Friday, September 24, 2021 08:27 AM

तीसरी लहर लगभग तय

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान और संक्रामक  रोगों के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा का आकलन है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर अगस्त माह के अंत तक आ सकती है और यह लहर देशव्यापी होगी। हररोज़ एक लाख संक्रमित मरीज दर्ज करने पड़ सकते हैं। यह संभावित लहर दूसरी लहर जैसी भयावह और जानलेवा होगी, इसके आसार कम हैं, क्योंकि अभी कुछ कारकों के अध्ययन किए जाने शेष हैं। कुछ शोध और डाटा भी अभी सामने आने हैं, लेकिन तीसरी लहर का आना इसलिए तय-सा लगता है, क्योंकि औसत व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। पहली दो लहरों में जो औसतन इम्युनिटी बनी थी, वह या तो बेहद कम हो रही है अथवा वायरस से लड़ने में प्रभावी नहीं रही है। डॉक्टरों के राष्ट्रीय संगठन आईएमए का आकलन कुछ ज्यादा डराने वाला है। उसका आकलन है कि हररोज़ करीब 5 लाख संक्रमित मरीज दर्ज किए जा सकते हैं। तीसरी लहर की ऐसी संभावनाएं बन रही हैं। यह आंकड़ा दूसरी लहर के ‘चरम’ से काफी ज्यादा है। आईसीएमआर और आईएमए के विश्लेषणों और आकलनों के बीच बहुत गहरे फासले हैं, लिहाजा किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

 विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बयान जारी किया है कि तीसरी लहर शुरुआती चरण में है। कोरोना संक्रमण में 9 सप्ताह तक गिरावट दर्ज की जाती रही, लेकिन अब फिर संक्रमण फैल रहा है, लिहाजा मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। अमरीका के कुछ हिस्सों में मास्क पहनने में ढील दी गई थी। लोगों ने मास्क उतारने शुरू कर दिए थे, नतीजतन करीब 500 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं। भारत भी कोविड की तीसरी लहर के करीब है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इतना जरूर आगाह किया है कि तीसरी लहर को फिलहाल नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ विशेषज्ञों के आकलन हैं कि तीसरी लहर का आना तय है, लेकिन उसके घातक प्रभाव सितंबर तक स्पष्ट हो सकते हैं। नई लहर के बुनियादी कारण हैं कि भारत में टीकाकरण की गति बेहद धीमी है। हालांकि 40 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं, लेकिन करीब 6.5 फीसदी आबादी को ही टीके की दोनों खुराकें दी गई हैं। एक खुराक लेने वालों का औसत करीब 25 फीसदी है, लेकिन संक्रमण रोकने में यह अपेक्षाकृत कम असरदार साबित होगा। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चिंताजनक स्थिति बताई है कि टीकाकरण बेहद कम हुआ है। अभी भारत ‘हर्ड इम्युनिटी’ से बहुत दूर है, नतीजतन कोरोना वायरस के नए प्रकार औसत व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हावी हो सकते हैं और वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। इधर भारत के पड़ोस में इंडोनेशिया में 43 फीसदी, थाईलैंड में 38 फीसदी, मलेशिया में 45 फीसदी, म्यांमार में 48 फीसदी और वियतनाम में 130 फीसदी कोविड मामले बढ़े हैं। इजरायल, बांग्लादेश और रूस में भी हालात खराब हैं। रूस का स्पूतनिक-वी टीका कई देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है और सफल भी बताया जा रहा है, उसके बावजूद रूस में संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के मुताबिक कोरोना के नए वेरिएंट 10-16 फीसदी की तेजी से फैल रहे हैं।

 बीते सप्ताह में करीब 30 लाख केस बढ़े हैं और 55,000 मौतें हुई हैं। ये सामान्य आंकड़े नहीं हैं। भारत में संक्रमित केस 4 लाख से ज्यादा, एक ही दिन में, होते थे, लेकिन अब भी 40,000 के आसपास आंकड़े रहते हैं। स्थितियां स्थिर नहीं हो पा रही हैं और न ही संक्रमण 30,000 रोज़ाना से कम हुआ है। मौतें भी 500 से ज्यादा हररोज़ आ रही हैं। यदि इनमें पुरानी मौतें शामिल कर दी जाएं, तो आंकड़े कई गुना बढ़ जाते हैं। अब भी दूसरी लहर जारी है, लेकिन कम टीकाकरण के साथ आम आदमी की लापरवाही और मौज-मस्ती भी शुरू हो गई है। इस बीच प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर राज्यों समेत कुछ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी वर्चुअल संवाद कर उन्हें बढ़ते कोरोना के प्रति सचेत किया है। केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक आदि राज्यों में कोविड के 80 फीसदी से ज्यादा केस आ रहे हैं और मौतें भी करीब 84 फीसदी हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को चेताया है, क्योंकि यही राज्य तीसरी लहर के आगमन को सुनिश्चित करने में लगे हैं। लगता है कि हम, सरकार और व्यवस्था अभी से डरना शुरू कर दें, क्योंकि हम अभी तक बच्चों में टीकाकरण शुरू नहीं कर सके हैं। टीका ही नहीं बना है और न ही विदेश से आयात किया जा सका है।