Sunday, November 29, 2020 07:06 AM

 बाड़ ही निगल गई खेत संरक्षण योजना

कृषि मंत्री के जिला में किसान को मचान से नहीं उतार पाई स्कीम डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों ने कृषि विभाग के पास किए थे आवेदन

गगरेट-किसानों की आर्थिक दशा सुधारने का दावा कर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि विधेयक किसानों की कितनी दशा सुधारने हैं, ये तो आने वाला समय ही बता पाएगा, लेकिन जो योजनाएं किसानों की दशा सुधारने के लिए धरातल पर उतारी गई हैं। अगर वे भी औंधे मुंह गिरें, तो इसे क्या कहेंगे? आवारा पशुओं व जंगली जानवरों से किसान की फसल की रक्षा के लिए लाई गई मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना भी किसान को मचान से नीचे नहीं उतार पाई है।

कृषि मंत्री के जिला में इस योजना का हश्र यह है कि डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों द्वारा इस योजना के तहत कृषि विभाग के पास आवेदन किए हैं, लेकिन कृषि विभाग बजट न होने का राग अलाप कर किसानों को सांत्वना देने से अधिक कुछ नहीं कर पा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि किसान हित के लिए लाई जाने वाली योजनाएं क्या सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए ही हैं। हिमाचल प्रदेश में किसान आवारा पशुओं व जंगली जानवरों से हो रहे फसलों के नुकसान पर किस कद्र आंसू बहाने पर विवश हैं यह किसी से छुपा नहीं है। फसलों की बिजाई से लेकर कीटनाशक व खाद पर जितना किसान का खर्च हो रहा है उतना उत्पादन किसान महज इसलिए नहीं ले पा रहा है, क्योंकि आवारा पशुओं व जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा का किसान के पास कोई सटीक प्रबंध ही नहीं है। इसी बीच प्रदेश सरकार किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना लेकर आई थी। जिस पर अस्सी फीसदी अनुदान भी प्रस्तावित है। योजना के तहत अगर कृषि विभाग द्वारा पंजीकृत कंपनी से किसान सोलर फेंसिंग करवाना चाहता है तो उसे अस्सी फीसदी अनुदान मिलेगा और अगर किसान खुद खेत की जालबंदी या तारबंदी करना चाहता है तो उसे पचास प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।

जिला ऊना में कृषि प्रमुख पेशा है और यहां के किसान, गेहूं, मक्की, गन्ना, आलू के साथ कई नकदी फसलें व सब्जी उत्पादनभी करते हैं। जिला में इतने अनाज का उत्पादन किया जाता है कि जिला ऊना ही समूचे प्रदेश की खाद्यान्न संबंधी जरूरतें पूरी करने में सक्षम है, लेकिन यहां किसानों को क्या समस्याएं आ रही हैं शायद इस ओर कृषि विभाग का भी ध्यान नहीं है। आवारा पशुओं से किसानों को निजात दिलाने के लिए जयराम सरकार के सत्तासीन होते ही जिले में गौ अभ्यारण्य स्थापित करने को भी कदमताल शुरू हुई लेकिन ये गौ अभ्यारण्य भी अनिश्चितता के कोहरे में गुम हो गए और अब मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के नाम पर कृषि मंत्री के जिले में यह उदासीनता किसानों  के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा ही है। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. अतुल डोगरा का कहना है कि मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत अभी तक बजट नहीं आया है। उन्होंने नवंबर माह में बजट उपलब्ध होने की उम्मीद जताई है।

योजना में अस्सी फीसदी अनुदान भी प्रस्तावित

फसल की बिजाई से लेकर कीटनाशक व खाद पर जितना किसान का खर्च हो रहा है ,उतना उत्पादन किसान महज इसलिए नहीं ले पा रहा है, क्योंकि आवारा पशुओं व जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा का किसान के पास कोई सटीक प्रबंध ही नहीं है। इसी बीच प्रदेश सरकार किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना लेकर आई थी। जिस पर अस्सी फीसदी अनुदान भी प्रस्तावित है। योजना के तहत अगर कृषि विभाग द्वारा पंजीकृत कंपनी से किसान सोलर फेंसिंग करवाना चाहता है तो उसे अस्सी फीसदी अनुदान मिलेगा और अगर किसान खुद खेत की जालबंदी या तारबंदी करना चाहता है, तो उसे पचास प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।

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