Tuesday, October 27, 2020 04:44 PM

यह सिर्फ गुफा नहीं, लाहुलियों की है आजादी की राह, नहीं सताएगी अपनों से दूर रहने की चिंता

बर्फ की कैद में रहने वालों को नहीं सताएगी अपनों से दूर रहने की चिंता, इलाज में रोड़ा नहीं बनेगा दर्रा

आजादी के दशकों बाद ही सही, लेकिन अब लाहुलवासियों को बर्फ की कैद में रहने से डर नहीं लगेगा। अपनों से दूर होने का एहसास भी कम होगा। जी हां! तीन अक्तूबर को देश के प्रधानमंत्री अटल टनल रोहतांग का उद्घाटन करने जा रहे हैं। ऐसे में अब टनल से होते हुए सर्दियों में भी  लाहुलवासी अपनों से मिल सकेंगे। जिला लाहुल-स्पीति के लोगों को अब बर्फ की कैद से आजादी भी मिल जाएगी और सर्दियों में गंभीर रूप से बीमार होने पर अपनों से बिछुड़ने का जो डर रहता था, वह भी नहीं सताएगा। अब बीमार होने पर भी आसानी से कुल्लू उपचार के लिए समय पर लोग लाहुल से पहुंच सकेंगे। यानी अब सर्दियों में रोहतांग दर्रा किसी की भी मौत का कारण नहीं बन बनेगा। लाहुल-स्पीति को 12 महीने शेष दुनिया से जोड़े रखने के लिए रोहतांग दर्रा के नीचे से बहुप्रतिक्षित अटल टनल रोहतांग बनकर तैयार हो गई है, जिसका तीन अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण किया जाएगा।

उसके बाद से लाहुलवासी आसानी से अपनी आवाजाही टनल के माध्यम से जारी रखेंगे। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं रहेगी। सर्दियों में बर्फ  पड़ने के चलते लाहुल शेष विश्व से करीब छह माह के लिए कट जाता था। छह महीने का पूरा राशन सहित अन्य खाने की चीजें भी लोग पहले ही एकत्रित कर रखते थे। ताजी सब्जियां खाने के लिए भी यहां के स्थानीय लोगों सहित सरकारी कर्मचारियों को भी लंबा इंतजार करना पड़ता था। सर्दियों में सरकारी कर्मचारी भी अपने कार्यालयों में कम मिलते थे। बहुत से अधिकारी अपना तबादला लाहुल-स्पीति के लिए होने पर काफी इतराते थे, लेकिन शायद अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि टनल से जाने का रास्ता जितना आसान हुआ है। उतना ही यह सफर और सुहाना भी हुआ है। हसीन वादियों के बीच से होते हुए और 9.02 टनल का सफर करीब नौ मिनट में तय कर लाहुल पहुंचा, अब बेहद रोमांचिक भी हो चुका है। ऐसे में अब तबादले भी कम होंगे।

बस में लाहुली परिधान में बैठेंगे लोग

अटल टनल रोहतांग के तीन अक्तूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन करेंगे और बस को हरी झंडी देंगे, तो उस दौरान लोग सभी अपने लाहुल  के पारंपरिक परिधान में होंगे। इसी के साथ नॉर्थ पोर्टल से लेकर सिस्सू तक जगह-जगह जोरदार स्वागत प्रधानमंत्री का होगा और लोग अपने पारंपरिक परिधान में महिला व पुरुष आएंगे। यानी प्रधानमंत्री कार्यक्रम में लाहुल घाटी के बुजुर्गों को सम्मानित करेंगे। वह साउथ पोर्टल में बस को हरी झंडी दिखाएंगे और उसके बाद 15 लोगों को बस में बिठाया जाएगा।

प्रधानमंत्री के लिए तैयार हो रहा छुबा

प्रधानमंत्री के लिए खास तौर पर लाहुली पारंपरिक परिधान, जिसे छुबा भी कहा जाता है। वह तैयार किया जा रहा है। अनेक पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जा रहे हैं। अगर समय मिला, तो प्रधानमंत्री परिधान पहनने के साथ-साथ लाहुली व्यंजन खाने का लुत्फ उठाएंगे। प्रधानमंत्री बाहर का भोजन कम ग्रहण करते हैं, लेकिन हिमाचल को अपना दूसरा घर मानने वाले प्रधानमंत्री का कुल्लू-मनाली से खासा स्नेह है। ऐसे में कुल्लू सहित लाहुल की संस्कृति से भी वह रू-ब-रू हैं। उन्हें यहां की संस्कृति, खानपान और पहनावे के लिए किसी परिचय की जरूरत नहीं है। प्रदेश भाजपा प्रभारी रहते वह यहां के लोगों के चेहरे भी पहचानते हैं। सभी का नाम उन्हें याद है। ऐसे में प्रधानमंत्री के कुल्लू व लाहुल दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है, जिसे लेकर अपनी ओर से पूरी तैयारी लाहुसवासियों व भाजपा पदाधिकारियों की ओर से की जा रही है।

बेहद अहम होगा पल

तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने बताया कि अटल टनल रोहतांग के लोकार्पण के दौरान सरकार बुजुर्गों को सम्मानित करने के बाद सुरंग का भ्रमण करवाएगी। क्योंकि सुरंग के निर्माण की नींव रखने में इन लोगों ने बहुत संघर्ष किया है। इन्होंने लाहुल से दिल्ली में प्रधानमंत्री के कार्यालय जाकर कई बार यह मांग रखी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से सुरंग निर्माण की घोषणा के बाद भी कई तरह कागजी कार्रवाई के लिए इन लोगों ने खुद दिल्ली के चक्कर लगाए। वास्तव में लाहुल वासियों के लिए अटल टनल रोहतांग का लोकार्पण बेहद ही भाव विभोर कर देने वाला पल रहेगा, जिसे सभी लाहुलवासी अपनी आंखों में संजोकर हमेशा के लिए रखेंगे। प्रधानमंत्री के स्वागत को लेकर सभी तैयारी की जा चुकी है।

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