Thursday, December 03, 2020 04:00 AM

..तो कानपुर के दक्षिण छोर सा प्रदूषित हो जाएगा बिलासपुर

गोबिंदसागर झील में सीवरेज-कूड़े के ढेर देख उठ रहे सवाल

क्या कानपुर में गंगा के दक्षिणी छोर की तरह बिलासपुर शहर भी प्रदूषित हो जाएगा। झील में हर दिन मिल रही गंदगी व कचरे के कारण यह सवाल उठना लाजिमी है। यह बात अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि बिलासपुर का लुहणू ग्राउंड अपने आप में कई तरह की कहानियों को संजोए हुए है। सतलुज या गोबिंदसागर रेजरवायर के किनारे बसा यह ग्राउंड जहां नलवाड़ी मेले का प्रमाण है, वहीं हिमाचल का सबसे बड़ा क्रीडास्थल भी है। यहां क्रिकेट से लेकर एथलेटिक्स तक खेल, साहसिक खेल क्रियाएं, बड़ी राजनीतिक रैलियां, बड़े धार्मिक समागम, हेलिकॉप्टर से अति विशिष्ट व्यक्तियों का आना-जाना सभी इसी सतलुज के तट के किनारे से होता है। बड़ोलधार, औहर, कोटधार व भाखड़ा जाने वाले लोगों का पथ भी यही रहता है। इसके अलावा बिलासपुर शहर के बाशिंदे टहलते हुए व खिलाड़ी भी सुबह-शाम यही मिलते हैं, लेकिन अब पूरे शहर का सीवरेज व गंदगी इस लुहणू ग्राउंड से होते हुए गोबिंदसागर झील में डाली जा रही है।

 इससे वह दिन अब दूर नहीं कि इस सतलुज का भी वही हाल हो जाए, जैसे गंगा के दक्षिणी छोर का कानपुर में हो चुका है। एक तरफ जहां नदियों को हमारे यहां प्रकृति या देवी रूप मान कर पूजा जाता है, वहीं, दूसरी तरफ शहर का पूरा सीवरेज व गारबेज यहां टेंपरेरी रूप से दबाकर प्रशासन या नगर परिषद अपना पल्ला झाड़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन की दुहाई देने वाले प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर किसी की जिम्मेदारी क्यों तय नही की। क्यों किसी प्रशासनिक अधिकारी ने अब तक संज्ञान नहीं लिया, क्यों अभी तक यहां बायो वेस्ट प्लांट या बायो हज़्डेर्सियस सिस्टम की रूपरेखा तय नहीं की गई, क्यों अभी तक यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था नहीं हो पाई। क्या सीवरेज व गारबेज की व्यवस्था देखने वाला प्रशासन यह इंतजार कर रहा है कि विस्थापितों के शहर बिलासपुर का कोई बाशिंदा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को अपने शहर की नदी सतलुज की व्यथा लिखे। यदि स्थिति ऐसी ही रही कि यदि आने वाले चार-पांच साल तक इस झील में फेंके जाने वाले सीवरेज और गारबेज पर कोई योजना नहीं बनाई गई, तो शहर के रोड़ा सेक्टर, बस स्टैंड व डियारा सेक्टर के लोगों को बदबू में रहना पड़ सकता हैं।

प्रशासन चुप क्यों

यह मसला कांग्रेस के जिला महासचिव संदीप सांख्यान ने नौ सितंबर, 2020 को गोबिंदसागर झील में फैल रही सीवरेज की गंदगी और सॉलिड वेस्ट को लेकर उठाया था, लेकिन दुख की बात यह है कि अभी तक जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार चुप है। प्रश्न अब भी ज्वलंत है कि क्या प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के जुर्माना लगाने से बिलासपुर शहर की समस्या निपट गई या फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुर्माना लगाकर अपनी कारगुजारी से पल्ला झाड़ लिया है।

अब तक पूरा नहीं हो पाया फोरलेन का काम

वर्ष 2013 से कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का काम शुरू हुआ था, जो अब तक भी पूरा नहीं हो पाया है। फोरलेन और रेलवे के द्वारा किए जा रहे कामों से जो मिट्टी खड्डों, नालों व सतलुज में डाली जा रही है वह सरासर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है, जो कि बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यदि प्रदेश सरकार इस मसले पर संज्ञान नहीं लेती, इसकी स्वच्छता के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को भी लिखा जाएगा, जरूरत पड़ी तो प्रदेश के उच्च न्यायालय में पब्लिक इंट्रस्ट लिटिगेशन भी डाली जाएगी और आंदोलन भी किया जाएगा।

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