Tuesday, April 13, 2021 09:29 AM

सलियाना मेला इस साल होगा क्या...लोगों के मन में उठने लगे सवाल, प्रशासन की कोई हरकत नहीं

नेरवा — बिजली की समस्या से जूझ रहे शिमला जिला के उप मंडल चौपाल के लोगों के सब्र का बांध आखिर टूट ही गया। बिजली बोर्ड के कोरे आश्वासनों से भड़के लोगों ने नेरवा बाजार में सड़कों पर उतर कर बोर्ड और 66 केवीए ट्रांसमिशन लाइन व सब-स्टेशन का निर्माण करने वाले एचपीपीटीसीएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के बाद व्यापार मंडल और पंचायत प्रतिनिधियों ने तहसीलदार नेरवा के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से दोनों को दो टूक चेतावनी दी गई है कि यदि 66 केवीए कार्य को पूरा करने सम्बन्धी लिखित आश्वासन नहीं दिया गया गया और विद्युत् व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो 15 दिन के बाद और अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके विरोध स्वरुप नेरवा बाजार भी आज साढ़े ग्यारह बजे तक बंद रहा।

नौहराधार — सिरमौर जिला के नौहराधार क्षेत्र अंतर्गत दूरदराज क्षेत्र भोग भट्यूडी संपर्क मार्ग के चार किलोमीटर लंबे हिस्से को बस योग्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत 10 लाख की राशि स्वीकृत हुई है। इस मुहिम के तहत लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता खजान सिंह व बलवीर सिंह ने विभाग के अन्य स्टाफ सहित सड़क का निरीक्षण किया।

बता दें कि भोग गांव के लोग आज तक सड़क सुविधा से महरूम थे, जिन्हें खड़ी चढ़ाई चढ़ मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता था। मगर अब बजट आने व सड़क के लोक निर्माण विभाग के अधीन होने से उम्मीद जगी है कि अब लोग अपनी नगदी फसलों के अलावा खुद गाडिय़ों में सफर कर मुख्य सड़क तक पहुंच सकेंगे। सड़क मिलने की उम्मीद से भोग गांव के लोग काफी खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि संकट के दिन अब पूरे होने वाले हैं।

पंचरुखी - कांगड़ा जिला के ऐतिहासिक सलियाना छिंज मेले के आयोजन पर इस वर्ष भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिला स्तरीय आयोजन को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई हलचल नहीं सुनाई दी है, हालांकि अभी मेले को समय है, लेकिन सवाल अभी से पूछा जाने लगा है, क्योंकि अन्य स्थानों पर मेलों को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है।

दूसरी ओर, पालमपुर होली मेला कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के तहत पालमपुर में आयोजित हो रहा है, लेकिन दंगल का आयोजन नहीं होने के बात प्रशासन ने कही है। ऐसे में देखें तो सलियाना मेला दंगल यानी कुश्ती को लेकर ही प्रसिद्ध है।

वर्ष 1848 से मनाए जा रहे इस आयोजन पर पिछले साल कोरोना का ग्रहण लग गया और अब यह आशंका भी जोर पकडऩे लगी है कि कहीं कुश्तियों पर रोक होने से आयोजन फिर न टल जाए।