Sunday, November 28, 2021 05:14 PM

आज तक किसी भी सरकार ने नहीं समझा विस्थापितों का दर्द

निजी संवाददाता- राजा का तालाब पौंग बांध विस्थापित संघर्ष समिति (रजि.) के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने बुधवार को राजा का तालाब में पत्रकारों के समक्ष अपना रोष व्यक्त करते हुए बताया कि असहाय पौंग बांध विस्थापित किसानों का दर्द आज तक किसी सरकार नहीं सुना, जिन्होंने करीब 60 वर्ष पूर्व देश के विकास के लिए अपनी भूमि और आशियाने राष्ट्र हित में कुर्बान किए थे । इतना ही नहीं, हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी संवैधानिक रूप से स्वीकारा था कि यदि कोई पौंग बांध विस्थापित परिवार गंगानगर में आरक्षित भूमि से वंचित रह जाता है, तो उनका प्रदेश में भूमि देकर पुनर्वास किया जाएगा, लेकिन बावजूद इसके विस्थापितों को न तो उनका हक मिला और न ही अभी तक उनका पुनर्वास किया गया, बल्कि बदले में राजस्थान सरकार द्वारा एकतरफा फैसला लेते हुए दिनांक 27 फरवरी 2019 को राजस्थान आबंटन नियमों में संशोधन कर उपायुक्त राहत एवं पुनर्वास राजा का तालाब को निर्देशित किया गया कि विस्थापितों को राजस्थान में भूमि आबंटन के पात्रता प्रमाण पत्र जारी न किए जाएं और न ही आबंटन फाइलें राजस्थान सरकार को भेजी जाएं ।

राजस्थान सरकार ने इस संशोधन के उपरांत भूमि आबंटन की जो 1387 फाइलें उन्हें भेजी गई थीं, उनको भी अब उपायुक्त कार्यालय राजा का तालाब को वापस कर दिया है , लेकिन राजस्थान सरकार के इस निर्णय का किसी भी स्तर पर कोई विरोध नहीं हुआ, जबकि उक्त संशोधन असंवैधानिक है । समिति के अध्यक्ष ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कलेक्टर द्वारा भूमि अधिनियम की धारा-11 के तहत विस्थापितों की भूमि पर किया गया अवार्ड इस शर्त के साथ घोषित किया था कि विस्थापितों को पहले गंगानगर की आरक्षित भूमि में सभी मूलभूत सुविधाएं सहित बसाया जाने के बाद ही विस्थापितों की अधिग्रहत भूमि का कब्जा भाखड़ा ब्यास प्रबंधक बोर्ड बीबीएमबी को मिल सकेगा, जो कि एक संवैधानिक शर्त है। बदले में राजस्थान सरकार का संशोधन इसको प्रमाणित नहीं कर सकता है, जो कि गैर कानूनी व असंवैधानिक है । इस संशोधन पर हमारी प्रदेश सरकार मूकदर्शक बनी हुई है ।