Monday, November 19, 2018 05:08 PM

विस्तार के साथ गुणवत्ता भी है आत्मा रंजन के लेखन में

हिमाचल के प्रसिद्ध कवि व लेखक आत्मा रंजन का जन्म 18 मार्च, 1971 को शिमला के निकट गांव हरीचोटी चनारड़ी (धामी) में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमए व एम फिल पास हैं। इनका सृजन संसार काफी विस्तृत है होने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण भी है। देश भर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रकाओं यथा पहल, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, शुक्रवार, बया, समावर्तन, जनपथ, कृतिओर, शिखर, आकंठ, विपाशा, इरावती, पर्वतराग, रविवारी जनसत्ता, रसरंग आदि में इनकी कविताओं के अलावा कुछ कहानियां और समीक्षाएं आदि भी प्रकाशित हुई हैं। कुछ रचनाएं संपादित संग्रहों में भी प्रकाशित हैं। इनकी अनेक रचनाओं का अंग्रेजी, पंजाबी, उर्दू, गुजराती, मलयालम, बांग्ला, असमिया और नेपाली में अनुवाद भी हुआ है। इनका हालिया कविता संग्रह ‘पगडंडियां गवाह हैं’ अंतिका प्रकाशन से प्रकाशित है जो काफी चर्चित रहा है। अनेक महत्त्वपूर्ण आलोचना पुस्तकों में इनकी कविताओं पर आलेख प्रकाशित हुए हैं। मिसाल के तौर पर नामवर सिंह, मेनेजर पांडे, मदन कश्यप, चंचल चौहान, श्रीनिवास श्रीकांत, अरुण होता, जितेंद्र श्रीवास्तव, सुधा उपाध्याय, ज्योतिष जोशी, जीवन सिंह, अमीरचंद्र वैश्य, रमाकांत शर्मा, महेश पुनेठा, भरत प्रसाद, रमाकांत रॉय, आदित्य कुमार सिंह, आशीष सिंह, बृजराज सिंह जैसे लब्ध प्रतिष्ठित आलोचकों ने इनकी कविताओं को विभिन्न पत्रिकाओं और मंचों पर विस्तृत टिप्पणियों के साथ सराहा है। इन्हें अब तक कई पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं।  इन्हें मिले पुरस्कारों में शामिल हैं युवा शिखर साहित्य सम्मान (शिमला)-2010, सूत्र सम्मान (छत्तीसगढ़)-2014, सृजनलोक युवा कविता सम्मान (चेन्नई)-2016 व ओकार्ड इंडिया (दिल्ली) का साहित्य सृजन सम्मान-2017। इसके अलावा इन्हें हाल ही में नवल प्रयास संस्था ने धर्म प्रकाश स्मृति साहित्य रतन सम्मान भी दिया। यह आजकल हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग में वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के प्राध्यापक (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में यह स्वस्तिका भवन, ग्राउंड फ्लोर, न्यू टुटू, शिमला में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। इनका जीवन संघर्ष में बीता तथा अब भी यह लेखन के प्रति समर्पित हैं। कविता इनके लिए अपने भीतर के मनुष्य की शिनाख्त है। अकसर लेखक फरिश्ता होना चाहते हैं, देवता होना चाहते हैं, किंतु व्यावहारिक जीवन में अकसर मनुष्य से भी नीचे का व्यवहार करते पाए जाते हैं। यह दोहरा मापदंड इन्हें स्वीकार्य नहीं है क्योंकि कविता सही के पक्ष में खड़े होने का नैतिक साहस है। पाठक इनके सृजन पर अपनी प्रतिक्रियाएं मोबाइल नंबर 9418450763 पर दे सकते हैं।

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