Sunday, January 24, 2021 06:08 AM

विज्ञान से भरपूर हैं भारतीय वेद और ग्रंथ

भारतीय वेदों एवं प्राचीन ग्रंथों में विज्ञान भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि इस पर अनुसंधान कर इसे विश्व के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि अपने प्राचीन विज्ञान का उचित उपयोग नहीं कर पाने के कारण वैज्ञानिक उन्नति में आपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो पाई। सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में छठे भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ 2020) पर आयोजित पूर्व-भूमिका समारोह (कर्टेन रेजर) में विज्ञान भारती हिमाचल प्रदेश अध्याय के अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अश्विनी राणा ने विज्ञान भारती एवं भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से अपने विचार रखे।

 उन्होंने विज्ञान को भारतीय भाषाओं में प्रचारित और प्रसारित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए उत्तराखंड स्थित हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन के संस्थापक डा. अनिल प्रकाश जोशी ने ग्रामीण भारत की दशकों तक उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि भारत आत्मनिर्भर तभी हो सकता है, जब ग्रामीण भारत को इसमें शामिल करेंगे। विज्ञान के बाजारीकरण से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हुई। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सचिव, वैज्ञानिक, औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. शेखर सी मांडे ने कहा कि विज्ञान को लोकप्रिय बनाने एवं जन-जन तक पंहुचाने में भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पर्व का बहुत अधिक महत्त्व है।

 ग्लोबल पब्लिक हैल्थ एंड डिस्कवरी रिसर्च, जॉनसन एंड जॉनसन के उपाध्यक्ष डा. अनिल कौल ने ‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका’ विषयक पर अपनी प्रस्तुति दी। सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डा. संजय कुमार ने विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए संस्थान द्वारा किए जिज्ञासा, विज्ञान मेले एवं प्रदर्शनियां, वैज्ञानिक-छात्र-अध्यापक संपर्क कार्यक्त्रमों, वैज्ञानिकों द्वारा स्कूलों में लोकप्रिय वैज्ञानिक संभाषणों द्वारा विज्ञान के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करने जैसे प्रयासों का विवरण दिया। वहीं आईआईएसएफ का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विज्ञान भारती के सहयोग से 22-25 दिसंबर को नई दिल्ली में किया जा रहा है।

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