Monday, October 26, 2020 05:58 PM

प्रदेश मेें आईटी पार्क का सच: लतेश भार्गव, लेखिका मंडी से हैं

लतेश भार्गव

लेखिका मंडी से हैं

इस योजना को धरातल पर उतरते देख चिंतित मां-बाप भी यह सोच खुश हो गए कि अब उनके पढ़े-लिखे इंजीनियर बेटा-बेटी को अपना राज्य छोड़कर रोजगार के लिए बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। परंतु सब बातें तब निराधार हो जाती हैं, जब वर्ष 2020 की समाप्ति होने को है, मगर इन दोनों आईटी पार्क के शिलान्यास होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं हुई है। इससे जनता के मन में प्रश्न उठते हैं कि क्या सरकार सिर्फ वोट इकट्ठा करने के लिए बेरोजगार युवाओं को प्रलोभन दे रही है या सरकार इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि वैकेंसी का लालच देकर सिर्फ युवाओं के मन से खेल रही है? मौजूदा समय में यदि नजर दौड़ाई जाए तो आईटी इंडस्ट्री इस समय सबसे ताकतवर है…

हिमाचल प्रदेश में आईटी पार्क का नाम सुनकर पहली बार शायद हर कोई अचंभित व आश्चर्यचकित ही होगा। हिमाचल में रहने वाले राज्यवासी, हिमाचल से उत्तीर्ण हुए इंजीनियर भी इस बात को सुनकर हैरान रह जाएंगे कि हिमाचल में आखिर यह आईटी पार्क है कहां? लेकिन जो विद्यार्थी 2014 में इंजीनियरिंग कर रहा था या इंजीनियरिंग में स्नातक हुआ था, उनको जरूर याद होगा कि हिमाचल सरकार ने वर्ष 2014 में आईटी पार्क का प्रस्ताव रखा था। पहले कुछ समय तक शिमला में इसे खोलने के लिए उचित स्थान तलाशने के फरमान जारी कर शिमला स्थित मेहली में 60 बीघा जमीन पर उसे फाइनलाइज किया गया। लेकिन सरकार को लगा कि पहाड़ के युवाओं को और ज्यादा रोजगार की जरूरत है, इसलिए सन् 2017 में कांगड़ा के गगल इलाके में आईटी पार्क के लिए 32 बीघा जमीन और फाइनलाइज की गई। सरकार के आदेशानुसार अब प्रदेश के युवाओं के पास दो आईटी पार्क हुए, जिनमें कई कंपनियां अपना सेटअप स्थापित करेंगी। जैसे कि गूगल इंफोसिस, विप्रो, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट इत्यादि।

इनसे सैकड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस योजना को धरातल पर उतरते देख चिंतित मां-बाप भी यह सोच खुश हो गए कि अब उनके पढ़े-लिखे इंजीनियर बेटा-बेटी को अपना राज्य छोड़कर रोजगार के लिए बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। परंतु सब बातें तब निराधार हो जाती हैं, जब वर्ष 2020 की समाप्ति होने को है, मगर इन दोनों आईटी पार्क के शिलान्यास होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं हुई है। इससे जनता के मन में प्रश्न उठते हैं कि क्या सरकार सिर्फ  वोट इकट्ठा करने के लिए बेरोजगार युवाओं को प्रलोभन दे रही है या सरकार इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि वैकेंसी का लालच देकर सिर्फ युवाओं के मन से खेल रही है? मौजूदा समय में यदि नजर दौड़ाई जाए तो आईटी इंडस्ट्री इस समय सबसे ताकतवर है।

