Thursday, January 28, 2021 01:53 PM

…तो कैसे करेंगे अमूल का मुकाबला; प्रदेश मिल्कफेड को कर्मचारियों की दरकार, अब आधे ही रह गए मुलाजिम

अमूल के साथ मुकाबला करने का सपना देखने वाली हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड आखिर कैसे आगे बढ़ेगी, जब उसके पास काम करने वाले ही नहीं हैं। प्रदेश सरकार चाहती है कि मिल्कफेड को ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए और उसके माध्यम से किसानों को राहत प्रदान की जाए, मगर यह कैसे संभव होगा, इसे लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं। मिल्कफेड में तकनीकी कर्मचारियों के पद न भरे जाने की स्थिति में सरकार को इसका संचालन करना मुश्किल हो गया है।

फेडरेशन में कर्मचारियों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 400 से अधिक कर्मचारियों की संख्या वाले सरकार के इस उपक्रम में वर्तमान में दो सौ के करीब कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इनमें से भी अधिकांश आगामी दो सालों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। कर्मचारियों के बगैर मिल्क फेडरेशन के कायाकल्प करने की सरकार की योजनाएं फाइलों में ही दफन होकर रह जाएंगी, यह तय है।

 गत साल जहां सरकारी विभागों ने भी दीपावली के मौके पर तैयार की गई मिल्क फेडरेशन की मिठाइयां खरीदी थी, वहीं इस बार कोरोना संक्रमण के चलते ऐसा नहीं हुआ। बावजूद इसके फेडरेशन ने गत साल के 380 क्विंटल से अधिक करीब 410 क्विंटल मिठाइयां बेचीं। मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष निहाल चंद के अनुसार बेशक मिल्क फेड में कर्मचारियों की कमी है, मगर सरकार ने 103 पदों का सृजन इसके लिए किया है। कोरोना काल में फिलहाल इन पदों को नहीं भरा जा सका है। जल्द ही खाली पदों को भरा जाएगा।

एक लाख 36 हजार लीटर दूध का संग्रहण

1982 में अस्तित्व में आए प्रदेश मिल्क फेडरेशन में प्रारंभ में 410 कर्मचारी थे, मगर वर्तमान में कर्मचारियों की संख्या  इससे आधी रह गई है, जबकि 1982 में दस हजार लीटर दूध का काम करने वाली फेडरेशन वर्तमान में करीब एक लाख 36 हजार लीटर दूध का संग्रहण किसानों से कर रही है। करीब 35 हजार लीटर दूध फेडरेशन रोजाना बाजार में बेच रही है। केंद्र सरकार ने प्रदेश दूध प्रसंघ के लिए शिमला व मंडी में दो नए प्लांट भी मंजूर कर दिए हैं। इन दोनों प्लाटों की क्षमता करीब एक लाख लीटर दूध के संग्रहण कर चिलिंग की होगी, मगर कर्मचारियों के बगैर मिल्क फेडरेशन को चलाना प्रबंधकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

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