Sunday, March 07, 2021 05:29 PM

नंगे पांव जलते अंगारों पर नाचे ग्रामीण

नकदी और गहनों पर किया था हाथ साफ, पुलिस ने दबोचा शातिर

कार्यालय संवाददाता — कुल्लू

जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ सटे रामशिला में एक चोरी की वारदात का मामला सामने आया है। पुलिस ने थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी और चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले शातिर को दबोच लिया है। एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने कहा कि रामशिला के एक शिकायतकर्ता ने पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा कि 19 जनवरी की रात को 11 बजे रात खाना खाकर वह सो गया। पत्नी छोटे बच्चे सहित अलग कमरे में सो गई तो समय करीब 12 बजे रात मकान के अंदर हल-चल महसूस की तो थोड़ा अलर्ट होकर देखा तो एक व्यक्ति  दरवाजे के सामने मकान के अंदर खड़ा था। वह व्यक्ति  घर के दरवाजे से बाहर की ओर भागा। शिकायतकर्ता ने कहा कि जब शोर मचाया तो वह व्यक्ति सीढि़यां उतरकर गेमन पुल की तरफ भाग गया।

शिकायतकर्ता के ड्राइंग रूम में रखे काउंटर में 15000 रुपए व एक सोने की चेन रखी हुई थी, जब वहां देखा ता काउंटर में रखे हुए 15000 रुपए व सोने की चेन वहां से गायब पाई गई। सोने की चेन की कीमत करीब 65000 रुपए थी। वहीं, शिकायतकर्ता ने कुल्लू थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए   चोरी की वारदात करने वाले प्रदीप कुमार निवासी शिलग  जिला मंडी को ट्रेस किया और उसके कमरे से चोरी किए नकदी व सोने की चेन को बरामद किया गया। एसपी ने बताया कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 457 और 380 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

देवता बंगेश्वर के सम्मान में मनाई जाती है फागुनी, लोगों ने निभाई सदियों से चली आ रही परंपरा

स्टाफ रिपोर्टर — बंजार   

उपमंडल बंजार के चनौन पंचायत के तहत आने वाले गांव मटियाना में ठूहार पर्व का आयोजन हर वर्ष बड़ी धूमधाम से किया जाता है। यह पर्व माघ मास के आठ प्रविष्टे को मनाया जाता है । गौर रहे  कि सराज घाटी में माघ मास में यह फागुनी का पर्व दूसरी बार मनाया जाता है। पहला पर्व थाटीवीड़ में मनाया जाता है और दूसरा मटियाना में उक्त पर्व को देवता बंगेश्वर के सम्मान में बड़ी धूमधाम से आयोजित किया जाता है। कारदार टेक सिंह, प्यार सिंह, कमेटी सदस्य कमली राम, नोक सिंह, रोशन लाल, हरि सिंह, विशन सिंह, सेस राम ने कहा कि यह ठूहार पर्व देवता बंगेश्वर की उपस्थिति में आयोजित किया जाता है।  इस पर्व में विशेष लोग अपने मुख में मुखोटे पहन कर के कार्रवाई का निर्वहन करते हैं और फिर देवता के आज्ञा अनुसार लोग, कारकुन, महिलाएं, बच्चे, बूढ़े एवं भगवान विष्णु का स्वरूप मढियालें विशेष स्थल पर जाकर वहां पर नृत्य करते हैं और नृत्य करते-करते इसी में मोहिनी रूप का मंचन करते हुए बीहठ को भी नचाया जाता है और जो इस बीच के नरगिस फूल को पकड़ता है, उसकी मनोकामना साल भर में पूर्ण होती है। उक्त कारकूनों  का कहना है कि यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वहन प्रतिवर्ष बड़ी धूमधाम से किया जाता है।

रस्साकशी का खेल बना आकर्षण

अंत में सभी लोग मिलकर के एक रस्साकशी अथवा गूंण  का खेल देवता के आदेश अनुसार किया जाता है और यह खेल बड़ा रोचक खेल होता है। इसमें दोनों तरफ ऊपर नीचे लोग इस रस्साकशी को खींचते हैं और जो अपनी तरफ  ज्यादा इस गूंण को खींचेगा उन लोगों की विजय होती है और फिर देवता की ओर से उन्हें आशीर्वाद दिया जाता है और उसके बाद सभी लोग देवता को अनेक पुरातन वाद्य यंत्रों की थाप पर अपने देवालय में लाया जाता है और रात्रि को यहां पर भजन संध्या तथा अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू

देवभूमि कुल्लू की शिलीराजगिरी पंचायत में ग्रामीण नंगे पांव जलते हुए अंगारों पर नाचे। यह क्रम तब तक चलता रहा, जब तक आग बुझ नहीं गई। इस दौरान अश्लील जुमले भी बोले गए। सदियों पुरानी यह अनूठी परंपरा देवता आदिब्रम्हा खोखन के सम्मान में बाखली गांव में मनाए सदियाला पर्व के दौरान निभाई गई। ग्रामीणों के जलते हुए अंगारों पर कूदने का दृश्य देखकर हर कोई हैरान रह गया। माना जाता है कि देवीय शक्ति के कारण जलते अंगारों पर चलने के बावजूद किसी को चोट नहीं पहुंचती है। बीते बुधवार रात करीब तीन बजे गांव के दर्जनों लोग मशालों के साथ बाहर निकले। इसके बाद पूरे गांव की परिक्रमा करते हुए ग्रामीण देवता आदि ब्रम्हा के प्रांगण में पहुंचे।

यहां एक विशाल जागरा (आग) जलाई गई। जब आग के जलते अंगारे बचे थे तो गांव के गांथू राम ने बाह चकोटा बोला। इसके बाद अश्लील जुमलों को बोलते हुए गांव के लोग नंगे पांव जलते अंगारों पर कूदे। इस नजारे को देखने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचे थे। जिला में मनाए जाने वाले अन्य जगहों पर सदियाला के दौरान सिर्फ मशालें जलाने की ही परंपरा है, लेकिन बाखली में लोग नंगे पांव जलते अंगारों पर कूदे हैं। वीर युवक मंडल बाखली के प्रधान संगतराम ने कहा कि देवता की शक्ति से किसी के भी पैरों में चोट नहीं आई है। अगर सच्चे मन से देवता की परंपरा का निर्वहन नहीं किया जाता तो उन्हें देवता दंड भी देते हैं।