Sunday, May 09, 2021 06:57 PM

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन पर केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

हिजड़ों से सामाजिक भेदभाव और उनके उत्पीड़न का मसला उठाने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि हिजड़ा समुदाय की समस्याओं को देखने के लिए कोर्ट सरकार को किन्नर वेलफेयर बोर्ड बनाने का आदेश दे। हिजड़ा मां एकसामाजिक संस्था ट्रस्ट नाम की संगठन की तरफ से दाखिल याचिका में हिजड़ा वर्ग से जुड़ी कई समस्याओं को उठाया गया है। याचिकाकर्ता संगठन ने कहा है कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी तमाम सुविधाएं हिजड़ों को आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं।

उनके शोषण और यौन उत्पीड़न की घटनाओं को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद हिजड़ों को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण नहीं दिया। मामला सोमवार को चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बैंच के सामने लगा। चीफ जस्टिस ने माना कि विषय संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि मामला निश्चित रूप से संवेदनशील है, लेकिन क्या संसद ने हिजड़ा वर्ग की समस्याओं के समाधान के लिए एक कानून नहीं बना दिया है? संगठन के वकील ने जवाब दिया कि संसद ने 2019 में दि ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) ऐक्ट बनाया है, लेकिन इसमें हिजड़ों के संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं। वकील ने कहा कि हिजड़ों से जुड़े मसलों को देखने के लिए हर राज्य में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन से बड़ी मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि विधानसभा को इस तरह के बोर्ड के गठन का कानून बनाने की शक्ति हासिल है। तमिलनाडु, असम और यूपी ने इस तरह के बोर्ड का गठन किया है। इस दलील के बाद कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर दिया।