Sunday, November 29, 2020 07:03 AM

वर्चुअल चुनाव और बिहार: डा. चंद्र त्रिखा, वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार

डा. चंद्र त्रिखा

वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार

वर्चुअल जिंदगी, वर्चुअल संवाद, वर्चुअल कवि सम्मेलन, वर्चुअल रामलीला। शुक्र है अच्छे वस्त्र पहनने की ललक, अच्छे आवास की चाहत, पर्यटन, सड़कों पर वाहनों का पुरानी गति से चहकना, दौड़ना, यह सब वर्चुअल नहीं हो रहा। प्रेम संवाद वर्चुअल है, क्रोध का प्रकटीकरण वर्चुअल है, दफ्तरी काम वर्चुअल है, सब ऑनलाइन। कितने बदलाव एकाएक आ गए हैं जिंदगी में। और अब चुनावी राजनीति भी वर्चुअल हो रही है।

अपनी रैलियों, शक्ति प्रदर्शनों और बड़े पैमाने पर रोड शो के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाला बिहार पहली बार अपने विधानसभा चुनावों में इन सबके लिए छटपटा रहा है। जेपी, ललित नारायण मिश्रा, कर्पूरी ठाकुर, लालू यादव, रामविलास पासवान और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ऐतिहासिक रैलियों की चर्चा आज भी होती है। मगर सिर्फ पुरानी बातें याद करने के बहाने से। इस बार कमोबेश सारा चुनाव प्रचार वर्चुअल और डिजिटल तौर-तरीकों से हो रहा है। प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के स्थानीय चैनल भी सक्रिय हैं, लेकिन रैलियों वाले मैदान खाली हैं। टैंट हाउस वाले खाली हैं, झंडे, बैनर, बैज आदि बनाने वालों के पास सिर्फ  एक-चौथाई काम बचा है। आम शहरी आदमी को, ग्रामीण मतदाताओं को वर्चुअल और डिजिटल की पूरी परिभाषा भी मालूम नहीं है। मगर सभी जान गए हैं कि यह मामला स्मार्ट फोन से जुड़ा है। जिन उम्मीदवारों के पास संसाधन हैं, वे फोन भी बांट रहे हैं। बिहार में इन दिनों जदयू ने भी वर्चुअल सभाओं व डिजिटल माध्यम से प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी वर्चुअल सभाओं की शुरुआत कर दी है। नीतीश कुमार की रैलियां जदयू लाइव डॉट कॉम व मिस्ड काल पर सुनी जा रही हैं। विपक्ष के अन्य दल भी इसी तरह के प्रचार तरीकों पर अमल करने जा रहे हैं। हालांकि इसके साथ परंपरागत प्रचार अभियान भी होगा। नेता हेलिकॉप्टर में उड़ेंगे और रैलियां भी होंगी, जनसंपर्क भी होगा। भाजपा ने राज्य में लगभग दस हजार सोशल मीडिया कमांडो के साथ स्मार्ट फोन वाले चार लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को बूथों पर तैयार कर रखा है जो प्रधानमंत्री व अन्य प्रमुख नेताओं की वर्चुअल सभाओं को अपने-अपने बूथ से जनता तक पहुंचाएंगे। पार्टी ने हर बूथ के लिए ऐसे पांच कार्यकर्ताओं की तैयारी की है। आम जनता जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं हैं, वे इन कार्यकर्ताओं के फोन से सभाओं से जुड़ सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी लगभग एक दर्जन सभाएं होने की संभावना है। हर चरण में तीन से चार रैली की योजना बनाई गई है जिसे जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा गया से चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं और वह अब फिर से बिहार के दौरे पर जा रहे हैं। अमित शाह व राजनाथ सिंह की भी सभाएं जल्द शुरू होंगी।

मुशायरे, रामलीलाएं भी वर्चुअल :  अब मुशायरे, रामलीलाएं, कवि सम्मेलन भी फेसबुक, गूगल प्ले, वेबैक्स आदि के माध्यम से आयोजित हो रहे हैं। घर बैठे लोगों से लाइक और कमेंट्स मांगे जा रहे हैं। तारी़फ दर्ज कराने के लिए मिस्ड कॉल के माध्यम का भी उपयोग हो रहा है। बीच-बीच में ग्राफिक्स व वनों और कृत्रिम परंपरागत युद्धों के चित्र भी दिए जाते हैं। यह रिकार्ड भी किए जा रहे हैं ताकि दोबारा सुने और देखे जा सकें।

साइकिलें ही साइकिलें : अब दुनियाभर में साइकिलों का बाजार एकाएक गर्मा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल निर्यातक देश है। आल इंडिया साइकिल मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन ने बताया है कि आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमण फैलने के बाद पूर्णबंदी के कारण अप्रैल महीने में देश में एक भी साइकिल नहीं बिकी। साइकिल निर्माताओं के राष्ट्रीय संगठन एआईसीएमए के अनुसार मई से सितंबर 2020 तक पांच महीनों में देश में कुल 4180945 साइकिलें बिक चुकी हैं। आल इंडिया साइकिल मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (एआईसीएमए) के महासचिव केबी ठाकुर कहते हैं कि साइकिलों की मांग में बढ़ोतरी अभूतपूर्व है। शायद इतिहास में पहली बार साइकिलों को लेकर ऐसा रुझान देखने को मिला है। इन पांच महीनों में साइकिलों की बिक्री सौ फीसदी तक बढ़ी है। कई जगह लोगों को अपनी पसंद की साइकिल के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, बुकिंग करवानी पड़ रही है। संगठन ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमण फैलने के बाद पूर्णबंदी के कारण अप्रैल महीने में देश में एक भी साइकिल नहीं बिकी। मई महीने में यह आंकड़ा 456818 रहा। जून में यह संख्या लगभग दोगुनी 851060 हो गई जबकि सितंबर में देश में एक महीने में 1121544 साइकिल बिकीं। केबी ठाकुर कहते हैं कि कोरोना संक्रमण महामारी ने लोगों को अपनी सेहत व रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर तो सजग बनाया ही, वहीं सुरक्षित दूरी को लेकर सचेत हुए हैं। ऐसे में साइकिल उनके लिए ‘एक पंथ कई काज’ साधने वाले विकल्प के रूप में सामने आई है। उन्होंने बताया कि अनलॉक के दौरान सड़कों पर वाहनों की संख्या व प्रदूषण में कमी के कारण भी लोग साइकिल को लेकर प्रोत्साहित हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर लोग पहली बार साइकिल खरीद रहे हैं।

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