Sunday, October 25, 2020 02:03 AM

वन विभाग का बैरियर बना सफेद हाथी

यशवंतनगर में बैरियर पर पिछले करीब तीन दशक से अवैध लकड़ी का नहीं पकड़ा कोई भी केस

यशवंतनगर-वन माफिया पर लगाम कसने के दृष्टिगत करीब चार दशक पहले वन विभाग द्वारा यशवंतनगर में बैरियर स्थापित किया गया था जो कि वर्तमान में सफेद हाथी बन चुका है। इस बैरियर पर  पिछले करीब तीन दशक से अवैध लकड़ी का कोई भी केस नहीं पकड़ा गया है, जबकि यह बैरियर 24 घंटे क्रियाशील है जिस पर एक डिप्टी रेंजर, एक फोरेस्ट गार्ड के अतिरिक्त चार फोरेस्ट वर्कर तैनात किए गए हैं जिनका प्रतिमाह करीब अढ़ाई लाख का वेतन का खर्चा सरकार को वहन करना पड़ता है। बता दें कि 60 के दशक में अपर शिमला व सिरमौर के ऊपरी क्षेत्रों से लकड़ी का बहुत कारोबार होता है। ठेकेदार वनों को काटकर उसके शहतीर बनाकर गिरि नदी में घाल अथवा ट्रकों के माध्यम से हरियाणा की यमुनानगर मार्केट में पहुंचाते थे। उन दिनों वन माफिया भी काफी सक्रिय हुआ करते थे जिसके चलते वन विभाग द्वारा यशवंतनगर में बैरियर स्थापित किया गया था।

गौर रहे कि इस बैरियर पर चकमा देकर बाघ व चीते की खाल के तस्करों को सोलन पुलिस द्वारा अनेक बार पकड़ा है, परंतु काफी अरसे से इस बैरियर पर अवैध लकड़ी, जानवरों की खाल, जंगली जड़ी-बूटियों का अवैध कारोबार इत्यादि का कोई मामला नहीं पकड़ा गया है। एक ओर जहां सरकार द्वारा माली हालत को देखते हुए अनेक खर्चों में कटौती की गई है, वहीं इस बैरियर पर तैनात कर्मचारियों के वेतन का बोझ सरकार को वहन करना पड़ रहा है। बैरियर पर तैनात कर्मचारियों का कहना है कि वनों के कटान पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के उपंरात पिछले काफी वर्षों से लकड़ी की अवैध तस्करी बंद हो गई है जिस कारण अवैध लकड़ी का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है। डीएफओ राजगढ़ संगीता महाला से जब इस बारे बात की गई तो उन्होंने बताया कि लकड़ी के अवैध कारोबार को रोकने के लिए बैरियर का होना जरूरी है और बैरियर के नाम पर वन माफिया में भय भी रहता है।

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