालों के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के अलावा सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड भी लाभप्रद हैं। वस्तुतः इन दो विकल्पों ने भौतिक रूप में सोना खरीदने की जरूरत खत्म कर दी है और ये अपनी आकर्षक विशेषताओं के कारण ऐसे निवेश उत्पाद बन गए हैं, जिनमें भौतिक सोने के साथ पैदा होने वाला भावनात्मक जुड़ाव आड़े नहीं आता है। स्वर्ण बॉन्ड में निवेश पर सरकार ने कई तरह की रियायतों की घोषणा की है, जिससे इसमें निवेश ज्यादा फायदेमंद बन गया है। निश्चित रूप से कोविड-19 की त्रासदी पूर्ण आर्थिक चुनौतियों के बीच वर्ष 2020 में चाहे सोने की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सोने के आयात में भारी कमी से देश के व्यापार घाटे में भी कमी आते हुए दिखाई दे रही है। निःसंदेह सोने के आयात में कमी अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद परिदृश्य है और इससे देश की चरमराती हुई अर्थव्यवस्था को एक बड़ी राहत मिलेगी।

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