Tuesday, November 30, 2021 09:27 AM

आज होगी लंका पर चढ़ाई

धूमधाम से होगा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का समापन

कार्यालय संवाददाता — कुल्लू विश्व में प्रसिद्ध देव समागम कुल्लू यानी अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का समापन गुरुवार को होगा। बता दें कि जहां देश भर में दशहरा धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन देवभूमि कुल्लू में दशहरा की अपनी एक अलग ही पहचान है। यह अपनी अनोखी परंपरा के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। इस दशहरे में न तो रावण का पुतला जलाया जाता है और न ही कोई रामलीला होती है। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव परंपरा, रीति-रिवाज और ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्त्व रखता है। 1660 में यहां सबसे पहला दशहरा उत्सव मनाया गया था।

बता दें कि ढालपुर में मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा भगवान रघुनाथ जी के सुल्तानपुर अपने मंदिर पहुंचते ही संपन्न होगा। इससे पहले ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविर से लेकर पशु मैदान तक रथयात्रा निकाली जाएगी और लंकाबेकर में देवकारज पूरा करने के बाद देवी-देवता और रथ ढालपुर के लिए वापस आएंगे। उसके बाद भगवान रघुनाथ जी अपने देवालय सुल्तानपुर पहुंचेंगे और अन्य देवी-देवता अपने-अपने देवालयों की ओर रवाना हुए। उत्सव में हालांकि जिलाभर से 365 तक देवी देवताओं के शिरकत करने का इतिहास रहा है। इस बार भी काफी संख्या में देवी-देवता भाग लेंगे। उत्सव में पहुंचे देवी-देवता सात दिनों तक अपने हारियानों के साथ रहे और अब उत्सव संपन्न होने के बाद देवी-देवता एक साल भर के लिए फिर से बिछड़ जाएंगे।