कोरोना काल में शिक्षा के लिए वरदान बना वर्चुअल प्लैटफॉर्म, लाइव क्लासेस से छात्रों का विकास 

सिटी रिपोर्टर— धर्मशाला

कोरोना कर्फ्यू के दौरान वर्चुअल प्लैटफॉर्म ने शिक्षा व्यवस्था के लिए वरदान की तरह काम किया है। पिछले डेढ़ वर्ष के भीतर शिक्षण संस्थान और ऑफलाइन कक्षाएं बंद होने की वजह से वर्चुअल प्लैटफार्म के माध्यम से ही पढ़ाई चलती रही। इस दौरान विद्यार्थियों समेत आम लोगों ने न केवल इन्फॉर्मेशन और कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजीज के बारे में जाना, बल्कि इनका प्रयोग करना भी सीखा। इस दौरान ऐसे अध्यापक उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें फ्रीलांसर्स कहा जा सकता है। यह वो अध्यापक हैं, जो वर्चुअल प्लैटफॉर्म के जरिए छात्रों को फ्री में पढ़ाते हैं। छात्रों के लिए यू-ट्यूब चैनल, व्हाटसऐप ग्रुप और टेलिग्राम ग्रुप बनाकर कक्षाएं लगाते हैं।

वर्चुअल प्लैटफॉर्म ऐसा माध्यम है, जहां लाइव कक्षाएं, लेक्चर, मॉक टेस्ट, लाइव डिस्कशन, लिखित संदेश और अध्ययन सामग्री का वितरण किया जाता है। टेलिग्राम के एक ग्रुप में दो लाख सदस्यों को जोड़ा जा सकता है और यह सुरक्षित भी होता है। इसके लिए मोबाइल, लैपटॉप, आईपैड, व्हाइट बोर्ड, प्रोजेक्टर, डिजिटल कैमरा और माइक्रोफोन जैसे टूल्स का प्रयोग किया जाता है। अकैडमिक परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र भी वर्चुअल प्लैटफॉर्म के माध्यम से अपनी पढ़ाई निरंतर जारी रख पा रहे हैं और इसका भरपूर लाभ ले पा रहे हैं। आईसीटी टूल्स के माध्यम से विद्यार्थी अध्ययन के साथ अपना संपूर्ण विकास भी कर पा रहे हैं। वहीं ऑफ लाइन कक्षाएं बंद होने की वजह से कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले अध्यापकों ने भी यू-ट्यूब, व्हाटसऐप और टेलिग्राम का सहारा ले लिया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वर्चुअल प्लैटफॉर्म ने शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वरदान की तरह काम किया है। इसके माध्यम से अध्यापक और विद्यार्थी दोनों घर बैठे ही एक-दूसरे के साथ संवाद कर सकते हैं। इन माध्यमों से न केवल संवाद, बल्कि वीडियो शेयरिंग और फाइलों समेत पीडीएफ सामग्री का स्थानांतरण करना संभव है। कोरोना महामारी ने तकनीक के सहारे पढ़ाई को एक नया आयाम दिया है।

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