Saturday, September 19, 2020 08:44 PM

सुंडियों ने बोला मक्की की फसल पर हमला

नालागढ़-मैदानी इलाकों में मक्की की फसल पर सुंडियों के हमले से किसान परेशान होकर रह गए हैं। क्षेत्र में करीब 15 फीसदी मक्की की फसल को नुकसान हो चुका है। कृषि विभाग के मुताबिक यदि बारिशें होती रहे तो सुंडियों के हमले की रफ्तार में गिरावट आ जाती है, लेकिन क्षेत्र में मानसून का महीना होने के बावजूद बहुत कम बारिशें हो रही है, जिससे सुंडियों के हमले की अधिक प्रबलता बढ़ गई है। सुंडियों के हमले के चलते कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा करके स्थिति का जायजा भी लिया है।

जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती का कार्य किया जाता है, जिसमें से 3500 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की फसल की पैदावार होती है, लेकिन सुंडियों के आक्रमण के कारण मक्की की फसल को 15 फीसदी नुकसान पहुंच चुका है। यदि बारिशें नहीं हुई तो सुंडियों का हमला तेज हो जाएगा, जिससे किसानों की आर्थिकी को नुकसान वहन करना होगा। बता दें कि मक्की की फसल पर अमरीका फाल आर्मीवर्म (सुंडियों) के आक्रमण की पुष्टि कृषि विभाग द्वारा की गई है। विभाग के मुताबिक यह कीट रात के समय सक्रिय होता है और इसका जीवन चक्र 30 दिन का है। मादा पतंगा 1000-1500 अंडे दो-तीन हफ्तों में पत्तों पर देती है।

इनका रंग भूरा, पंख सफेद होते हैं और यह अंडे से व्यस्क तक छह स्तरों पर विकसित होता है। इसके व्यूपा मिट्टी में व्यक्त बनने तक रहता है। कृषि विभाग नालागढ़ के कृषि विशेषज्ञ डा. प्रेम ठाकुर ने बताया कि सूंडियों के हमले से क्षेत्र की करीब 15 फीसदी मक्की की फसल को नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि यदि बारिशें लगातार होती है तो इसका हमला कम हो जाएगा, अन्यथा यह फसल को और अधिक प्रभावित करेगा।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने पाया कि इस कीट में किसी भी प्रकार के कीटनाशी के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित करने की क्षमता होती है। इसके निष्पादन के लिए कोटाजीन 0.4 मिली, छह मिली पानी में मिलाकर सुबह-शाम छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसान तीखी मिर्च से निर्मित ताजा अग्निअस्त्र 800 मिली पंप से तीन दिन के पश्चात दशवर्णी अर्क 800 मिली स्प्रे करें। इसके साथ ही लकड़ी से बनी चूल्हे की राख प्रभावित पौधों में अंदर तक डालें व पानी डालें। गुड़ मिला हुआ पानी छिड़कने से  चींटियां लावा को खा जाती है। ट्राइकोग्रामा का प्रयोग भी लाभकारी रहेगा। इसके अलावा फेरोमैन ट्रैप चार प्रति बीघा में लगाएं।

 

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