इसमें उन्नति करने की बहुत सी संभावनाएं हैं। इस युग में सब काम कंप्यूटर के बिना अधूरे हैं। हम किसी भी क्षेत्र की बात करें तो बैंक, शिक्षा, मेडिकल, डिफेंस, सरकारी और गैर सरकारी महकमों में आईटी इंडस्ट्री के पैर हर जगह पसरे हैं। आजकल हम किसी भी काम से सिर्फ  एक क्लिक दूर होते हैं। यहां तक कि खरीददारी भी करनी हो तो बहुत सी ऑनलाइन शॉपिंग एप्स हैं जिनसे हम कपड़े, राशन, दवाइयां, फर्नीचर, गहने, किताबें और कई रोजाना उपयोग की वस्तुएं खरीद सकते हैं। भारतीयों  ने  आईटी इंडस्ट्री में  देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी अपना डंका बजाया हुआ है, जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी वर्ल्ड फेमस कंपिनयों के सीईओ भारतीय हैं। इसके अलावा भी बहुत सी आईटी कंपनियां हैं, जिनमें भारतीयों का बोलबाला है। बहुत सी चर्चित एप्लीकेशन जैसे कि पेटीएम, मंत्रा इत्यादि भारतीय द्वारा बनाई गई हैं। यदि सरकार सचमुच में आईटी पार्क खोलने के मूड में है तो पहाड़ के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। वहीं हो सकता है कोई योग्य प्रतिभागी ऐसा कोई सॉफ्टवेयर या एप्लीकेशन ईजाद कर दे जिससे हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन हो। इंजीनियरिंग किए हुए अभ्यर्थियों के पास वैसे भी जॉब अपॉर्चुनिटी कम ही हैं। रोजगार के अवसर तथा सही दिशा न मिल पाने के कारण प्रदेश के बेरोजगार बेहद परेशान हैं। इसके चलते वे भटक कर नशे के दलदल में भी फंसते चले जा रहे हैं। नशे का दलदल इतना भयानक है कि हमारे देखते-देखते वह प्रदेश  को खोखला किए जा रहा है।

इसके अलावा जिस किसी को आईटी कंप्यूटर का अच्छा नॉलेज है तो कई युवा मजबूरी के चलते ऑनलाइन फ्रॉड जैसे गोरख धंधे में संलिप्त हो अपना व परिवार का भरण-पोषण करने में जरा सी भी हिचकिचाहट नहीं दिखा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर यदि कोई युवा ऑनलाइन क्राइम करने में अपना दिमाग व ऊर्जा लगा रहा है तो जरा सोचिए इसे यदि योग्य प्लेटफार्म दिया जाता है तो यह वर्ग क्या नहीं कर दिखा सकता। नौकरी न मिल पाने से हताश व निराश युवा पीढ़ी अपनी इहलीला समाप्त करने से भी गुरेज नहीं कर रही है। हिमाचल सरकार को संवेदनात्मक भाव रखकर इस आईटी पार्क की  संकल्पना को संजीदगी से लेना चाहिए और जल्द से जल्द इसके काम की शुरुआत करनी चाहिए। यदि सरकार सच में प्रदेश के विकास और देश की उन्नति में भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है तो शीघ्र इन आईटी पार्क के शिलान्यास कर इन्हें प्रारंभ करे। प्रदेश में अगर नेशनल या इंटरनेशनल कंपनियां निवेश करेंगी तो इसका फायदा सरकार को ही होगा, जिससे वह प्रदेश में कई अन्य महत्त्वपूर्ण विकास कार्यों को भी अंजाम दे सकती है। प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में युवा इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहे हैं। इसके लिए सरकार ने कई इंजीनियरिंग संस्थान खोल रखे हैं।

इन युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार देने के लिए आईटी पार्क होने चाहिएं। आईटी पार्क की अनुपस्थिति में इन युवाओं को पढ़ाई करने के बाद बाहर के प्रदेशों में रोजगार ढूंढने जाना पड़ता है। इस तरह प्रदेश से प्रतिभाओं का पलायन भी हो रहा है। सरकार को यह भी समझना चाहिए कि कोरोना वायरस की महामारी के दौर में असंख्य लोगों की नौकरियां छूट गई हैं। वे अब बेरोजगार घूम रहे हैं। उन्हें अपने रोजगार वापस दिलाने के लिए सरकार को प्रदेश में पहले से घोषित आईटी पार्क तो शुरू करने ही होंगे, बल्कि साथ ही हर जिला में एक आईटी पार्क खोलने की घोषणा भी करनी चाहिए। ऐसा करके ही हम पढ़े-लिखे इंजीनियरों को रोजगार दे पाएंगे तथा उन्हें असामाजिक कार्यों से दूर रख पाएंगे।

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