Sunday, March 07, 2021 11:29 PM

 तीसरे चरण में छात्रों को मिले प्राथमिकता : राजीव पठानिया, लेखक नूरपुर से हैं

पिछले लगभग एक वर्ष से पूरे विश्व को कोरोना महामारी ने बुरी तरह से घेर रखा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। भारत में एक करोड़ से भी अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और डेढ़ लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्ष 2020 में इस महामारी ने देश के हर नागरिक को कहीं न कहीं परेशान करके रखा। नए वर्ष के शुरू में ही देश के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत रंग लाई और इस महामारी से बचने के लिए वैक्सीन तैयार कर ली गई। इतने बड़े देश में हर व्यक्ति के टीकाकरण के लिए सरकार ने भी बड़े पैमाने पर तैयारी कर ली है, जिसे चरणबद्ध तरीके से देश के हर नागरिक तक पहुंचा जाएगा। इस टीकाकरण महाभियान का शुभारंभ देश के प्रधानमंत्री ने 16 जनवरी को कर दिया है। इस  अभियान के पहले चरण में तीन करोड़ स्वास्थ्य कर्मचारी (डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल और स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारी) तथा फ्रंटलाइन वर्कर्स (पुलिस कर्मचारी, पैरामिलिट्री फोर्सेज, फ़ौज व सेनेटाइज़ैशन वर्कर्स) को यह वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके दूसरे चरण में 50 साल से ऊपर उम्र वाले और 50 साल से कम उम्र वाले उन लोगों को जो किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, को वैक्सीन लगाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ऐसे लोगों की संख्या 27 करोड़ के लगभग है।

इस महामारी में सबसे अधिक प्रभावित लोगों में स्कूल व कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी हैं, जोकि पिछले लगभग एक वर्ष से अपने घरों में ही बंद हैं। अब विभिन्न राज्यों की सरकारें स्कूलों व कॉलेजों को खोलने का निर्णय ले रही हैं। हमारे देश में शिक्षा के क्षेत्र में कोई बहुत बढि़या आधारभूत ढांचा नहीं है तथा कोविड-19 के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए भी कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जब स्कूल व कॉलेज खुलेंगे तब हर जगह तथा बसों में भीड़ भी होगी तथा कोरोना के फैलने का खतरा और भी बढ़ जाएगा। किसी एक भी शिक्षा संस्थान में अगर एक भी कोरोना संक्रमित पाया जाएगा तो अभिभावकों में डर की भावना पैदा होना स्वाभाविक है। सरकार को चाहिए कि वैक्सीन के तीसरे दौर में स्कूल व कॉलेज जाने वाले छात्रों व अध्यापकों को प्राथमिकता दे ताकि कोरोना के दोबारा फैलने के खतरे से बचा जा सके और शिक्षण संस्थान सुचारू रूप से चल सकें। ऐसा करके ही हम कोरोना वायरस को फैलने से रोक सकते हैं। साथ ही यह भी जरूरी है कि वैक्सीन आ जाने के कारण लोग लापरवाह न हों, वे पहले की तरह ऐहतियात बरतते रहें।